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जंगली हाथी की मौत का राजफाश, फार्महाउस मालिक समेत तीन गिरफ्तार

जंगली हाथी की मौत के बाद फार्महाउस के भीतर ही चुपके से छिपाया गया शव। बिजली के करंट से हुई हत्या, जांच में खुलासा होते ही मची सनसनी।

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg फार्महाउस में दफनाया गया हाथी का शव

फार्महाउस में दफनाया गया हाथी का शव

धेनकनाल, ओडिशा। जंगली हाथी की मौत ने एक ऐसे खौफनाक कृत्य को जन्म दिया है जिसने पूरे वन क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। धेनकनाल जिले के हिंदोल वन क्षेत्र में एक फार्महाउस के मालिक और उसके साथियों ने कथित तौर पर बिजली के करंट से एक विशालकाय हाथी की हत्या कर दी और सबूत मिटाने के लिए उसके शव को फार्महाउस के भीतर ही चुपके से दफन कर दिया। इस घटना का खुलासा तब हुआ जब मुखबिर की सूचना पर वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर खुदाई की और हाथी का सड़ा-गला शव बरामद किया।[1]

यह घटना हिंदोल उपखंड के राजमोहनपुर क्षेत्र की है, जहां 3-4 दिन पहले इस दर्दनाक वारदात को अंजाम दिया गया था। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, जंगली जानवरों को दूर रखने के लिए फार्महाउस के चारों ओर सोलर फेंसिंग लगाई गई थी, जिसके संपर्क में आने से हाथी की तड़प-तड़प कर मौत हो गई। हत्या के बाद फार्महाउस मालिक प्रमोद कुमार राज उर्फ कुबेर ने मामले को रफा-दफा करने के लिए जेसीबी मंगवाई और हाथी को दफन कर दिया, ताकि किसी को भनक तक न लगे।

खुदाई से खुला राज

जंगली हाथी की मौत का यह मामला वन अधिकारियों की मुस्तैदी से सतह पर आया। धेनकनाल के प्रभागीय वन अधिकारी (DFO) ललित कुमार पात्रा और अंगुल आरसीसीएफ संजय स्वैन ने अपनी टीमों के साथ सोमवार को घटनास्थल पर छापा मारा। जेसीबी से खोदे गए गड्ढे से जब हाथी का शव बाहर निकाला गया, तो वहां मौजूद हर अधिकारी हैरान रह गया। आरोपी मालिक, देखभाल करने वाले और जेसीबी ऑपरेटर को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया है।

"इस मामले में फार्महाउस मालिक और दो सहयोगियों सहित कुल तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सटीक कारणों का पता चल पाएगा।" - ललित कुमार पात्रा, डीएफओ।

वन विभाग ने आरोपी द्वारा इस्तेमाल की गई जेसीबी मशीन को नरसिंहपुर क्षेत्र से जब्त कर लिया है। विभाग इस बात की जांच कर रहा है कि क्या यह महज एक दुर्घटना थी या इसे जानबूझकर हाथी के लिए जाल बिछाकर किया गया था। जिस तरीके से शव को छिपाया गया, वह अपराधियों की सोची-समझी साजिश की ओर इशारा करता है। घटना स्थल के आसपास के ग्रामीणों में भी इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि कैसे इंसानी लालच के लिए एक मूक जानवर की जान ले ली गई।

बर्बरता की हदें

जिस जंगली हाथी की मौत हुई उसकी उम्र 30 से 40 वर्ष के बीच बताई गई है। अंगुल आरसीसीएफ संजय स्वैन ने बताया कि यह एक 'मखना' हाथी था, जिसके दांत नहीं होते। फॉरेंसिक और वेटनरी टीम ने घटनास्थल पर ही शव का पोस्टमार्टम किया है ताकि मौत की वास्तविक स्थिति का पता चल सके। इस तरह की बरबरता के बाद पर्यावरणविदों ने वन क्षेत्रों में अवैध तरीके से लगाए गए बिजली के बाड़ों (फेंसिंग) पर सवाल खड़े किए हैं, जो अक्सर वन्यजीवों के लिए मौत का जाल बन जाते हैं।

"यह एक मखना हाथी है। शव का पोस्टमार्टम किया जा रहा है और परिणामों के बाद ही हम इस निष्कर्ष पर पहुंचेंगे कि मौत का असली कारण क्या है।" - संजय स्वैन, अंगुल आरसीसीएफ।

फार्महाउस में हाथी का शव मिलने के बाद से ही क्षेत्र में सन्नाटा पसरा हुआ है। यह घटना दर्शाती है कि कैसे वन क्षेत्रों के पास बसे फार्महाउसों में वन्यजीवों की सुरक्षा को ताक पर रखा जा रहा है। आरोपियों ने अपराध के बाद जो सफाई दी है, उस पर भी विभाग को संदेह है। क्या ये आरोपी किसी बड़े सिंडिकेट से जुड़े हैं जो वन भूमि पर अवैध कब्जा और वन्यजीवों के अवैध शिकार का काम कर रहे हैं? यह जांच का मुख्य बिंदु बन चुका है।

कानूनी शिकंजा कसा

जंगली हाथी की मौत के बाद से धेनकनाल वन विभाग का यह अभियान अब और भी सख्त हो गया है। पकड़े गए तीनों आरोपियों से कड़ी पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्होंने शव को नष्ट करने की कोशिश क्यों की थी। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की कड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज होने से आरोपियों को लंबी जेल की सजा हो सकती है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में इस तरह की किसी भी अवैध गतिविधि को बख्शा नहीं जाएगा।

यह रिपोर्ट वन अधिकारियों द्वारा दी गई प्रारंभिक जानकारी और जांच के आधार पर तैयार की गई है। वन्यजीव अपराधों से जुड़ी न्यायिक प्रक्रिया और पोस्टमार्टम के अंतिम निष्कर्षों की पुष्टि के लिए आधिकारिक वन विभाग के दस्तावेजों का संदर्भ लें। लेखक, प्रकाशक एवं संपादक वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और वन संरक्षण नियमों का पालन करने का सुझाव देते हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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