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शौर्य चक्र विजेता का दुखद निधन: देश ने खोया अपना जांबाज जांबाज बेटा

शौर्य चक्र विजेता का दुखद निधन, मरीन कमांडो अमित सिंह राणा की कार 500 फीट गहरी खाई में गिरी, देश के वीर सपूत के जाने से छाया मातम।

By अजय त्यागी
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advertisement13Aug2026%20copy.jpg शौर्य चक्र विजेता का दुखद निधन

शौर्य चक्र विजेता का दुखद निधन

कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश। शौर्य चक्र विजेता का दुखद निधन एक ऐसी दुखद घटना है जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। भारतीय नौसेना के विशिष्ट मरीन कमांडो (MARCOS) अमित सिंह राणा, जिन्होंने अपनी वीरता से दुश्मन के दांत खट्टे किए थे, एक भीषण सड़क हादसे का शिकार हो गए। यह घटना इतनी खौफनाक थी कि इसे सुनकर हर कोई स्तब्ध है।

अमित सिंह राणा मात्र 32 वर्ष के थे और अभी हाल ही में छुट्टी लेकर अपने घर आए थे। सोमवार रात करीब 11 बजे जब वे एक मित्र से मिलकर वापस लौट रहे थे, तभी उनकी कार अनियंत्रित होकर 500 फीट गहरी खाई में जा गिरी। यह हादसा हिमाचल प्रदेश के लहरू क्षेत्र में हुआ, जिसने एक जांबाज योद्धा को हमसे छीन लिया।[1]

बचाव अभियान की चुनौती

शौर्य चक्र विजेता का दुखद निधन होने से पहले बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग और पुलिस टीम मौके पर पहुंची। खाई इतनी गहरी थी कि राहत कार्यों में भारी मशक्कत करनी पड़ी। लगभग एक घंटे के कठिन प्रयास के बाद अमित को बाहर निकाला गया और नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

अस्पताल के डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनकी मृत्यु की खबर ने पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ा दी है। अमित अपने माता-पिता के इकलौते पुत्र थे और अपने पीछे पत्नी, चार साल का बेटा और दो बहनों को छोड़ गए हैं। उनका पार्थिव शरीर जब घर पहुंचा, तो हर आंख नम थी।

ऑपरेशन रक्षक का नायक

अमित सिंह राणा की वीरता की गाथा 'ऑपरेशन रक्षक' के दौरान पूरे देश ने देखी थी। वर्ष 2018 में जम्मू-कश्मीर में उन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर 8 आतंकवादियों को मार गिराया था। उनकी इसी अदम्य साहस और नेतृत्व क्षमता के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें वर्ष 2021 में 'शौर्य चक्र' से सम्मानित किया था।

"शौर्य चक्र विजेता का दुखद निधन देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में जो साहस दिखाया, वह हम सभी के लिए एक उदाहरण है। वे एक सच्चे राष्ट्रभक्त और योद्धा थे," सैन्य अधिकारियों ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा।

सड़क सुरक्षा पर उठे सवाल

इस हादसे के बाद स्थानीय जनता में गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जिस मोड़ पर यह दुर्घटना हुई, वहां न तो क्रैश बैरियर थे और न ही पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम। निवासियों ने प्रशासन से इस मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग की है। मंगलवार दोपहर को पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ इस वीर सपूत का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

शौर्य चक्र विजेता का दुखद निधन समाज के लिए एक बड़ा प्रश्न छोड़ गया है। क्या सुरक्षा के अभाव में हमने अपने एक अनमोल रत्न को खो दिया? उनकी शहादत और अब यह आकस्मिक निधन, दोनों ही बातें देश को हमेशा याद रहेंगी। उनका चार साल का बेटा अब उस वीरता के किस्से सुनेगा, जो उसके पिता ने देश की रक्षा के लिए रची थी।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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