H-1B वीजा का चौंकाने वाला सच: भारी फीस भरकर मिल रही प्राथमिकता
H-1B वीजा का चौंकाने वाला सच सामने आया, 2 लाख से ज्यादा आवेदकों ने 1 लाख डॉलर चुकाकर तेज प्रोसेसिंग हासिल की, स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
वाशिंगटन, संयुक्त राज्य अमेरिका। H-1B वीजा का चौंकाने वाला सच अब वैश्विक स्तर पर बहस का विषय बन गया है। ईटीवी भारत की एक रिपोर्ट के अनुसार हाल ही में अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) के सचिव मार्कवेन मुलिन ने जो आंकड़े पेश किए हैं, वे हैरान करने वाले हैं। वित्तीय वर्ष 2026 में 2.86 लाख से अधिक H-1B आवेदनों में से 2 लाख से अधिक लोगों ने 1 लाख डॉलर की भारी-भरकम राशि का भुगतान केवल वीजा प्रक्रिया को तेज करने के लिए किया है।
यह खुलासा तब हुआ जब मार्कवेन मुलिन सीनेट एप्रोपियेशन सब-कमेटी के समक्ष गवाही दे रहे थे। जब उनसे ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी के बारे में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि मोटी रकम चुकाने वाले आवेदकों के कागजात मात्र 15 दिनों में संसाधित हो जाते हैं, जबकि सामान्य आवेदनों में 7.5 महीने का लंबा समय लगता है।[1]
महंगी प्रक्रिया का प्रभाव
रिपोर्ट के अनुसार, H-1B वीजा का चौंकाने वाला सच यह है कि यह प्रणाली आर्थिक रूप से सक्षम कंपनियों के लिए तो वरदान साबित हो रही है, लेकिन ग्रामीण और छोटे संस्थानों के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गई है। अमेरिकी सीनेटर सुसान कोलिन्स ने बताया कि मेन राज्य के एक ग्रामीण अस्पताल को भी एक सर्जन को बुलाने के लिए इतनी बड़ी फीस का भुगतान करने पर मजबूर होना पड़ा।
यह स्थिति दिखाती है कि कैसे वीजा की तेज प्रोसेसिंग अब अमीरों का खेल बनती जा रही है। सुसान कोलिन्स ने स्पष्ट रूप से कहा कि सिलिकॉन वैली के कंप्यूटर एक्सपर्ट और ग्रामीण अस्पताल के डॉक्टर के बीच कोई तुलना नहीं की जा सकती। उन्होंने आग्रह किया कि चिकित्सा पेशेवरों के लिए इस फीस में छूट या कोई अलग प्रावधान होना चाहिए।
सरकारी स्तर पर मंथन
"मैं यह सुझाव दूंगा कि कैलिफोर्निया की अमीर कंपनियों के लिए कंप्यूटर विशेषज्ञ लाना और ग्रामीण मेन के अस्पताल के लिए बेहद जरूरी सर्जन लाना, दोनों में जमीन-आसमान का अंतर है। क्या आप चिकित्सा पेशेवरों के लिए इस शुल्क से छूट पर विचार करेंगे?" सुसान कोलिन्स, अमेरिकी सीनेटर।
रिपोर्ट के अनुसार, मार्कवेन मुलिन ने सीनेटर को आश्वासन दिया है कि वे इस पर विचार करेंगे कि क्या ऐसे आवेदनों को केस-दर-केस आधार पर कुछ लचीलापन दिया जा सकता है। यह H-1B वीजा का चौंकाने वाला सच ही है कि एक तरफ प्रतिभाओं की कमी है, और दूसरी तरफ प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए धन का भारी दबाव डाला जा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में संकट
H-1B वीजा का चौंकाने वाला सच केवल चिकित्सा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। अलास्का की रिपब्लिकन सीनेटर लिसा मुर्कोव्स्की ने भी ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी का मुद्दा उठाया है। उन्होंने साफ किया कि वे शिक्षकों के लिए वीजा के मुद्दे पर भविष्य में सरकार के साथ चर्चा करेंगी, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरतें बड़े शहरों से बिल्कुल अलग हैं।
शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे अनिवार्य क्षेत्रों में काम करने वाले पेशेवरों के लिए यह वीजा प्रक्रिया बहुत जटिल हो गई है। अगर समय रहते इसमें सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले समय में इन क्षेत्रों में संकट और गहरा सकता है। यह पूरी रिपोर्ट बताती है कि वीजा नियमों में बदलाव की कितनी सख्त आवश्यकता है।