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श्री साँवरिया सेठ मंदिर: तिरुपति बालाजी के रूप में प्रभु का श्रृंगार

श्री साँवरिया सेठ मंदिर में पुरुषोत्तम मास की धूम, तिरुपति बालाजी के दिव्य दर्शन और गौसेवा से भक्तों के मन में जगा भक्ति का भाव।

By अजय त्यागी
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Advertisement002309202602.jpg advertisement13Aug2026%20copy.jpg प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

भीलवाड़ा, राजस्थान (पंकज पोरवाल)। श्री साँवरिया सेठ मंदिर का प्रांगण इन दिनों भक्ति और श्रद्धा की एक ऐसी पावन धारा में बह रहा है, जिसे शब्दों में पिरोना कठिन है। पुरुषोत्तम मास के इस पवित्र समय में जब भक्त प्रभु की शरण में आते हैं, तो उन्हें केवल दर्शन नहीं, बल्कि आत्मा की शांति का अनुभव होता है। मंदिर में सजी मनमोहक झांकियां और ठाकुर जी के विभिन्न दिव्य स्वरूप हर भक्त की आँखों में भक्ति के आंसू और दिल में विश्वास जगा रहे हैं।

यह मंदिर केवल पत्थरों से बनी एक इमारत नहीं, बल्कि लाखों भक्तों की आस्था का वह केंद्र है जहां दुख-दर्द ओझल हो जाते हैं। पुरुषोत्तम मास के इस विशेष अवसर पर, ठाकुर जी का श्रृंगार इंदौर से विशेष रूप से मंगवाई गई पोशाक से किया गया, जिसमें वे साक्षात तिरुपति बालाजी महाराज के रूप में विराजमान थे। उस आलौकिक छवि को देखकर हर श्रद्धालु के मुख से स्वतः ही 'जय साँवरिया सेठ' का उद्घोष निकल रहा था।

दिव्य झांकियों का अद्भुत सफर

श्री साँवरिया सेठ मंदिर ट्रस्ट ने भक्तों के लिए दर्शनों का एक ऐसा सिलसिला शुरू किया है जो उन्हें सीधे बैकुंठ की याद दिलाता है। अब तक यहाँ मदुरै के श्री पद्मावती महालक्ष्मी मंदिर की तर्ज पर झांकियां, वामन अवतार, मत्स्य अवतार, और श्रीनाथ जी के स्वरूपों के दर्शन भक्तों को मंत्रमुग्ध कर चुके हैं। हर झांकी के पीछे एक गहरा भाव है जो हमें यह याद दिलाता है कि ईश्वर हर रूप में हमारे करीब हैं।

ट्रस्ट के सचिव कैलाश डाड बताते हैं कि प्रभु के इन स्वरूपों का दर्शन लाभ लेना एक सौभाग्य है। जब भक्त इन दिव्य झांकियों को देखते हैं, तो उनका मन सांसारिक चिंताओं से मुक्त होकर ईश्वर की भक्ति में लीन हो जाता है। यह पुरुषोत्तम मास की ही महिमा है कि मंदिर परिसर में प्रतिदिन धर्म और आस्था का ऐसा अनुपम संगम देखने को मिल रहा है, जो किसी भी भक्त की निराशा को आशा में बदलने की शक्ति रखता है।

हवन और सेवा का भाव

"वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विश्व कल्याण की कामना के साथ दी गई आहुतियां मानव मन को पवित्र करती हैं। प्रभु की भक्ति ही सेवा का आधार है," यजमान हजारी गुर्जर।

प्रातः काल के सत्र में जब यजमान हजारी गुर्जर के सानिध्य में विधि-विधान पूर्वक हवन और कीर्तन हुआ, तो पूरा वातावरण गूंज उठा। मंत्रोच्चार की गूंज ने वातावरण को सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया। मंदिर की ओर से गायों को लापसी खिलाकर की गई सेवा यह दर्शाती है कि ईश्वर की असली पूजा उनके जीवों की सेवा में है। गो-सेवा का यह भाव भक्तों को एक नई सीख देता है कि मानवता और जीव-दया ही धर्म का मूल है।

श्री साँवरिया सेठ मंदिर के प्रति यह समर्पण केवल दर्शन तक सीमित नहीं, बल्कि यह उन कार्यकर्ताओं और श्रद्धालुओं की मेहनत का फल है जो निस्वार्थ भाव से यहाँ सेवा देते हैं। चाहे वह मंदिर प्रांगण में प्रगति पर चल रहा शिव मंदिर का निर्माण हो या गौशाला में गायों की सेवा, हर गतिविधि के पीछे एक ही भाव है—सबका कल्याण। इन सेवा कार्यों में मनीष बहेड़िया, सुनील नवाल, गिरराज काबरा और हेमंत शर्मा जैसे समर्पित लोगों का योगदान प्रेरणादायक है।

भक्ति और गो-सेवा का संगम

इसी कड़ी में, कन्हैयालाल बिड़ला का 87वां जन्मोत्सव स्थानीय गौशाला में मनाना एक भावनात्मक घटना रही। उम्र के इस पड़ाव पर, जब वे गौशाला पहुंचे और अपनी श्रद्धा से गायों को लापसी खिलाई, तो यह दृश्य भावुक कर देने वाला था। उन्होंने सभी के जीवन में खुशहाली की कामना की। यह दिखाता है कि जब इंसान प्रभु के रंग में रंग जाता है, तो उसे अपनी खुशी दूसरों की सेवा में ही दिखाई देती है।

श्री साँवरिया सेठ मंदिर के इस पावन आयोजन ने यह संदेश दिया है कि पुरुषोत्तम मास में की गई प्रार्थना कभी निष्फल नहीं जाती। यह समय है अपने अहंकार को मिटाने का और प्रभु के चरणों में समर्पित होने का। मंदिर का यह प्रांगण आज एक ऐसे धाम के रूप में उभर रहा है, जहां से हर भक्त खाली हाथ नहीं, बल्कि सुख-शांति और प्रभु के आशीर्वाद का संबल लेकर घर लौटता है।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief