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इबोला वायरस का साया: विदेश से लौटे लोगों ने बढ़ाई प्रशासन की धड़कन

इबोला वायरस के खतरे ने मचाई हलचल, विदेश से लौटे तीन लोगों की निगरानी जारी, स्वास्थ्य विभाग की अलर्ट से डरे हुए हैं आम नागरिक।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

(दुर्ग, छत्तीसगढ़)। इबोला वायरस के बढ़ते खतरे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मची हलचल के बीच, दुर्ग जिले में एक अजीब सी खामोशी और डर का माहौल है। जैसे ही यह खबर फैली कि तीन व्यक्ति अफ्रीका के उन देशों से वापस लौटे हैं जहाँ यह जानलेवा वायरस अपना कहर बरपा रहा है, लोगों की धड़कनें तेज हो गईं। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, इथियोपिया और युगांडा से आए इन यात्रियों के वापस आने की सूचना मात्र से ही स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से हाई अलर्ट पर आ गया है। यह भय स्वाभाविक है, क्योंकि एक अदृश्य दुश्मन की आहट किसी भी समाज की शांति छीन लेने के लिए पर्याप्त है।

कलेक्टर अभिजीत सिंह ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए इन तीनों व्यक्तियों को 21 दिनों के होम आइसोलेशन में रखा है। यह समय उनके और उनके परिवारों के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। हालांकि, प्रशासन का दावा है कि फिलहाल किसी में भी इबोला वायरस के संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन एहतियात के तौर पर बरती जा रही यह सख्ती उस चिंता को दर्शाती है जो हर नागरिक के मन में घर कर गई है। क्या हम एक और स्वास्थ्य आपातकाल के मुहाने पर खड़े हैं? यह सवाल हर किसी की जुबान पर है।[1]

खौफ और सावधानी की दास्तान

31 मई को कांगो से लौटी महिला और 2 जून को इथियोपिया तथा युगांडा से आए दो व्यक्तियों—जिनमें दो भारतीय और एक युगांडा का नागरिक शामिल है—की निगरानी का काम जारी है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी दिन में दो बार फोन पर उनका हाल ले रहे हैं। हर सुबह और शाम ली जाने वाली यह जानकारी मात्र औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह उन लोगों की धड़कनें हैं जो किसी भी छोटे से लक्षण के उभरने पर एक बड़े खतरे का अंदेशा जताते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने पहले ही इस प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (PHEIC) घोषित कर रखा है। इस वैश्विक चेतावनी के बाद केंद्र सरकार ने भी सभी राज्यों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। ऐसी परिस्थितियों में, जब शमशाबाद हवाई अड्डे पर एक विदेशी यात्री में इबोला के लक्षण पाए जाने के बाद उसे गांधी अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट किया गया, तो देश भर में डर की एक लहर दौड़ गई।

"इन व्यक्तियों को 21 दिन के होम आइसोलेशन में रखकर लगातार निगरानी की जा रही है, हालांकि अभी तक किसी में भी संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है," अभिजीत सिंह, कलेक्टर।

मानवता और सतर्कता का मेल

इबोला वायरस जैसी महामारी का नाम सुनते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। इन यात्रियों को सलाह दी गई है कि यदि उन्हें थोड़ी भी असुविधा या लक्षण महसूस हों, तो वे तुरंत स्वास्थ्य विभाग या कंट्रोल रूम को सूचित करें। यह जिम्मेदारी केवल विभाग की नहीं, बल्कि उन लोगों की भी है जो अपनों की सुरक्षा के लिए जी-जान से जुटे हैं। यह समय घबराने का नहीं, बल्कि धैर्य के साथ सतर्क रहने का है, ताकि कोई भी चूक भारी न पड़ जाए।

दुर्ग के ये 21 दिन न केवल उन तीन यात्रियों के लिए, बल्कि पूरे जिले के लिए एक इम्तिहान हैं। केंद्र और राज्य सरकार का आपसी तालमेल और स्वास्थ्य विभाग की तत्परता ही इस अदृश्य खतरे को रोकने का एकमात्र उपाय है। हम सभी प्रार्थना करते हैं कि यह एहतियात केवल सावधानी साबित हो और हमारा जिला इस संकट से सुरक्षित बाहर निकले। मानवता की इस लड़ाई में अनुशासन और जागरूकता ही हमारी सबसे बड़ी ढाल है।

अस्वीकरण

इस रिपोर्ट में दी गई जानकारी स्वास्थ्य विभाग के प्रारंभिक अलर्ट पर आधारित है। लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी प्रकार की चिकित्सीय स्थिति, महामारी के प्रसार या भविष्य के स्वास्थ्य परिणामों के लिए जिम्मेदार नहीं हैं। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी चिंता के लिए केवल आधिकारिक सरकारी दिशानिर्देशों और चिकित्सा विशेषज्ञों की सलाह का पालन करें।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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