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प्रादेशिक

ऑपरेशन डेल्टा हंट: गुजरात में घुसपैठियों पर पुलिस की बड़ी मार

ऑपरेशन डेल्टा हंट के तहत गुजरात में 362 अवैध घुसपैठियों को किया गया गिरफ्तार, फर्जी दस्तावेजों के जरिए रहने वाले हुए बेनकाब।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

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गांधीनगर, गुजरात। ऑपरेशन डेल्टा हंट के जरिए गुजरात पुलिस ने राष्ट्र की सुरक्षा और अखंडता को चुनौती देने वाले तत्वों के खिलाफ एक ऐतिहासिक मुहिम छेड़ दी है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में फैले अवैध घुसपैठियों के जाल को तोड़ने के लिए जब खाकी ने अपनी मुस्तैद नजरें घुमाईं, तो दंग रह जाने वाले तथ्य सामने आए। किसी ने सोचा भी नहीं था कि हमारे अपने पड़ोस में रहकर, छद्म पहचान की आड़ में देश की जड़ों को खोखला करने का यह खेल इतने बड़े स्तर पर खेला जा रहा था। 362 लोगों की गिरफ्तारी ने यह साबित कर दिया है कि सुरक्षा में सेंध लगाने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा।[1]

यह महज एक कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि देश की उन करोड़ों उम्मीदों की रक्षा का सवाल है, जो सुरक्षित भारत का सपना देखते हैं। पुलिस की इस कार्रवाई में 103 पुरुष, 188 महिलाएं और 71 बच्चे शामिल हैं, जिन्हें पकड़कर सच को सामने लाया गया है। जब इन लोगों के पास से भारतीय दस्तावेज बरामद हुए, तो यह सवाल हर देशभक्त के मन में उठा कि आखिर कौन है वे लोग, जिन्होंने चंद रुपयों की खातिर राष्ट्र की अस्मिता को गिरवी रख दिया?

फर्जीवाड़े का काला सच

ऑपरेशन डेल्टा हंट के दौरान अहमदाबाद में पुलिस की 30 से अधिक टीमों ने नारोल, वटवा, ओढ़व और नरोदा जैसे इलाकों में छापेमारी की, जहां से बड़े पैमाने पर अवैध घुसपैठियों को हिरासत में लिया गया। पुलिस के अनुसार, कई महिलाएं स्पा और अन्य कार्यों की आड़ में थीं, जबकि पुरुष मजदूरी और सिलाई जैसे कामों के जरिए खुद को समाज का हिस्सा बताने का छलावा कर रहे थे। ईटीवी भारत से बातचीत करते हुए जेसीपी शरद सिंघल ने बताया कि इन लोगों ने स्थानीय दलालों की मदद से फर्जी दस्तावेज बनवाए थे, जो हमारे सिस्टम की खामियों पर एक गहरा प्रहार है।

अहमदाबाद के पुलिस कमिश्नर जी एस मलिक ने बताया कि पकड़े गए संदिग्धों से जो दस्तावेज बरामद हुए हैं, उनकी गहनता से जांच की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि न केवल घुसपैठियों पर बल्कि उन पर भी कड़ी कार्रवाई होगी जिन्होंने इन्हें पनाह दी, फर्जी सिम कार्ड उपलब्ध कराए और इनके लिए अवैध दस्तावेजों का निर्माण किया। यह कार्रवाई एक भावुक अपील भी है—हर उस नागरिक से, जो अपने आसपास के संदिग्धों को देखकर भी अनजान बना रहता है, कि वे देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझें।

तकनीक और सतर्कता

ऑपरेशन डेल्टा हंट अभियान में गुजरात पुलिस ने तकनीकी बुद्धिमत्ता और मानवीय खुफिया जानकारी का बेहतरीन तालमेल बिठाया है। साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की मदद से तैयार किए गए डेटाबेस ने यह खुलासा किया कि कैसे हजारों भारतीय मोबाइल नंबरों का संपर्क सीधे बांग्लादेशी नंबरों से था। डीजीपी डॉ. के एल एन राव के नेतृत्व में 6,200 संदिग्धों का डेटाबेस तैयार करना, ऑपरेशन डेल्टा हंट की गंभीरता को दर्शाता है। पुलिस ने न केवल रेलवे स्टेशनों बल्कि तमाम पारगमन मार्गों पर भी निगरानी बढ़ा दी थी ताकि कोई भी अपराधी कानून की गिरफ्त से भाग न सके।

उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने सख्त लहजे में कहा कि गुजरात पुलिस की यह लड़ाई घुसपैठियों के साथ-साथ उन स्थानीय सहयोगियों के खिलाफ भी है, जो गद्दारी कर रहे हैं। राज्य सरकार की ओर से यह स्पष्ट कर दिया गया है कि आने वाले दिनों में और भी कड़ी कार्रवाई होगी। यह मुहिम उन लाखों परिवारों के लिए एक राहत का संकेत है जो अपने राज्य को सुरक्षित और अपराधमुक्त देखना चाहते हैं। कानून के हाथ लंबे हैं और अब वे उन सभी लोगों के गले तक पहुंच रहे हैं, जिन्होंने देश की शांति से खिलवाड़ करने की कोशिश की।

"लगभग 300 लोगों को हिरासत में लिया गया है, और प्रारंभिक जांच ने पुष्टि की है कि उनमें से 155 बांग्लादेशी नागरिक हैं," शरद सिंघल, जेसीपी, क्राइम ब्रांच।

"पुलिस यह भी जांच करेगी कि कौन से एजेंट हैं जिन्होंने ये दस्तावेज बनाए, उनकी सहायता की और पहचान पत्रों की अवैध खरीद में भूमिका निभाई," जी एस मलिक, पुलिस कमिश्नर, अहमदाबाद।

अस्वीकरण

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक और सम्पादक उत्तरदायी नहीं हैं। व्यक्तिगत पहचान पत्रों की पुष्टि करना जांच का विषय है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलने पर स्थानीय पुलिस को सूचित करें।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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