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राजस्थान

पुरुषोत्तम मास पुण्य पर्व: आध्यात्मिक और सामाजिक बदलाव की लहर

पुरुषोत्तम मास पुण्य पर्व पर महिलाओं ने भक्ति के साथ जनसेवा का अनूठा उदाहरण पेश किया है। गोविंद, गाय, गीता, गंगा और गांव का संकल्प लिया।

By अजय त्यागी
1 min read
पुरुषोत्तम मास पुण्य पर्व के आयोजन

पुरुषोत्तम मास पुण्य पर्व के आयोजन

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भीलवाड़ा, राजस्थान (पंकज पोरवाल)। पुरुषोत्तम मास पुण्य पर्व के पावन अवसर पर भक्ति और परोपकार की एक ऐसी बयार बही, जिसने हर किसी का मन मोह लिया। भोपालगंज माहेश्वरी महिला मंडल द्वारा आयोजित यह दो दिवसीय आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मा को तृप्त करने वाला एक अनुभव बन गया। मंडल अध्यक्ष सुमन सोमानी के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम ने यह सिद्ध कर दिया कि जब सेवा और श्रद्धा का मेल होता है, तो समाज का हर कोना खुशहाली से भर जाता है।

इस दो दिवसीय आयोजन में महिलाओं ने '5जी' के सिद्धांत पर चलते हुए गोविंद भक्ति, गौ-सेवा, गीता ज्ञान, गंगा महिमा और गांव उत्थान जैसे पांच महान विषयों को अपने जीवन का आधार बनाया। इन विषयों के माध्यम से उन्होंने समाज को यह संदेश दिया कि ईश्वर की सच्ची पूजा उनके बनाए हुए संसार की सेवा में ही निहित है।

आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार

कार्यक्रम के पहले दिन आनंदधाम हवेली में भक्ति का ऐसा सागर उमड़ा कि हर श्रद्धालु उसमें डूब गया। भजन-कीर्तन की मधुर स्वरलहरियों के बीच गोविंद आराधना और झूला मनोरथ का आयोजन हुआ, जिसने मन में सात्विक भाव जगा दिए। मंडल सचिव शीतल जागेटिया के अनुसार, आचार्य जी ने अधिक मास के दौरान दान, जप और गीता पाठ के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ये कार्य मनुष्य के भीतर के अंधकार को मिटाकर प्रकाश भर देते हैं।

इस अवसर पर नवनिर्वाचित पदाधिकारियों का सम्मान भी किया गया, जो एकता और आपसी प्रेम का प्रतीक बना। कुल्फी प्रसाद के वितरण के साथ दिन का समापन हुआ, जिसने न केवल मिठास घोली बल्कि मंडल की महिलाओं के बीच एकजुटता की भावना को भी और अधिक मजबूत कर दिया।

सेवा और संस्कारों की महक

कार्यक्रम के दूसरे दिन सेवा के भाव को एक नई ऊंचाइयों पर ले जाया गया। गौ-सेवा के अंतर्गत बेजुबान गायों को चारा खिलाकर पशुओं के प्रति करुणा का संदेश दिया गया। इसके बाद मंदिर परिसर में भगवद्गीता का पूजन, परिक्रमा और श्लोक पाठ ने पूरे वातावरण को पवित्र बना दिया। गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक करना ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो साक्षात गंगा का आशीर्वाद उस स्थान पर बरस रहा हो।

सेवा का यह कारवां यहीं नहीं थमा, बल्कि मंडल की महिलाएं निकटवर्ती गांवों में भी पहुंचीं। वहां बच्चों को पुस्तकें, बिस्किट और चॉकलेट वितरित कर शिक्षा का महत्व समझाया गया और पक्षियों के संरक्षण हेतु परिंडे बांधकर जीव-दया का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया गया। सुमन सोमानी और शीतल जागेटिया के नेतृत्व में हुआ यह पुरुषोत्तम मास पुण्य पर्व वाकई में एक यादगार सफर रहा।

सामूहिक प्रयासों की गूंज

इस भव्य आयोजन की सफलता के पीछे पूरी टीम की कड़ी मेहनत और समर्पण छिपा है। कोषाध्यक्ष अंजना मालू, संगठन मंत्री ललिता सोमानी, और मंडल की सभी सदस्यों ने मिलकर इस आयोजन को जिस तरह से संपन्न कराया, वह अनुकरणीय है। यह केवल एक संस्था का कार्य नहीं था, बल्कि उन सभी हाथों का मिलन था जो निस्वार्थ भाव से समाज के कल्याण के लिए कार्य कर रहे थे।

पुरुषोत्तम मास पुण्य पर्व का यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा है। जब भी हम अपने धर्म और संस्कृति की बात करते हैं, तो सेवा ही वह मार्ग है जो हमें मानवता के निकट ले जाता है। इन दो दिनों में जो भक्ति और उत्साह देखने को मिला, वह समाज में एक नई उम्मीद और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने के लिए पर्याप्त है।

Thanks to all the readers for their 3+ Years of dedication and trust
Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief