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पर्यावरण एवं वन्य जीव संरक्षण: आने वाली पीढ़ी का बड़ा संकल्प

पर्यावरण एवं वन्य जीव संरक्षण के प्रति नन्हे बच्चों में दिखा उत्साह। पोस्टर प्रतियोगिता के माध्यम से दी प्रकृति को बचाने की भावुक अपील।

By अजय त्यागी
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advertisement13Aug2026%20copy.jpg विश्व पर्यावरण दिवस पर पोस्टर प्रतियोगिता

विश्व पर्यावरण दिवस पर पोस्टर प्रतियोगिता

भीलवाड़ा, राजस्थान (पंकज पोरवाल)। पर्यावरण एवं वन्य जीव संरक्षण की पुकार आज धरती के हर कोने से आ रही है, और इस बार इस पुकार को सुना है शहर की उन नन्हीं बेटियों ने, जिनकी कल्पनाओं में एक हरा-भरा और सुरक्षित भविष्य बसता है। विश्व पर्यावरण दिवस के विशेष अवसर पर भारतीय सांस्कृतिक निधि (इंटेक) भीलवाड़ा चैप्टर द्वारा पीएमश्री राबाऊमावि बापू नगर में आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता केवल एक प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति एक भावुक समर्पण था। जब 45 छात्राओं ने अपने ब्रश और रंगों से कैनवास पर प्रकृति का दर्द उकेरा, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति का हृदय विचलित हो उठा।

हमारे पर्यावरण और वन्य जीवों का अस्तित्व आज जिस दौर से गुजर रहा है, वह किसी त्रासदी से कम नहीं है। कंक्रीट के जंगलों के बीच दम तोड़ती हरियाली और विलुप्त होते पक्षियों की आवाजें हमें एक गंभीर संदेश दे रही हैं। इन छात्राओं ने न केवल चित्रों के माध्यम से इस दर्द को साझा किया, बल्कि अपनी मासूम आंखों से हमें आईना भी दिखाया कि हम अपने ही घर—इस धरती को—किस कदर वीरान कर रहे हैं।

प्रकृति के प्रति प्रतिज्ञा

इंटेक कन्वीनर बाबूलाल जाजू ने जब छात्राओं को पर्यावरण की रक्षा के लिए शपथ दिलाई, तो वहां एक अजीब सी खामोशी थी, जिसमें जिम्मेदारी का अहसास था। उन्होंने पॉलिथीन के बढ़ते जहर को रोकने, नए पौधे लगाने और पुराने वृक्षों की रक्षा करने का आह्वान किया। साथ ही, नदी-तालाबों को अतिक्रमण से बचाने और बेजुबान पशु-पक्षियों के लिए अपना हृदय बड़ा करने की जो प्रतिज्ञा ली गई, वह समय की सबसे बड़ी मांग है।

पर्यावरण एवं वन्य जीव संरक्षण का यह आयोजन पीएमश्री बापू नगर बालिका विद्यालय सहित 10 से अधिक विद्यालयों की एकजुटता का प्रमाण बना। विद्यालय की प्रिंसिपल सुनीता नानकानी, डॉ. ओम कुमारी चौहान, प्रतियोगिता प्रभारी अमर ज्योति और सीओ गाइड कांता धोबी ने इस आयोजन में जो सहयोग दिया, वह बच्चों के भीतर छिपी संवेदनशीलता को बाहर निकालने के लिए एक नींव का पत्थर साबित हुआ।

रंगों में उतरा भविष्य

प्रतियोगिता के दौरान जूनियर वर्ग में डिंपल, तारा रेगर और मनीषा कंवर, तथा सीनियर वर्ग में वंशिका लखानी, गायत्री धाकड़ और खुशी जाट ने अपनी कला के जरिए प्रकृति की पुकार को जीवंत कर दिया। यह केवल पुरस्कार जीतने की लड़ाई नहीं थी, बल्कि यह बताने की कोशिश थी कि आने वाली पीढ़ी अब जाग रही है। जब ये बच्चियां स्मृति चिन्ह और प्रमाण पत्र ले रही थीं, तो उनकी आंखों में चमक थी कि वे आने वाले कल के लिए एक बेहतर संसार छोड़कर जाएंगी।

पर्यावरण एवं वन्य जीव संरक्षण के इस भावुक आयोजन ने हमें सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हम अपनी अगली पीढ़ी को बंजर जमीन सौंपना चाहते हैं? इन नन्हे हाथों ने पोस्टर के जरिए जो संदेश दिया है, उसे यदि हम अपने दैनिक जीवन में नहीं उतार पाए, तो यह हमारी सामूहिक विफलता होगी। आइये, प्रकृति के इस अनमोल धरोहर को सहेजने का संकल्प हम भी दोहराएं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief