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भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की बड़ी कार्रवाई, घूसखोरी का किया पर्दाफाश

नामांतरण के नाम पर रिश्वतखोरी का बड़ा खुलासा। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की बड़ी कार्रवाई में संविदा कर्मी और लिपिक रंगे हाथों गिरफ्तार।

By अजय त्यागी
1 min read
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ACB ने लिपिक और संविदाकर्मी को किया गिरफ्तार

कोटा, राजस्थान। भ्रष्टाचार के खिलाफ छेड़ी गई एक बड़ी जंग में टीम को बड़ी कामयाबी मिली है। नामांतरण खोलने की एवज में रिश्वत मांग रहे लिपिक और संविदा कर्मी को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों ने फाइल को आगे बढ़ाने के लिए मोटी रकम की मांग की थी। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम द्वारा की गई इस कार्रवाई ने सरकारी कार्यालयों में चल रहे भ्रष्टाचार के खेल को पूरी तरह उजागर कर दिया है।[1]

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने जाल बिछाया और दोनों आरोपियों को धर दबोचा। संविदा कर्मी को कार्यालय परिसर से ही गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि मुख्य आरोपी लिपिक को दूसरे सरकारी दफ्तर से बाद में पकड़ा गया। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम की यह कार्रवाई सरकारी कामकाज में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ एक कड़ा संदेश है।

रिश्वतखोरी का जाल

अधिकारियों के अनुसार, परिवादी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके भूखंड का नामांतरण खोलने की एवज में लिपिक, संविदा कर्मी के माध्यम से रिश्वत की मांग कर रहा था। सत्यापन के दौरान रिश्वत मांगने की पुष्टि होने पर टीम ने ट्रैप का जाल बिछाया। टीम ने योजना के अनुसार, कार्यालय की कैंटीन में रिश्वत लेते हुए संविदा कर्मी को रंगे हाथों गिरफ्तार किया।

पूछताछ में सामने आया कि फाइल को आगे बढ़ाने के लिए 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। इसमें से 20 हजार रुपये परिवादी पहले ही दे चुका था। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अनुसार, आरोपी ने साफ तौर पर कहा था कि जब तक पूरे पैसे नहीं मिलेंगे, फाइल आगे नहीं बढ़ेगी। शेष 15 हजार रुपये लेते हुए आरोपी ट्रैप हुए, जिससे टीम की सक्रियता स्पष्ट होती है।

नियमों की सरेआम अनदेखी

इस मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि आरोपी लिपिक को रिलीव करने के आदेश पहले ही जारी किए जा चुके थे। इसे प्रतिनियुक्ति पर आए इस लिपिक को वापस उसके मूल विभाग में भेजने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद अधिकारियों ने उसे काफी समय तक रिलीव नहीं किया, जो प्रशासनिक लापरवाही की पराकाष्ठा है।

प्रशासनिक मिलीभगत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रिलीव के आदेशों के बाद भी आरोपी फाइलों के साथ खेल करता रहा। अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना करना और भ्रष्टाचार को प्रश्रय देना, एक गहरी साठ-गांठ की ओर इशारा करता है। इस घटनाक्रम ने संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसकी अब विस्तृत जांच की जानी चाहिए।

अधिकार क्षेत्र का दुरुपयोग

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अनुसार, आरोपी ने अपनी स्थिति का फायदा उठाते हुए फाइल को बंधक बना लिया था। परिवादी अपनी संपत्ति का नामांतरण करवाना चाहता था, जिसे लिपिक ने अपनी कमाई का जरिया बना लिया था। साक्ष्य एकत्रित करते हुए बताया गया कि आरोपी ने रिश्वत के लिए फाइल को अनावश्यक लटकाए रखा था, ताकि परिवादी दबाव में आकर पैसे दे दे।

कार्रवाई के दौरान टीम ने परिसर में मौजूद रिकॉर्ड को भी सुरक्षित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। घूसखोरी की यह घटना रिलीव हुए कर्मी द्वारा रिश्वत लेने की है, जिसने महकमे की कार्यसंस्कृति पर सवाल खड़े किए हैं। अब यह देखना होगा कि इस कार्रवाई के बाद प्रशासन उन अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करता है, जिन्होंने नियमों को ताक पर रखकर आरोपी को वहां बनाए रखा।

न्यायिक प्रक्रिया और साक्ष्य

इस बड़ी कार्रवाई के बाद अन्य कर्मचारियों में भी भय का माहौल है। संविदा कर्मी की गिरफ्तारी के तुरंत बाद उसे पूछताछ के लिए दफ्तर ले जाया गया। अधिकारियों का कहना है कि रिश्वतखोरी के इस मामले में संलिप्त अन्य लोगों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ सख्त न्यायिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

टीम ने आम जनता से भी अपील की है कि यदि कोई भी सरकारी कर्मचारी किसी काम के बदले रिश्वत की मांग करता है, तो वे तुरंत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से संपर्क करें। भ्रष्टाचार के खिलाफ छिड़ी यह जंग तब तक जारी रहेगी, जब तक तंत्र पूरी तरह से पारदर्शी नहीं हो जाता। रिश्वत के पैसे लेने के मामले में पकड़े गए दोनों आरोपियों को अब अदालत में पेश किया जाएगा।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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