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जैविक खाद के नाम पर नमक का खेल हुआ बेनकाब

जयपुर में जैविक खाद के नाम पर नकली उर्वरक बनाने का बड़ा खुलासा। नमक और अन्य रसायनों से तैयार खाद को असली बताकर बेचने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ।

By अजय त्यागी
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यह गोदाम किया गया सीज

जयपुर, राजस्थान। राजधानी जयपुर में जैविक खाद के नाम पर नकली खाद बनाने के एक बड़े खेल का भंडाफोड़ हुआ है। कृषि विभाग की टीम ने एक गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी करते हुए इस अवैध कारोबार का पर्दाफाश किया है। यहाँ नमक में रंग मिलाकर उसे म्यूरेट ऑफ पोटाश और जैविक खाद के नाम पर बेचने का खतरनाक खेल चल रहा था। इस कार्रवाई के बाद से कृषि क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।[1]

कृषि विभाग की टीम ने मौके से भारी मात्रा में कच्चा माल और प्रिंटेड पैकिंग सामग्री जब्त की है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मात्र पचास रुपये की लागत से तैयार किया गया नकली माल किसानों को एक हजार से बारह सौ रुपये तक में बेचा जा रहा था। इस नकली खाद को सुदूर और खाद की किल्लत वाले इलाकों में सप्लाई किया जाता था, जहाँ किसान इसकी गुणवत्ता की जांच नहीं कर पाते थे।

नकली खाद का बड़ा जाल

कृषि विभाग के उपनिदेशक कल्याण सहाय डोडवाडिया ने बताया कि सीकर रोड स्थित रामलियावास गांव में एक गोदाम में नकली खाद बनाने की गोपनीय शिकायत मिली थी। इसके बाद कृषि विभाग के निरीक्षक सांवरमल के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। उनतीस मई को शुरू हुई यह कार्रवाई तीस मई तक चली। सर्च के दौरान मौके पर संदिग्ध खाद और बड़ी मात्रा में पैकिंग सामग्री मिली, जिसे जब्त कर लिया गया।

हरमाड़ा थानाधिकारी उदयसिंह यादव ने बताया कि विभाग की शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि यह नकली खाद किन-किन इलाकों में सप्लाई की गई थी और इस गिरोह के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। बड़े पैमाने पर हो रहे इस उर्वरक फर्जीवाड़े ने कृषि विभाग को भी चौंका दिया है, क्योंकि इससे सीधे तौर पर किसानों की फसलें बर्बाद हो रही थीं।

गोदाम में घातक सामग्री

टीम जब मौके पर पहुंची तो परिसर में किसी भी फर्म का बोर्ड नहीं लगा हुआ था। सर्च के दौरान तीन कट्टे संदिग्ध डीएपी, एक कट्टा संदिग्ध म्यूरेट ऑफ पोटाश, सात सौ पचास कट्टे औद्योगिक नमक, आठ सौ सड़सठ कट्टों में भरा दानेदार कच्चा माल और छप्पन कट्टों में साबुन के कण मिले हैं। जैविक खाद के नाम पर बेची जा रही यह नकली खाद न केवल धोखाधड़ी है, बल्कि यह मिट्टी और फसल दोनों के लिए अत्यंत घातक साबित हो सकती है।

विभाग ने गोदाम से संदिग्ध खाद के नमूने लेकर उसे सीज कर दिया है। कृषि विभाग के अनुसार, जैविक खाद के नाम पर रासायनिक और औद्योगिक कचरे का उपयोग करना उर्वरक नियंत्रण आदेश का सीधा उल्लंघन है। गोदाम से मिले दस्तावेजों में गोबर खाद के भंडारण से जुड़े प्रमाण मिले हैं, जिससे यह पता चलता है कि आरोपी किसानों को विश्वास में लेने के लिए किस हद तक जा सकते थे।

किसानों की सुरक्षा पर खतरा

जैविक खाद के नाम पर चल रहे इस कारोबार ने यह साबित कर दिया है कि नकल माफिया अपनी जेब भरने के लिए किसानों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं। नमक और साबुन के कणों वाली यह नकली सामग्री मिट्टी के उपजाऊपन को पूरी तरह नष्ट कर सकती है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसी खाद के इस्तेमाल से पौधों की विकास प्रक्रिया रुक जाती है और फसल के पूरी तरह खराब होने का खतरा बना रहता है।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने अब सभी उर्वरक विक्रेताओं की जांच करने के निर्देश दिए हैं ताकि बाजार में बिक रही खाद की शुद्धता की पुष्टि की जा सके। जयपुर के हरमाड़ा थाना पुलिस मामले की गंभीरता को देखते हुए अब उन संदिग्धों की तलाश में जुटी है जो इस गोदाम का संचालन कर रहे थे। विभाग यह भी सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है कि कोई और किसान इस ठगी का शिकार न हो।

कानूनी कार्रवाई और सतर्कता

इस पूरे मामले की निगरानी खुद कृषि विभाग के उच्चाधिकारी कर रहे हैं। छापेमारी के दौरान जो कच्चा माल जब्त किया गया है, उसे प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया है ताकि यह पता चल सके कि इसमें किस प्रकार के रसायनों का मिश्रण था। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ न केवल आपराधिक मुकदमा चलेगा, बल्कि उनके लाइसेंस और फर्म को हमेशा के लिए प्रतिबंधित किया जाएगा।

जैविक खाद के नाम पर धोखा देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संदेश देने के लिए विभाग ने पूरे प्रदेश में अलर्ट जारी किया है। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे हमेशा अधिकृत विक्रेताओं से ही खाद खरीदें और प्रिंटेड पैकेजिंग पर लगे क्यूआर कोड या बैच नंबर की जांच अवश्य करें। यदि खाद की गुणवत्ता पर संदेह हो, तो तुरंत निकटतम कृषि कार्यालय या विभाग के हेल्पलाइन नंबर पर इसकी सूचना दें।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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