विश्व पर्यावरण दिवस पर अणुव्रत समिति ने लिया ऊर्जा संरक्षण का संकल्प
बीकानेर के गंगाशहर में पर्यावरण जागरूकता अभियान के तहत ऊर्जा संरक्षण और पौधारोपण का संकल्प लिया गया। विशेष पहल में दो घंटे एसी बंद रखने का आह्वान किया गया।
अणुव्रत समिति ने लिया ऊर्जा संरक्षण का संकल्प
बीकानेर, राजस्थान। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर अणुव्रत विश्व भारती सोसाइटी के तत्वावधान में अणुव्रत समिति गंगाशहर द्वारा एक विशेष पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन बोथरा भवन के प्रांगण में किया गया। इस वर्ष की सबसे अनूठी पहल ऊर्जा संरक्षण के प्रति जागरूकता रही, जिसके अंतर्गत संस्था ने दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक एयर कंडीशनर बंद रखने का संकल्प लेने का वृहद् स्तर पर आह्वान किया। यह पहल बढ़ती गर्मी और ऊर्जा की खपत को नियंत्रित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
कार्यक्रम की शुरुआत अणुव्रत समिति के सह-मंत्री मनोज छाजेड़ द्वारा पर्यावरण पर आधारित विशेष गीतिका के साथ हुई, जिसने उपस्थित जनसमूह को पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रेरित किया। इसके पश्चात अणुव्रत समिति गंगाशहर के अध्यक्ष करणीदान रांका ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कहा कि पर्यावरण के प्रति हमारे छोटे-छोटे प्रयास ही आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।
पर्यावरण संरक्षण की महत्ता
अध्यक्ष करणीदान रांका ने मुनिश्री अमृत कुमार जी के मंगलपाथेय का उल्लेख करते हुए बताया कि अणुव्रत मानव को मानव बनाने की प्रक्रिया है। उन्होंने पर्यावरण के प्रति अणुव्रत द्वारा दिए गए तीन प्रमुख संकल्पों को जीवन में उतारने पर जोर दिया। रांका ने कहा कि वर्तमान में राजस्थान में खेजड़ी के पेड़ों की हो रही अंधाधुंध कटाई अत्यंत चिंताजनक है, जबकि खेजड़ी हमारे प्रदेश का कल्पवृक्ष है जिसे संरक्षित करना हमारा नैतिक कर्तव्य है।
इस अवसर पर संस्था के मंत्री कन्हैयालाल बोथरा ने मुनिश्री उपशम कुमार जी के विचारों को साझा करते हुए कहा कि हमें ऊर्जा संरक्षण की जड़ों को पकड़ना होगा। उन्होंने अनावश्यक बिजली की खपत पर रोक लगाने और व्यक्तिगत वाहनों के उपयोग को सीमित करने की अपील की। बोथरा ने इस बात पर जोर दिया कि पर्यावरण को सुरक्षित करने के लिए हर व्यक्ति को अपने दैनिक जीवन की आदतों में सकारात्मक बदलाव लाने की नितांत आवश्यकता है।
संकल्प और साझा चिंतन
पर्यावरण जागरूकता अभियान की राष्ट्रीय संयोजक एवं मुख्य वक्ता डॉ. नीलिमा जैन ने अपने संबोधन में कहा:
"हमें वर्तमान पर्यावरणीय स्थिति का चिंतन करना होगा, फिर इसे परिवर्तित करने हेतु संकल्प लेकर व्यक्ति-व्यक्ति को इस अभियान से जोड़ना होगा।"
डॉ. जैन ने बताया कि राष्ट्र संत श्री तुलसी की दूरदर्शिता थी कि उन्होंने वर्षों पहले ही अपने अणुव्रत संकल्प सूत्र में पर्यावरण संरक्षण के लिए विशेष दिशा-निर्देश लिखे थे। उनका मानना है कि यदि समाज का हर व्यक्ति जुड़कर कार्य करे, तो हम पर्यावरण की बिगड़ती स्थिति को सुधारने में सफल हो सकते हैं। यह चिंतन और संकल्प ही भविष्य की दिशा तय करेंगे।
अणुव्रत समिति के कोषाध्यक्ष विजय बोथरा ने भी इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में संस्था द्वारा किए जा रहे कार्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हम केवल संकल्प तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि धरातल पर भी पौधारोपण जैसे कार्य करेंगे। समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने इस कार्यक्रम को एक जन-आंदोलन का रूप दे दिया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अभियान समाज में ऊर्जा संरक्षण की नई ऊर्जा का संचार कर रहा है।
विशिष्ट अतिथियों की सहभागिता
कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण प्रेमी मूलचंद सामसूखा, आचार्य तुलसी शांति प्रतिष्ठान के उपाध्यक्ष किशन बैद, तेरापंथ न्यास के महामंत्री जतन दूगड़, अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद से ललित राखेचा और तेरापंथी सभा गंगाशहर से प्रकाश भंसाली ने भी अपने विचार साझा किए। इसके अलावा महिला मंडल की पूर्व अध्यक्ष संजू लालाणी और तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष देवेंद्र डागा ने भी उपस्थित रहकर पर्यावरण को लेकर अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
इस अवसर पर धर्मेन्द्र डाकलिया और महावीर इंटरनेशनल के अध्यक्ष तिलोकचंद बाफना की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में पर्यावरण के लिए विशेष योगदान देने पर मूलचंद सामसूखा का अणुव्रत पताका, पट एवं साहित्य भेंटकर सम्मान किया गया। साथ ही मुख्य वक्ता डॉ. नीलिमा जैन को भी सम्मानित किया गया। कुशल संचालन उपाध्यक्ष मनीष बाफना द्वारा किया गया और आभार ज्ञापन उपाध्यक्ष मनोज सेठिया ने किया।
पौधारोपण और थैला वितरण
कार्यक्रम के अंतिम चरण में अणुव्रत समिति, गंगाशहर ने आचार्य तुलसी शांति प्रतिष्ठान परिसर में 100 पौधे लगाए। इस दौरान उपस्थित लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए कपड़े के थैलों का वितरण किया गया, ताकि प्लास्टिक के उपयोग को पूरी तरह से हतोत्साहित किया जा सके। समिति की टीम की सक्रिय भागीदारी ने इस कार्यक्रम को अत्यंत प्रभावी बना दिया।
इस ऊर्जा संरक्षण अभियान को सफल बनाने में करणीदान रांका, कन्हैयालाल बोथरा, मनोज सेठिया, मनीष बाफना, विजय बोथरा, मनोज छाजेड़, मनोज पारख, शशि रांका, हेमा पारख, श्रेया गुलगुलिया, बुलबुल बुच्चा, कुशल बाफना, हेमराज गुलगुलिया, ताराचंद गुलगुलिया, डालचंद बुच्चा, बच्छराज गुलगुलिया, पुखराज दुगड़, जतन बैद और नवरतन रांका ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।