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अंतरराज्यीय मानव तस्करी गिरोह का पर्दाफाश 5 गिरफ्तार

झालावाड़ पुलिस ने मानव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ कर 10 लड़कियों को मुक्त कराया। इनमें सात नाबालिग शामिल हैं। मुंबई व अन्य शहरों में बेचे जा रहे थे पीड़ित।

By अजय त्यागी
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पुलिस की संयुक्त टीम ने किया पर्दाफाश

झालावाड़, राजस्थान। जिला पुलिस ने एक बड़ी और सराहनीय कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय मानव तस्करी और देह व्यापार से जुड़े एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस संयुक्त अभियान में 10 लड़कियों को गिरोह के चंगुल से सुरक्षित बाहर निकाला है, जिनमें से सात नाबालिग हैं। इस ऑपरेशन को झालावाड़ पुलिस ने बूंदी, टोंक और मुंबई पुलिस के साथ मिलकर सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। इस बड़ी कामयाबी के बाद पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य अपराधियों की सरगर्मी से तलाश कर रही है।[1]

झालावाड़ पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के नेतृत्व में गठित विशेष एसआईटी ने इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एसपी ने बताया कि लंबे समय से जिले में नाबालिगों और अन्य युवतियों की तस्करी की गुप्त सूचनाएं मिल रही थीं, जिसके बाद इस गिरोह पर शिकंजा कसने के लिए विशेष रणनीति तैयार की गई थी। इस गिरोह का जाल झालावाड़, बूंदी, टोंक, ग्वालियर और मुंबई जैसे महानगरों तक फैला हुआ था, जिसे एक संयुक्त प्रयास से तोड़ा गया है।

गिरोह के काम करने का तरीका

एसपी अमित कुमार के अनुसार, मानव तस्करी का यह नेटवर्क बहुत ही सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था। गिरोह के सदस्य मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की लड़कियों को अपना निशाना बनाते थे। उन्हें बेहतर जीवनशैली और रोजगार दिलाने का प्रलोभन दिया जाता था। इसके बाद इन नाबालिग लड़कियों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनकी उम्र बढ़ाई जाती थी, ताकि उन्हें कानूनी शिकंजे से बचाकर देह व्यापार के काले कारोबार में धकेला जा सके।

मामले की जांच में यह भी सामने आया कि यह संगठित गिरोह तीन अलग-अलग स्तरों पर सक्रिय था। पहले स्तर पर स्थानीय एजेंट गरीब परिवारों से संपर्क कर लड़कियां चुनते थे, फिर उन्हें दलालों को सौंपते थे। दूसरे स्तर पर दलाल महानगरों में बैठे बड़े एजेंटों से संपर्क कर उन्हें बेच देते थे। अंत में, इन लड़कियों को डांस बार और अनैतिक देह व्यापार के दलदल में धकेल दिया जाता था, जहाँ से उनका बाहर निकलना बेहद मुश्किल होता था।

परिवारों पर दबाव का काला सच

पुलिस जांच और परिवारों से बरामद किए गए दस्तावेजों के आधार पर एक बेहद भयावह सच्चाई सामने आई है। गिरोह लड़कियों और उनके परिवारों पर भारी कर्ज का दबाव बनाता था। समझौतों में ऐसी अमानवीय शर्तें दर्ज थीं कि यदि लड़की की मृत्यु या आत्महत्या हो जाती, केवल तभी उस कर्ज को समाप्त माना जाता था। यह शर्त स्पष्ट करती है कि यह गिरोह न केवल तस्करी कर रहा था, बल्कि पीड़ितों का मानसिक और आर्थिक शोषण भी कर रहा था।

इस मामले में पुलिस ने संगठित गिरोह से जुड़े पांच मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक अन्य संदिग्ध को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। एसपी ने बताया कि पुलिस इस नेटवर्क को पूरी तरह जड़ से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है और जल्द ही अन्य फरार आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। यह कार्रवाई प्रदेश में मानव तस्करी के खिलाफ पुलिस के सख्त रुख को दर्शाती है।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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