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राजस्थान

बीकानेर में पर्यावरण संरक्षण के साथ सेवा की अनोखी पहल

बीकानेर में विश्व पर्यावरण दिवस पर पौधों का रोपण किया गया और तपती गर्मी में राहगीरों के लिए लस्सी की छबील लगाकर पर्यावरण संरक्षण व सेवा का संदेश दिया गया।

By अजय त्यागी
1 min read
तपती गर्मी में राहगीरों के लिए लस्सी की छबील

तपती गर्मी में राहगीरों के लिए लस्सी की छबील

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बीकानेर, राजस्थान। विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर बीकानेर शहर में मानवीय संवेदनाओं और प्रकृति प्रेम का एक अनूठा संगम देखने को मिला। श्री गुरु अर्जुन दास सत्संग भवन एवं श्री रूद्र हनुमान सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में वकीलों की गली, भेरुजी गटे के पास एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान न केवल प्रकृति को हरा-भरा करने के लिए पौधारोपण किया गया, बल्कि जेठ की तपती दुपहरी में राहगीरों को राहत देने के लिए पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ लस्सी की छबील भी लगाई गई।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में संस्था का यह प्रयास काफी सराहनीय माना जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान दो नए पौधों का रोपण किया गया, जो भविष्य में छाया और ऑक्सीजन का स्रोत बनेंगे। आयोजकों का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए छोटे-छोटे कदम उठाना आवश्यक है। जब हम स्वयं प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी समझते हैं, तभी समाज के अन्य लोग भी इस दिशा में प्रेरित होते हैं। इस आयोजन ने स्थानीय निवासियों के बीच एक सकारात्मक संदेश प्रसारित किया है।

सेवा की भावना

गर्मी के मौसम में जब तापमान अपने चरम पर है, तब प्यासे को जल और मीठी लस्सी पिलाना किसी पुण्य कार्य से कम नहीं है। संस्था द्वारा लगाई गई छबील में लगभग एक क्विंटल लस्सी का वितरण किया गया। इस शीतल लस्सी का आनंद लेने के लिए न केवल राहगीर रुके, बल्कि बड़ी संख्या में ऑटो चालक और दोपहिया वाहनों पर सवार लोग भी इस सेवा कार्य में शामिल हुए। संस्था की यह सेवा पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मानव सेवा का एक सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करती है।

इस सेवा कार्य के महत्व को रेखांकित करते हुए संस्था के संस्थापक श्री गुरु अर्जुन दास ने कहा:

"लंगर सेवा की भावना वास्तव में अद्भुत है, जो हमें प्रेम, भाईचारे और सेवा के मूल्यों से जोड़ती है। लंगर सेवा वास्तव में एक महान कार्य है, जो समाज में एकता और भाईचारे की भावना को बढ़ावा देता है।"

संस्था के संस्थापक के ये शब्द सेवाभाव की गहराई को स्पष्ट करते हैं। वे मानते हैं कि समाज सेवा का कार्य चाहे छोटा हो या बड़ा, उसके पीछे की भावना ही उसे महान बनाती है।

सेवा का निरंतर सफर

संस्था की सक्रिय सदस्य उषा गुप्ता ने बताया कि उनकी संस्था पिछले सात वर्षों से बीकानेर में विभिन्न सेवा कार्यों में जुटी हुई है। उन्होंने कहा कि यह सेवा कार्य केवल आज के दिन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे भविष्य में भी अनवरत जारी रखा जाएगा। संस्था की यह निरंतरता ही उसे अन्य संगठनों से अलग बनाती है और लोगों का विश्वास जीतती है। पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों के साथ मिलकर यह सेवा कार्य शहर की एक नई पहचान बन रहा है।

कार्यक्रम के दौरान संस्था के अभिषेक गुप्ता, हिमांशु किराडू, सोनू स्वामी, बसंत किराडू, कपिल ठकराल, वैभव, हिमांशी और मयंक ने अपनी पूरी निष्ठा के साथ सक्रिय भूमिका निभाई। इन युवाओं की उपस्थिति यह दर्शाती है कि आने वाली पीढ़ी भी समाज सेवा और प्रकृति की रक्षा के प्रति कितनी संवेदनशील है। इन कार्यकर्ताओं के उत्साह ने कार्यक्रम को और भी अधिक प्रभावी बना दिया, जिससे उपस्थित सभी लोगों ने इन प्रयासों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।

सामाजिक सामंजस्य और संदेश

समाज के विभिन्न वर्गों का इस कार्यक्रम में जुड़ना सामाजिक समरसता का प्रतीक है। जब एक संस्था पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ प्यासे को जल पिलाने जैसा सेवा भाव अपनाती है, तो वह पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा बन जाती है। ऐसे कार्यों से ही शहर की फिजाओं में आपसी भाईचारे की मिठास बनी रहती है। यह आयोजन न केवल भौतिक रूप से राहत देने वाला था, बल्कि मानसिक रूप से भी लोगों को एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील बनने का संदेश दे गया।

अंत में, पौधारोपण और लस्सी वितरण का यह मिश्रण एक सुखद अहसास दिलाता है। बीकानेर जैसे गर्म शहर में ऐसे आयोजन वास्तव में किसी वरदान से कम नहीं हैं। संस्था ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो समाज में बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं। इस पर्यावरण संरक्षण के कार्यक्रम के माध्यम से न केवल प्रकृति का आभार व्यक्त किया गया, बल्कि जन सेवा को प्राथमिकता देकर मानवता के सर्वोच्च धर्म का पालन भी किया गया।

Thanks to all the readers for their 3+ Years of dedication and trust
Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief