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राजस्थान

रामधाम में पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रकृति उत्सव का आयोजन

भीलवाड़ा के रामधाम रोड पर विश्व पर्यावरण दिवस पर वृहद् पौधरोपण हुआ। भारत विकास परिषद ने पर्यावरण संरक्षण हेतु कपड़े के थैले बांटे और पौधे लगाए।

By अजय त्यागी
1 min read
रामधाम में पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रकृति उत्सव का आयोजन

रामधाम में पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रकृति उत्सव का आयोजन

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भीलवाड़ा, राजस्थान (पंकज पोरवाल)। विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर वस्त्रनगरी भीलवाड़ा को हरा-भरा बनाने और पर्यावरण संरक्षण के पुनीत संकल्प के साथ शुक्रवार को रामधाम रोड पर एक वृहद् पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। भारत विकास परिषद (भाविप) स्वामी विवेकानन्द शाखा एवं श्री केशव स्मृति सेवा प्रन्यास के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस प्रकृति उत्सव में संपर्क, सहयोग, संस्कार, सेवा और समर्पण के मूलमंत्र को चरितार्थ किया गया। वर्तमान में चल रहे बाल संस्कार एवं युवा चेतना शिविर के उत्साही बालकों और युवाओं ने कार्यक्रम में पूरी सक्रियता से भागीदारी निभाई।

प्रन्यास कोषाध्यक्ष गोविंद प्रसाद सोडाणी के अनुसार, प्रकृति के इस महापर्व का शुभारंभ प्रातः काल 8.05 बजे पर्यावरण संवर्धन के प्रणेता हाथी भाटा आश्रम के महंत संत दास के सानिध्य में वैदिक पूजा-अर्चना के साथ हुआ। इस दौरान ट्री-गार्ड के साथ जामुन, नीम, शीशम और गुलमोहर सहित 10 फलदार व छायादार पौधों का रोपण किया गया। यह आयोजन न केवल हरियाली बढ़ाने की दिशा में एक कदम था, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन जागरूकता का एक बड़ा माध्यम भी बना।

महंत का आशीर्वाद

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित पर्यावरण प्रेमियों को आशीर्वाद देते हुए महंत संत दास ने प्रकृति सेवा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने पर्यावरण के प्रति अपनी गहरी निष्ठा व्यक्त करते हुए कहा कि मानव जीवन के लिए वृक्षों का होना उतना ही आवश्यक है जितना कि प्राणवायु का। वृक्षारोपण की सार्थकता को स्पष्ट करते हुए उन्होंने सेवा का एक अनुपम उदाहरण समाज के सामने रखा है, जिसे सभी उपस्थित प्रबुद्ध नागरिकों ने सराहा।

महंत संत दास ने अपने उद्बोधन में कहा:

"पूर्ण निष्ठा और लगन से लगाया गया पौधा निश्चित रूप से प्रतिफलित होता है। समाज में सौ बालकों को पढ़ाना और एक वृक्ष को लगाना व उसे पालना समान पुण्य का कार्य है। पुरुषोत्तम मास में किया गया यह पुनीत कार्य बेहद सराहनीय है।"

उनके इन शब्दों ने उपस्थित युवाओं और पर्यावरण प्रेमियों में प्रकृति के प्रति सेवाभाव को और अधिक सुदृढ़ किया है।

प्लास्टिक मुक्ति की मुहिम

इस बार आयोजन में पर्यावरण को प्लास्टिक मुक्त बनाने के संकल्प के साथ एक विशेष मुहिम भी जोड़ी गई। कपड़े के थैले अपनाओ, पॉलिथीन छोड़ो के नारे के साथ कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रबुद्ध नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों को संस्था की ओर से कपड़े के थैले निःशुल्क वितरित किए गए। इसका मुख्य उद्देश्य समाज से पॉलिथीन को पूरी तरह अलविदा कहना है। पर्यावरण संरक्षण के लिए यह एक व्यावहारिक कदम है, जो प्लास्टिक प्रदूषण की गंभीर समस्या से निपटने में सहायक सिद्ध होगा।

इस प्रकृति उत्सव में सनातन संस्था के आनंद जागेटिया, विष्णु कांत शर्मा, भारत विकास परिषद शाखा अध्यक्ष गिरीश अग्रवाल, सचिव के.जी. सोनी, कोषाध्यक्ष आदित्य मानसिंहका, शिविर प्रभारी बालकृष्ण पारीक, विभा जैन, गायत्री आचार्य तथा प्रन्यास के नंदकिशोर शर्मा सहित कई प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे। इन सभी पदाधिकारियों ने भीलवाड़ा के समस्त धर्मप्रेमियों एवं पर्यावरण प्रेमियों से अपील की है कि वे इस प्रकृति उत्सव से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं।

भावी पीढ़ी के लिए उपहार

भीलवाड़ा को हरित और स्वच्छ शहर बनाने का सपना केवल सामूहिक प्रयासों से ही साकार हो सकता है। परिषद् के पदाधिकारियों का मानना है कि यदि प्रत्येक नागरिक जिम्मेदारी निभाए, तो भावी पीढ़ी को एक शुद्ध और स्वस्थ पर्यावरण उपहार में दिया जा सकता है। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में संस्था की यह निरंतर सक्रियता आज के दौर की सबसे बड़ी आवश्यकता है। युवाओं की भागीदारी ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि आने वाले समय में प्रकृति की रक्षा के लिए नई पौध तैयार हो रही है।

निष्कर्षतः, रामधाम रोड पर आयोजित यह कार्यक्रम न केवल वृक्षारोपण तक सीमित रहा, बल्कि इसने स्वच्छता और प्रकृति प्रेम का एक गहरा संदेश दिया है। पौधों के रोपण से लेकर कपड़े के थैलों के वितरण तक, प्रत्येक गतिविधि में जनसेवा और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भाव प्रमुख रहा। भीलवाड़ा शहर के निवासियों ने इस अनूठे प्रयास के माध्यम से यह सिद्ध किया है कि विकास और प्रकृति का संतुलन ही मानव जाति के उज्ज्वल भविष्य का आधार है। अंततः, पर्यावरण संरक्षण की यह मुहिम एक स्वस्थ समाज का निर्माण करेगी।

Thanks to all the readers for their 3+ Years of dedication and trust
Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief