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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी बकाया वेतन भुगतान लंबित

कोटा की जेके सिंथेटिक फैक्ट्री के 4200 मजदूरों का आंदोलन 473वें दिन में पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद 500 करोड़ का बकाया वेतन भुगतान नहीं हुआ है।

By अजय त्यागी
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी बकाया वेतन भुगतान लंबित

कोटा, राजस्थान (शिंभू सिंह शेखावत )। कोटा के उद्योग नगर स्थित जेके सिंथेटिक फैक्ट्री के पूर्व मजदूरों का न्याय के लिए चल रहा अनिश्चितकालीन आंदोलन आज 473वें दिन में प्रवेश कर चुका है। शहर के जिला कलेक्ट्रेट के बाहर बड़ी संख्या में मजदूर, उनके परिजन और वृद्ध श्रमिक अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं। यह संघर्ष पिछले 29 वर्षों से लंबित अपने बकाया वेतन भुगतान की मांग को लेकर है, जिसे पाने के लिए मजदूर पिछले एक साल से भी अधिक समय से सड़कों पर हैं।

फैक्ट्री के वर्ष 1997 में बंद होने के बाद से करीब 4,200 मजदूरों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। आंदोलनकारी नेताओं हबीब खान, उमाशंकर और नरेंद्र सिंह के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय ने 2023 में मजदूरों के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। इसके बावजूद, ब्याज सहित लगभग 500 करोड़ रुपये का बकाया वेतन भुगतान आज तक नहीं हो पाया है, जिससे मजदूरों में भारी रोष व्याप्त है और वे इसे अपने साथ सरासर अन्याय मान रहे हैं।

प्रशासनिक उदासीनता और संघर्ष

मजदूरों का आरोप है कि सरकार ने फैक्ट्री की बेशकीमती जमीन का अधिग्रहण तो कर लिया है, लेकिन जिन मजदूरों की मेहनत से यह संस्थान खड़ा हुआ था, उन्हें आज भी दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं। आंदोलन के 473वें दिन एक प्रतिनिधिमंडल ने श्रम आयुक्त और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अविलंब वार्ता की मांग की है। सरकार की प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ मजदूरों का यह आक्रोश दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, और वे अपनी हकों की लड़ाई में पूरी तरह दृढ़ हैं।

आंदोलन की धार तेज करते हुए मीडिया प्रभारी मुरारीलाल बैरवा ने बताया कि आज के धरने में 885 मजदूरों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। भीषण गर्मी और मानसूनी परिस्थितियों की परवाह किए बिना, बड़ी संख्या में बुजुर्गों, महिलाओं और परिजनों ने इस संघर्ष में हिस्सा लिया है। मजदूरों ने सरकार से मानवीय आधार पर त्वरित कार्यवाही करने की अपील की है। उनका स्पष्ट कहना है कि बिना बकाया वेतन भुगतान के उनका घर चलाना अब असंभव हो गया है।

संघर्ष की अनूठी मिसाल

मजदूरों की इस लंबी लड़ाई की गूंज अब शासन के गलियारों तक पहुँच चुकी है, लेकिन समाधान अभी भी कोसों दूर है। यूनियन नेताओं ने दो टूक कहा है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार ब्याज सहित पूरा पैसा नहीं मिल जाता, तब तक यह आंदोलन किसी भी कीमत पर वापस नहीं लिया जाएगा। जेके सिंथेटिक के पूर्व कर्मचारी अब केवल अपने अधिकार मांग रहे हैं, जिसके लिए वे पिछले 29 वर्षों से इंतजार कर रहे हैं।

इस संघर्ष के बीच एक बात साफ है कि मजदूरों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। जिला कलेक्ट्रेट के बाहर हर दिन नई उम्मीद के साथ जुटने वाले ये श्रमिक प्रशासन की ओर देख रहे हैं। पिछले कई दशकों से चले आ रहे इस मामले में अब बकाया वेतन भुगतान का त्वरित समाधान ही एकमात्र विकल्प है। मजदूरों का कहना है कि वे न्याय के लिए अपनी अंतिम सांस तक लड़ने को तैयार हैं, क्योंकि यह उनके स्वाभिमान और जीवन-यापन का सवाल है।

न्याय की प्रतीक्षा में श्रमिक

आंदोलनकारी मजदूरों के परिजन भी उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। यह संघर्ष केवल एक आर्थिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह उन परिवारों की पीड़ा है जो अपनी जमा-पूंजी और वर्षों की सेवा का फल पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कोटा के इस बकाया वेतन भुगतान आंदोलन ने साबित कर दिया है कि यदि श्रमिक संगठित हों, तो वे बड़े से बड़े तंत्र को अपनी आवाज सुना सकते हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक इस मानवीय मुद्दे को गंभीरता से लेता है।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief