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सोने की कीमतों में गिरावट: बाजार में अनिश्चितता का दौर

वैश्विक बाजारों में सोने की कीमतों में गिरावट और तेल के बढ़ते दाम निवेशकों को चिंता में डाल रहे हैं। भारतीय बाजार पर इसका क्या होगा प्रभाव, जानें पूरी रिपोर्ट।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

वैश्विक स्तर पर उपजे अनिश्चितता के माहौल में सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मजबूती और नौकरियों के आंकड़ों के बाद फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंकाओं ने सोने के चमक को फीका कर दिया है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, स्पॉट गोल्ड 0.2 फीसदी गिरकर 4,319.09 डॉलर प्रति औंस पर आ गया है। इस गिरावट ने न केवल वैश्विक निवेशकों बल्कि भारतीय सर्राफा बाजार को भी असमंजस की स्थिति में ला खड़ा किया है।[1]

मध्य पूर्व में इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने वैश्विक स्थिरता को हिला कर रख दिया है। एक तरफ जहाँ सोने की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है, वहीं दूसरी तरफ तेल की कीमतों में 3 डॉलर प्रति बैरल से अधिक की वृद्धि हुई है। तेल की बढ़ती कीमतें वैश्विक स्तर पर महंगाई को और अधिक हवा दे रही हैं। निवेशकों के लिए यह स्थिति दोहरी चुनौती की तरह है क्योंकि वे बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों के बीच सुरक्षित निवेश की तलाश कर रहे हैं।

बाजार का मिजाज और अमेरिकी अर्थव्यवस्था

अमेरिकी नौकरियों के रिपोर्ट के बाद बाजार में एक सतर्कता का भाव देखा जा रहा है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ओएएनडीए के वरिष्ठ बाजार विश्लेषक केल्विन वोंग ने बताया कि बाजार फेडरल रिजर्व के रुख को लेकर काफी सतर्क है, जिसके चलते ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी हुई है और सोने पर दबाव बढ़ा है। जब ट्रेजरी यील्ड बढ़ती है, तो सोने जैसे गैर-उपज वाले परिसंपत्तियों में निवेश का अवसर लागत बढ़ जाता है, जिससे निवेशक सुरक्षित सरकारी बॉन्ड की ओर रुख करने लगते हैं।

अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लगातार तीसरे महीने मजबूत नौकरी आंकड़ों ने स्पष्ट कर दिया है कि श्रम बाजार अब काफी तेजी से उबर रहा है। क्लीवलैंड फेड की अध्यक्ष बेथ हैमॉक ने संकेत दिए हैं कि श्रम बाजार पूरी तरह संतुलित और पूर्ण रोजगार के करीब है। हालांकि, मुद्रास्फीति का उच्च स्तर बना हुआ है, जिसके कारण फेडरल रिजर्व को जल्द ही ब्याज दरों में वृद्धि करने की आवश्यकता पड़ सकती है। सीएमई ग्रुप के फेडवॉच टूल के अनुसार, दिसंबर तक दरों में वृद्धि की संभावना अब 72 फीसदी तक पहुंच गई है।

भारतीय बाजार पर प्रभाव और भविष्य की राह

भारतीय बाजार पर सोने की कीमतों में गिरावट का सीधा असर पड़ रहा है। देश में सोने के दाम अंतरराष्ट्रीय संकेतों के साथ-साथ रुपये की चाल से भी तय होते हैं। चूंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतों में गिरावट आई है, इसलिए घरेलू बाजार में भी मांग पर असर पड़ सकता है। हालांकि, भारत में शादियों और त्योहारों के सीजन में सोने की मांग बनी रहती है, जो कीमतों में बहुत ज्यादा गिरावट को रोक सकती है। भारतीय निवेशकों को अब सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि वैश्विक अनिश्चितता का स्तर बढ़ रहा है।

भविष्य की संभावनाओं को देखें तो यदि ईरान युद्ध की स्थिति और अधिक गंभीर होती है, तो तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं, जो सीधे तौर पर वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेंगी। सोने की कीमतों में गिरावट के बीच भारतीय निवेशकों के लिए यह एक मौका हो सकता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती ब्याज दरों का जोखिम निवेश को प्रभावित कर सकता है। निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने और केवल सोने पर निर्भर न रहने की सलाह दी जा रही है।

सोने की कीमतों में गिरावट के साथ अन्य धातुओं के प्रदर्शन पर भी नजर रखना जरूरी है। स्पॉट सिल्वर जहां 67.86 डॉलर प्रति औंस पर स्थिर बनी हुई है, वहीं प्लेटिनम 0.5 फीसदी की गिरावट के साथ 1,767.42 डॉलर पर कारोबार कर रही है। पैलेडियम की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। भारतीय बाजार में इन धातुओं की चाल सीधे तौर पर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और औद्योगिक मांग पर निर्भर करेगी। आने वाले हफ्तों में फेडरल रिजर्व के निर्णयों और मध्य पूर्व के घटनाक्रम से बाजार की दिशा पूरी तरह तय होगी।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। सोने की कीमतों में गिरावट और वैश्विक बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव अत्यंत परिवर्तनशील हैं, जिनका सीधा संबंध अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक स्थिति से है। निवेश से संबंधित कोई भी निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें, क्योंकि बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है और पिछले प्रदर्शन भविष्य के परिणामों का आश्वासन नहीं देते हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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