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पीबीएम अस्पताल में सिजेरियन के बाद प्रसूताओं की बिगड़ी तबीयत

बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद छह प्रसूताओं की किडनी प्रभावित होने का मामला सामने आया है, जिससे चिकित्सा जगत में हड़कंप मच गया है।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

बीकानेर, राजस्थान। बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में हाल ही में हुए एक अत्यंत चिंताजनक घटनाक्रम में, सिजेरियन डिलीवरी के बाद छह प्रसूताओं की तबीयत अचानक बिगड़ गई है। इन सभी महिलाओं को एक्यूट किडनी इंजरी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है, जिसके कारण उन्हें आईसीयू में भर्ती कर निरंतर डायलिसिस दी जा रही है। अस्पताल की जनाना विंग में हुई इस गंभीर घटना ने चिकित्सा व्यवस्था और ऑपरेशन थिएटर की स्वच्छता पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।[1]

पीड़ित सभी महिलाओं की उम्र 20 से 27 साल के बीच बताई जा रही है। मरीजों के परिजनों के अनुसार, सिजेरियन सर्जरी के 10 से 15 दिन बाद इन महिलाओं के स्वास्थ्य में गिरावट शुरू हुई। पेशाब रुकने, प्लेटलेट्स में भारी गिरावट, शरीर में गंभीर संक्रमण और सर्जरी वाली जगह से अत्यधिक रक्तस्राव जैसी जटिलताएं सामने आई हैं। फलौदी निवासी 20 वर्षीय प्रीति की स्थिति सबसे अधिक नाजुक बनी हुई है, जिसे वर्तमान में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है।

अस्पताल में संक्रमण का संकट

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि पीबीएम अस्पताल में प्रसूताओं की किडनी प्रभावित होने के पीछे अस्पताल का वातावरण और संक्रमण एक बड़ा कारण हो सकता है। सर्जरी के दौरान या बाद में हुई किसी प्रकार की चूक के कारण यह इंफेक्शन तेजी से फैला है, जिसने सीधे तौर पर किडनी को निशाना बनाया है। इस तरह के मामले न केवल अस्पताल प्रशासन के लिए एक चुनौती हैं, बल्कि मरीजों के लिए भी जानलेवा साबित हो रहे हैं, जिसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।

कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में लगभग एक माह पूर्व ही ऐसा ही एक दर्दनाक वाकया घटित हुआ था, जहां सिजेरियन के बाद किडनी फेल होने के कारण पांच प्रसूताओं की मृत्यु हो गई थी। कोटा की घटना के बाद बीकानेर में पीबीएम अस्पताल में सामने आए इस मामले ने प्रशासन को सतर्क कर दिया है। लगातार हो रही इस तरह की घटनाएं राज्य के चिकित्सा संस्थानों में संक्रमण नियंत्रण के मानकों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रही हैं।

प्रशासन की ओर से जांच

पूरे घटनाक्रम पर एसपी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि एक्यूट किडनी इंजरी के पीछे कई कारक हो सकते हैं और वे मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने ओटी में इंफेक्शन की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया है। भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए अस्पताल परिसर में 'इन्फेक्शन डिटेक्टर' मशीन लगाने का निर्णय लिया गया है, जो मात्र 90 सेकंड में संक्रमण की पहचान कर सकेगा।

नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रोफेसर जितेंद्र फलौदिया के अनुसार, वेंटिलेटर पर मौजूद महिला 'हेल्प सिंड्रोम' से जूझ रही है। डॉक्टरों की टीम मरीजों की निरंतर निगरानी कर रही है और वर्तमान में सभी की स्थिति स्थिर बताई जा रही है। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि असली कारणों का खुलासा मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगा। बहरहाल, अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों में भारी भय का माहौल बना हुआ है।

"एक्यूट किडनी इंजरी के कई कारण हो सकते हैं। फिलहाल आईसीयू में भर्ती सभी मरीजों की स्थिति स्थिर है। ऑपरेशन थियेटर (OT) में इन्फेक्शन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।"

अस्पताल में व्यवस्थाओं पर सवाल

पीबीएम अस्पताल जैसे बड़े सरकारी संस्थान में इस तरह की अव्यवस्थाएं व्यवस्थाओं की पोल खोलती हैं। यदि सिजेरियन ऑपरेशन के बाद महिलाएं इस तरह से किडनी की गंभीर समस्या का शिकार हो रही हैं, तो यह सीधे तौर पर स्वच्छता मानकों की कमी को दर्शाता है। मरीजों का कहना है कि उन्हें समय रहते उचित उपचार नहीं मिला, जिसके कारण इंफेक्शन शरीर के अन्य अंगों तक फैल गया। यह घटना स्थानीय चिकित्सा प्रशासन के लिए एक बड़ी सीख और चेतावनी है।

दूसरी ओर, चिकित्सा विभाग की टीमें अब मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही हैं। ओटी की कल्चर रिपोर्ट और अन्य आवश्यक नमूनों को जांच के लिए भेजा गया है। डॉक्टरों का तर्क है कि कभी-कभी अत्यधिक ब्लीडिंग के कारण भी किडनी पर दबाव पड़ता है, जिससे इंजरी की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि, इतने अधिक मामलों का एक साथ सामने आना अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गहरा संदेह पैदा करता है, जिसकी पूर्ण जवाबदेही तय होनी चाहिए।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। पीबीएम अस्पताल में स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं से संबंधित यह जानकारी वर्तमान विश्लेषण पर आधारित है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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