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विनाशकारी भूकंप के बाद फिलीपींस में राहत कार्य जारी

फिलीपींस के जनरल सैंटोस शहर में आए 7.8 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है, जिसमें अब तक 37 लोगों की जान जा चुकी है।

By अजय त्यागी
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advertisement13Aug2026%20copy.jpg फिलीपींस में भूकंप

फिलीपींस में भूकंप

जनरल सैंटोस, फिलीपींस। फिलीपींस के जनरल सैंटोस शहर में सोमवार सुबह आए 7.8 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप ने व्यापक तबाही मचा दी है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस त्रासदी में अब तक कम से कम 37 लोगों की मौत हो गई है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। राहत और बचाव दल मलबे में दबे लोगों को खोजने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। भूकंप का केंद्र सारांगनी प्रांत के तट से लगभग 20 किलोमीटर दूर था, जिसके झटके पूरे मिंडानाओ क्षेत्र और इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप तक महसूस किए गए।[1]

जनरल सैंटोस शहर, जिसकी आबादी 7 लाख से अधिक है, वर्तमान में 'आपदा की स्थिति' (state of calamity) में है। यहां कई इमारतें जमींदोज हो गई हैं और सड़कों पर मलबा फैला हुआ है। बिजली के खंभे गिरने और तारों के उलझने से पूरे क्षेत्र की आपूर्ति ठप हो गई है। बचाव कार्य में जुटी टीमें मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश कर रही हैं, हालांकि अभी भी चार लोग लापता बताए जा रहे हैं।

बचाव अभियान की चुनौतियां

क्षेत्रीय अग्निशमन अधिकारी एडगर तनावन के नेतृत्व में बचाव अभियान चलाया जा रहा है। मलबे में दबी एक व्यावसायिक इमारत, जिसमें किराना स्टोर और अन्य प्रतिष्ठान थे, वहां से दो लोगों को जीवित बाहर निकाला गया है, लेकिन एक व्यक्ति का शव बरामद हुआ है। राहत कर्मियों के अनुसार, मलबे के नीचे फंसे अन्य दो लोगों के जीवित बचने की उम्मीद बहुत कम है, क्योंकि स्कैनर्स में अब तक जीवन के कोई संकेत नहीं मिले हैं।

भूकंप की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मृतकों के परिजन मलबे के बाहर अपनों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। 65 वर्षीय डियोस्लिंडा डेलुवियो, जिनका बेटा मलबे में फंसा है, ने बेहद भावुक होते हुए कहा कि वे केवल चाहती हैं कि उनका बेटा उन्हें मिल जाए ताकि उन्हें शांति मिल सके। बचाव दल इस कोशिश में जुटे हैं कि जल्द से जल्द मलबे को हटाया जा सके, लेकिन स्थिति अत्यंत चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

"यह एक मां के रूप में स्वीकार करना बहुत कठिन है कि मेरा बेटा अभी भी वहां फंसा हुआ है। मेरी केवल एक ही मांग है कि उसे आज बाहर निकाल लिया जाए ताकि हमें शांति मिल सके।"

अस्पतालों और स्कूलों पर प्रभाव

फिलीपींस के स्वास्थ्य सचिव थियोडोरो हेर्बोसा के अनुसार, विनाशकारी भूकंप के बाद अस्पतालों को सुरक्षित करने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। जनरल सैंटोस और सारांगनी में मरीजों का इलाज अस्थायी टेंटों में किया जा रहा है। बिजली बहाल करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है, क्योंकि बिजली न होने से मरीजों के लिए आवश्यक संवेदनशील उपचार प्रभावित हो रहे हैं। आपदा अधिकारियों ने उन हजारों निवासियों तक पानी और बिजली पहुंचाने का काम शुरू कर दिया है जो इस आपदा से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

स्कूलों की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। सोमवार को लंबी छुट्टियों के बाद खुले स्कूलों को फिलहाल बंद कर दिया गया है। नागरिक सुरक्षा कार्यालय के प्रमुख राफेलिटो एलेजांद्रो ने बताया कि हजारों स्कूलों को आंशिक या गंभीर नुकसान पहुंचा है। एक वीडियो में देखा जा सकता है कि भूकंप के समय कक्षा में मौजूद बच्चे किस तरह डर के मारे सहम गए थे और शिक्षक उन्हें सहारा देने की कोशिश कर रहे थे।

आफ्टरशॉक्स का बढ़ता खतरा

फिलीपींस इंस्टीट्यूट ऑफ वोल्कानोलॉजी एंड सीस्मोलॉजी (Phivolcs) ने विनाशकारी भूकंप के बाद 23 शक्तिशाली आफ्टरशॉक्स रिकॉर्ड किए हैं, जिनमें से सबसे तेज 6.7 तीव्रता का था। इन झटकों के कारण निवासियों में भारी दहशत व्याप्त है और कई लोग अपना घर छोड़कर रात बिताने के लिए निकासी केंद्रों और टेंटों में जाने को मजबूर हैं। प्रशांत 'रिंग ऑफ फायर' पर स्थित होने के कारण फिलीपींस में भूकंप की घटनाएं आम हैं, लेकिन इस बार की तीव्रता ने देश को हिलाकर रख दिया है।

विनाशकारी भूकंप के कारण कई देशों में सुनामी की चेतावनी भी जारी की गई थी, जिससे स्थिति और भी भयावह हो गई। सरकार और राहत एजेंसियां अब नुकसान का पूरा आकलन कर रही हैं ताकि भविष्य में इस तरह की आपदाओं से निपटने के लिए बेहतर इंतजाम किए जा सकें। फिलीपींस सरकार ने लोगों से धैर्य रखने और अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। आने वाले दिन राहत कार्यों के लिए निर्णायक होंगे।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। भूकंप और आपदा प्रबंधन संबंधी यह जानकारी वर्तमान स्थिति के विश्लेषण पर आधारित है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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