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हजारों सिम कार्ड्स के जरिए सैकड़ों करोड़ की साइबर ठगी का पर्दाफाश

ईडी ने कंबोडिया से संचालित साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। हजारों सिम कार्ड्स के जरिए सैकड़ों करोड़ की ठगी करने वाले इस नेटवर्क की पूरी जानकारी यहाँ जानें।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

नई दिल्ली, भारत। देश भर में बढ़ते साइबर अपराधों के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। ईडी की एक रिपोर्ट के अनुसार, मलेशियाई नागरिक के नेतृत्व में कंबोडिया से संचालित एक गिरोह भारत में साइबर ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहा था। इस नेटवर्क ने धोखाधड़ी के लिए भारत में 5,300 सिम कार्ड्स अवैध रूप से सक्रिय किए थे। इन सिम कार्ड्स का उपयोग करके अपराधियों ने व्हाट्सएप कॉल के जरिए आम नागरिकों को अपना शिकार बनाया और सैकड़ों करोड़ की साइबर ठगी की।[1]

इस पूरे मामले की शुरुआत जोधपुर पुलिस की साइबर विंग द्वारा दर्ज एफआईआर से हुई, जिसके बाद ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच एजेंसी के मुताबिक, गिरोह ने उन सिम कार्ड्स का इस्तेमाल किया जिन्हें धोखाधड़ी से सक्रिय किया गया था। कंबोडिया में स्थित 'स्कैम फार्म' से भारतीयों को डिजिटल अरेस्ट और अन्य प्रकार की साइबर ठगी में फंसाया जा रहा था। ईडी ने अपनी जांच के दौरान लगभग 2.3 लाख नंबर्स का विश्लेषण किया, जिनमें से कई कंबोडिया में सक्रिय पाए गए।

छापेमारी और नेटवर्क का खुलासा

ईडी ने 5 जून को राजस्थान के किशनगढ़ (अजमेर), नागौर और जोधपुर के साथ-साथ पंजाब के लुधियाना में भी सात अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान 30 ऐसे घरेलू बैंक खातों की पहचान की गई है, जो कथित तौर पर इस साइबर ठगी नेटवर्क का हिस्सा हैं। जांच में पता चला कि राहुल कुमार झा, मोहम्मद शरीफ और संदीप भट्ट जैसे मुख्य आरोपियों ने प्रकाश भील, रामावतार राठी, हरीश मलाकर और हेमंत पंवार जैसे अन्य सिम वेंडरों के साथ मिलीभगत करके कंबोडिया स्थित मलेशियाई नागरिक को भारी संख्या में सिम कार्ड्स की आपूर्ति की थी।

ये वेंडर एयरटेल, जियो और वीआई (वोडाफोन इंडिया) जैसे दूरसंचार ऑपरेटरों की पीओएस आईडी का उपयोग कर रहे थे। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि वेंडरों ने कम शिक्षित और भोले-भाले लोगों को अपना निशाना बनाया। सिम पोर्ट कराने या नए सिम कार्ड जारी करने के बहाने वेंडरों ने लोगों की जानकारी जुटाई। वेंडरों ने उन सिमों को सक्रिय करते समय चुपके से अन्य अतिरिक्त सिम कार्ड्स भी सक्रिय किए, जिन्हें बाद में कमीशन के बदले मलेशियाई नागरिक और उनके सहयोगियों को भेज दिया गया।

"वेंडरों ने भोले-भाले लोगों को निशाना बनाया। उन्होंने सिम कार्ड पोर्ट कराने या नया सिम जारी करने के बहाने उनके दस्तावेज लिए, लेकिन सक्रिय करते समय अतिरिक्त सिम भी सक्रिय कर दिए, जिन्हें बाद में मलेशियाई नागरिक को आपूर्ति की गई।"

सुरक्षा तंत्र पर उठते सवाल

इस साइबर ठगी नेटवर्क ने तकनीक के गलत इस्तेमाल से आम लोगों की गाढ़ी कमाई लूटने का काम किया है। 'डिजिटल अरेस्ट' और अन्य ऑनलाइन ठगी के मामलों में कंबोडिया स्थित स्कैम फार्म्स की संलिप्तता ने देश की आंतरिक सुरक्षा और दूरसंचार क्षेत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। ईडी की छापेमारी से नेटवर्क के तार जुड़ते चले गए और अब पुलिस व अन्य केंद्रीय एजेंसियां इस जाल को पूरी तरह से खत्म करने के लिए कमर कस चुकी हैं।

जांच एजेंसियां अब उन 30 बैंक खातों की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं जिनमें ठगी गई रकम जमा की गई थी। साथ ही, यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या इस रैकेट में कोई और बड़े खिलाड़ी शामिल हैं। साइबर ठगी के खिलाफ यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत देती है कि डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने के लिए सतर्कता कितनी आवश्यक है। सरकार और दूरसंचार विभाग भी इस मामले के बाद सिम सक्रिय करने की प्रक्रिया में और अधिक सख्ती बरतने पर विचार कर रहे हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। साइबर ठगी से संबंधित यह मामला जांच के अधीन है और इसमें प्रवर्तन निदेशालय की कार्यवाही जारी है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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