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भारतीय म्यूचुअल फंड में निवेश और बाजार की अस्थिरता

भारतीय म्यूचुअल फंड में निवेश मई महीने में एक साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है। बाजार में छाई अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने अपनी पूंजी के आवंटन में कमी की है।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

मुंबई, महाराष्ट्र। भारतीय शेयर बाजार से जुड़ी एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें भारतीय म्यूचुअल फंड में निवेश में भारी गिरावट देखी गई है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, मई के महीने में इक्विटी म्यूचुअल फंड में होने वाले निवेश में पिछले एक साल के मुकाबले सबसे ज्यादा कमी दर्ज की गई है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने विभिन्न श्रेणियों में अपने निवेश को घटा दिया है, जिसका सीधा असर फंड के प्रवाह पर पड़ा है।[1]

एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) द्वारा बुधवार को जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, मई में इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश का प्रवाह महीने-दर-महीने आधार पर 40 फीसदी घटकर 229.08 बिलियन रुपये यानी करीब 2.40 बिलियन डॉलर रह गया है। यह आंकड़ा भारतीय म्यूचुअल फंड में निवेश के प्रति घटते रुझान को दर्शाता है, जिसमें स्मॉल-कैप, मिड-कैप और लार्ज-कैप फंड्स में क्रमशः 28.2 फीसदी, 33.2 फीसदी और 36.9 फीसदी की गिरावट देखी गई है।

बाजार में छाई अनिश्चितता

निवेश में आई इस कमी के पीछे बाजार की भारी अस्थिरता को मुख्य कारण माना जा रहा है। कच्चे तेल की कीमतें करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास मंडरा रही हैं, जिसने निवेशकों के मन में निकट भविष्य को लेकर चिंता पैदा कर दी है। इसी कारण से निवेशकों ने फिलहाल बाजार से दूरी बनाने या अपना निवेश सीमित रखने का निर्णय लिया है, जिससे म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के आंकड़ों में यह गिरावट स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।

एम्फी (AMFI) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वेंकट चलसानी ने इस स्थिति पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाजार की मौजूदा स्थिति के कारण निवेशक फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं।

"कम निवेश का कारण बाजार में अत्यधिक अस्थिरता है क्योंकि कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास मंडरा रहा है, जिसने निवेशकों के बीच निकट अवधि की सतर्कता को प्रेरित किया है।_ वेंकट चलसानी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एम्फी"

निवेशक अब सतर्क

म्यूचुअल फंड के विभिन्न सेगमेंट्स में गिरावट इस बात का संकेत है कि निवेशक केवल एक क्षेत्र विशेष तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे पूरी तरह से जोखिम लेने से बच रहे हैं। स्मॉल-कैप और मिड-कैप फंड्स, जो आम तौर पर निवेशकों को आकर्षित करते हैं, उनमें भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जब तक वैश्विक भू-राजनीतिक मोर्चे पर स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक निवेशकों का यह सतर्क रुख बना रहने की पूरी संभावना है।

भविष्य की ओर देखते हुए, भारतीय म्यूचुअल फंड में निवेश में सुधार इस बात पर निर्भर करेगा कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें और शांति समझौतों से जुड़े घटनाक्रम कैसे आकार लेते हैं। बाजार की यह मौजूदा सुस्ती एक अस्थायी दौर हो सकती है, लेकिन वर्तमान में यह स्पष्ट है कि निवेशकों ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। एम्फी के आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि मई महीना निवेशकों के लिए एक चुनौतीपूर्ण अवधि रही है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। निवेश संबंधी जोखिम और म्यूचुअल फंड बाजार के आंकड़ों से संबंधित शर्तें लागू। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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