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डिजिटल विकास के लिए भारत में मेटा का एआई डेटा सेंटर

भारत में मेटा का एआई डेटा सेंटर स्थापित हो रहा है। गुजरात में बनने वाला यह 168 मेगावाट क्षमता का केंद्र देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई गति देगा।

By अजय त्यागी
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advertisement13Aug2026%20copy.jpg प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

जामनगर, गुजरात। डिजिटल बुनियादी ढांचे के भविष्य को आकार देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए मेटा ने भारतीय दिग्गज रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ एक रणनीतिक साझेदारी की है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, रिलायंस गुजरात के जामनगर में 168 मेगावाट क्षमता वाले एक अत्याधुनिक डेटा सेंटर का निर्माण करेगी, जिसे मेटा लीज पर लेगी। कंपनी की भविष्य की एआई परियोजनाओं और तकनीकी विस्तार के लिए एक मुख्य आधार के रूप में भारत में मेटा का एआई डेटा सेंटर स्थापित किया जाएगा। यह पहल न केवल तकनीकी उन्नति का प्रतीक है, बल्कि रिलायंस और मेटा की लंबी साझेदारी को भी मजबूती प्रदान करती है।[1]

मेटा ने स्पष्ट किया है कि भारत का विशाल उपभोक्ता आधार और तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था इसे वैश्विक निवेश के लिए सबसे उपयुक्त स्थान बनाती है। यह डेटा सेंटर न केवल मेटा की बढ़ती हुई एआई जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि भविष्य में इसके विस्तार की भी व्यापक संभावनाएं हैं। रिलायंस के साथ इस समझौते से यह साफ है कि दोनों कंपनियां मिलकर देश के डिजिटल भविष्य को एक नई दिशा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा दे रही हैं।

डेटा सेंटर बाजार की बढ़ती मांग

आईएमएआरसी ग्रुप की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का डेटा सेंटर बाजार तेजी से विकसित हो रहा है। डिजिटल परिवर्तन, क्लाउड तकनीक को अपनाने की बढ़ती प्रवृत्ति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते वर्कलोड के कारण, यह बाजार वर्ष 2034 तक लगभग दोगुना होकर 13.11 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। ऐसे में भारत में मेटा का एआई डेटा सेंटर निर्माण, इस बढ़ते बाजार में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है, जो उद्योग के मानकों को एक नई परिभाषा देगा।

दोनों कंपनियों के बीच यह साझेदारी पिछले साल अगस्त में शुरू हुई थी, जब उन्होंने मेटा के लामा मॉडल का उपयोग करके भारतीय उद्यमों के लिए एआई प्लेटफॉर्म और टूल बनाने के लिए एक संयुक्त उद्यम बनाया था। उस समय रिलायंस और मेटा ने मिलकर 8.55 बिलियन रुपये यानी करीब 89.67 मिलियन डॉलर का प्रारंभिक निवेश किया था। इसके अलावा, साल 2020 में भी मेटा ने रिलायंस की सहायक कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स में 5.7 बिलियन डॉलर का बड़ा निवेश किया था।

"भारत की विशाल यूजर बेस और तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था इसे निवेश के लिए एक आदर्श स्थान बनाती है।- मेटा का आधिकारिक बयान"

आर्थिक और रोजगार पर प्रभाव

इस परियोजना का भारतीय अर्थव्यवस्था पर बहुआयामी प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। डेटा सेंटर के निर्माण और संचालन से स्थानीय स्तर पर तकनीकी क्षेत्र में रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे। विशेष रूप से डेटा इंजीनियरों, एआई विशेषज्ञों और आईटी पेशेवरों की मांग में भारी उछाल आने की संभावना है। यह निवेश न केवल बुनियादी ढांचे में सुधार करेगा, बल्कि अन्य उद्योगों में भी नवाचार की गति को तीव्र करेगा और देश की डिजिटल जीडीपी में सकारात्मक योगदान देगा।

इसके अतिरिक्त, इस डेटा सेंटर से छोटे और मध्यम उद्यमों को लाभ होगा क्योंकि वे कम लागत पर एआई-सक्षम टूल का उपयोग कर सकेंगे। क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई की पहुंच बढ़ने से कृषि, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में उत्पादकता में अभूतपूर्व सुधार होगा। भविष्य में, भारत में मेटा का एआई डेटा सेंटर देश को एक वैश्विक एआई हब के रूप में स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होगा और लंबी अवधि में तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगा।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। डेटा सेंटर निवेश और रिलायंस-मेटा साझेदारी से संबंधित शर्तें लागू। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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