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प्रादेशिक

विदेशी जहाज पर फंसे भारतीय नाविकों पर बड़ा संकट

ईरान में एक मालवाहक जहाज पर पिछले कई महीनों से फंसे भारतीय नाविक बेहद खराब परिस्थितियों में रहने को मजबूर हैं और सरकार से सुरक्षित वापसी की गुहार लगा रहे हैं।

By अजय त्यागी
1 min read
ईरान में फंसे भारतीय

ईरान में फंसे भारतीय

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विजयनगरम, आंध्र प्रदेश। अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र से एक बेहद परेशान करने वाली खबर सामने आ रही है जहाँ भारत के कई युवा ईरान देश के बंदर अब्बास पोर्ट के पास एक विदेशी मालवाहक जहाज एमवी पास्कल पर पिछले चार से पांच महीनों से फंसे हुए हैं। इस संकटपूर्ण स्थिति के सामने आने के बाद से उनके गृह राज्य आंध्र प्रदेश में रहने वाले परिजनों की चिंताएं बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं। जहाज पर मौजूद सभी लोग इस समय बेहद डरे हुए हैं और युद्ध की विभीषिका झेल रहे उस देश से जल्द से जल्द बाहर निकलने के रास्ते तलाश रहे हैं।[1]

वहां फंसे भारतीय नाविक (युवाओं) ने अपने परिवारों को भेजे वीडियो संदेश में बताया है कि वे बहुत ही कठिन परिस्थितियों में जैसे-तैसे अपना जीवन बचाने का प्रयास कर रहे हैं। जहाज पर न तो खाने-पीने का पर्याप्त सामान बचा है और न ही उन्हें भविष्य की कोई उम्मीद दिखाई दे रही है। इस मानवीय संकट ने एक बार फिर विदेशी धरती पर काम करने वाले कामगारों की सुरक्षा और उनके अनुबंधों की सच्चाई को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

जहाज पर गहराया संकट

जहाज पर भोजन और स्वच्छ पेयजल की भारी किल्लत हो गई है जिसके कारण फंसे भारतीय नाविक दिन में केवल एक समय का भोजन करके गुजारा करने को मजबूर हैं। इसके साथ ही उन्हें कई दिनों तक बिना बिजली के पूरी तरह से अंधेरे में रहना पड़ रहा है। विजयनगरम जिले के पुसापतिरेगा मंडल के चिंतापल्ली पंचायत निवासी कोमरा सोमराजू इस जहाज पर ट्रेनी वाइपर के रूप में काम कर रहे हैं और उन्होंने ही इस दर्दनाक स्थिति की जानकारी दी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार इस विशिष्ट मालवाहक जहाज पर कुल तेरह चालक दल के सदस्य मौजूद हैं, जिनमें से चार विदेशी नागरिक और नौ भारतीय शामिल हैं। इन भारतीय नागरिकों में उत्तरी आंध्र प्रदेश के चार युवा शामिल हैं जिनकी पहचान विजयनगरम के कोमरा सोमराजू, श्रीकाकुलम जिले के जेरी विष्णु, दुर्गा प्रसाद और परापति रमाना के रूप में की गई है। जहाज वर्तमान में ईरान के एक प्रमुख बंदरगाह के पास लंगर डाले खड़ा है और वहां से आगे बढ़ने की स्थिति में नहीं है।

"हम पूरी तरह से अंधेरे में रह रहे हैं और बुनियादी जरूरत की चीजें हासिल करने के लिए भी हमारा संघर्ष लगातार जारी है। हम सरकार और संबंधित अधिकारियों से अनुरोध करते हैं कि हमें जल्द से जल्द सुरक्षित घर वापस लाने में मदद करें।" - पीड़ित युवक 

एजेंटों का फैला जाल

इन युवाओं के परिजनों ने बताया कि वे सभी एक बड़ी रकम देकर मुंबई के एक एजेंट के माध्यम से इस काम के लिए विदेश गए थे। प्रत्येक युवा ने इस नौकरी को पाने के लिए लगभग पांच लाख रुपये का भुगतान किया था। उनका अनुबंध छह महीने के लिए तय किया गया था, जो काफी समय पहले ही पूरा हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद उनके मालिक या एजेंट द्वारा उनकी वापसी के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है।

इसके साथ ही परिजनों ने यह गंभीर आरोप भी लगाया है कि पिछले बारह महीनों से उनके बच्चों को किसी भी तरह का वेतन नहीं दिया गया है। बिना पैसों और बिना किसी कानूनी सहायता के ये युवा वहां पूरी तरह से बंधक जैसी स्थिति में आ चुके हैं। एजेंट और कंपनी की इस धोखाधड़ी ने इन परिवारों को न केवल आर्थिक रूप से तोड़ा है, बल्कि उन्हें मानसिक अवसाद में भी धकेल दिया है।

प्रशासन से मदद की गुहार

इस बेहद गंभीर स्थिति को देखते हुए पीड़ित परिवारों ने राज्य और केंद्र सरकार से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की भावुक अपील की है। वे चाहते हैं कि राजनयिक स्तर पर बातचीत करके उनके बच्चों को ईरान के उस संकटग्रस्त क्षेत्र से निकाला जाए। सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से लगातार वीडियो संदेश भेजकर सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित करने का प्रयास किया जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन और एजेंटों की मनमानी के कारण फंसे भारतीय नाविकों का यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। परिजनों को उम्मीद है कि सरकार उनकी इस मार्मिक अपील को गंभीरता से सुनेगी और विदेशी दूतावास के सहयोग से उनके बच्चों की सकुशल वतन वापसी का मार्ग जल्द से जल्द प्रशस्त करेगी।

अस्वीकरण: 

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। जहाज पर फंसे भारतीय नाविकों की सुरक्षा और ईरान में उनकी कानूनी स्थिति को लेकर संबंधित सरकारी विभाग जांच कर रहे हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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