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घोटाले में पूर्व मंत्री की याचिका पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख

जल जीवन मिशन घोटाले में पूर्व मंत्री महेश जोशी की गिरफ्तारी के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट का कड़ा रुख साफ नजर आया है।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

जयपुर, राजस्थान। राजस्थान हाईकोर्ट ने जल जीवन मिशन से जुड़े करोड़ों रुपए के टेंडर घोटाले के मामले में पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा की गई गिरफ्तारी को पूरी तरह कानून सम्मत माना है। अदालत ने इस मामले में पूर्व मंत्री को राहत देने से साफ इनकार करते हुए उनके बेटे द्वारा दायर की गई बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।[1]

अदालत के इस फैसले के बाद जल जीवन मिशन घोटाले में गिरफ्तार पूर्व मंत्री की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ गई हैं। न्यायमूर्ति उमाशंकर व्यास और न्यायमूर्ति अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने इस मामले से जुड़े सभी कानूनी पहलुओं और दोनों पक्षों की दलीलों को गंभीरता से सुनने के बाद यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया, जिसके बाद हाईकोर्ट का कड़ा रुख पूरी तरह सामने आया है।

"भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने इस पूरे मामले में नियमानुसार कार्रवाई की है। आरोपी को हिरासत में लेते समय और कोर्ट में पेश करने के दौरान उनके परिजनों को फोन के जरिए पूरी सूचना दी गई थी। मुख्यालय द्वारा जारी हुकमनामे में गिरफ्तारी के पुख्ता आधार मौजूद थे, इसलिए यह याचिका खारिज करने योग्य है।" - राजेंद्र प्रसाद (महाधिवक्ता)

कानूनी दलीलें

पूर्व मंत्री के बेटे रोहित जोशी की ओर से दायर याचिका में उनके अधिवक्ता स्नेहदीप ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए थे। याचिका में दलील दी गई थी कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने सात मई को जब महेश जोशी को गिरफ्तार किया था, तब उनके परिजनों को गिरफ्तारी के कारणों की लिखित जानकारी नहीं दी गई थी। याचिकाकर्ता के अनुसार भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के नियमों के तहत परिजनों को लिखित सूचना देना अनिवार्य है।

याचिका में दावा किया गया था कि लिखित सूचना न मिलने के कारण यह पूरी गिरफ्तारी ही अवैध हो जाती है और इसके बाद का पुलिस रिमांड भी पूरी तरह दूषित माना जाना चाहिए। हालांकि सरकार की तरफ से महाधिवक्ता ने इन आरोपों का कड़ा विरोध करते हुए अदालत को बताया कि गिरफ्तारी के समय परिजन मौके पर ही मौजूद थे और उन्हें हर स्तर पर फोन द्वारा सूचित किया गया था, जिससे हाईकोर्ट का कड़ा रुख बरकरार रहा।

घोटाले की जांच

यह पूरा मामला साल दो हजार इक्कीस में जल जीवन मिशन के तहत श्री श्याम ट्यूबवैल और श्री गणपति ट्यूबवैल के संचालकों द्वारा फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर करोड़ों रुपए के टेंडर हासिल करने से जुड़ा है। इस बड़े फर्जीवाड़े की जांच के दौरान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने पूर्व मंत्री को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने भी इस घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत कार्रवाई करते हुए महेश जोशी को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद उन्हें उच्चतम न्यायालय से जमानत मिली थी। इस प्रकार के बड़े घोटालों में लगातार हो रही जांच और अदालती फैसलों से यह साफ है कि भ्रष्टाचार के मामलों में हाईकोर्ट का कड़ा रुख भविष्य में भी जारी रहने वाला है।

अस्वीकरण:

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। जल जीवन मिशन घोटाले से जुड़े इस मामले की कानूनी सत्यता और अंतिम स्थिति के लिए राजस्थान हाईकोर्ट और संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा जारी आधिकारिक अदालती आदेश को ही अंतिम माना जाए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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