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राजस्थान

कला जगत में गहरा शोक, लोक संस्कृति को अपूरणीय क्षति 

राजस्थान की अनूठी कला परंपरा को करीब आठ दशकों तक सींचने वाली प्रख्यात कलाकार के निधन से संपूर्ण लोक संस्कृति को अपूरणीय क्षति पहुंची है।

By अजय त्यागी
1 min read
सुप्रसिद्ध मांड गायिका गवरी देवी

सुप्रसिद्ध मांड गायिका गवरी देवी

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पाली, राजस्थान। राजस्थान की पावन धरा की अनूठी पहचान और स्वर कोकिला के रूप में विख्यात सुप्रसिद्ध मांड गायिका गवरी देवी का गुरुवार रात साढ़े आठ बजे आकस्मिक निधन हो गया है। उन्होंने करीब नब्बे वर्ष से अधिक की आयु में इस नश्वर संसार को अलविदा कहा जिससे कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके जाने से राजस्थानी लोक संस्कृति को अपूरणीय क्षति हुई है जिसकी भरपाई कर पाना भविष्य में बिल्कुल नामुमकिन होगा।[1]

वह पिछले आठ दशकों से अधिक समय तक मांड गायकी के पारंपरिक क्षेत्र में पूरी तरह सक्रिय रहीं और देश-दुनिया में अपनी कला का परचम लहराया। दिवंगत स्वर साधिका का अंतिम संस्कार सर्वोदय नगर स्थित स्थानीय मोक्ष धाम में पूर्ण धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न किया जाएगा। वह अपने पीछे पांच बेटों, बहुओं और पोते-पोतियों सहित कुल तीस सदस्यों का एक भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं। लेकिन इस लोक संस्कृति को अपूरणीय क्षति को कोई पूरा नहीं कर सकता। 

"गवरी देवी जी ने अपनी अत्यंत मधुर आवाज़, अद्वितीय समर्पण और पारंपरिक लोकगीतों के माध्यम से राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति को एक वैश्विक पहचान दिलाई। लोक कला के वास्तविक संरक्षण और संवर्धन में उनका यह अमूल्य योगदान इतिहास में सदैव स्मरणीय रहेगा तथा उनकी यह मधुर विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगी।" - भजनलाल शर्मा (मुख्यमंत्री)

समृद्ध कलात्मक सफर

दिवंगत कलाकार गवरी देवी का जन्म बाड़मेर जिले के सुदूर कोरण गांव में हुआ था और उनके माता-पिता भी पेशेवर लोक कलाकार थे। अपने माता-पिता से ही बचपन में प्रेरणा लेकर उन्होंने मांड गायकी की सूक्ष्म बारीकियों को पूरी लगन से सीखा था। अपने लंबे गायकी जीवन में उन्होंने अपने पति मिश्रीलाल राव के साथ मिलकर देश के सैकड़ों बड़े मंचों पर ऐतिहासिक प्रस्तुतियां दी थीं।

उनके द्वारा गाए गए केसरिया बालम पधारो और ढोला थारे देश में जैसे सुप्रसिद्ध मांड गीत आज भी जन-जन की जुबान पर बसे हुए हैं। उनकी अद्भुत स्वर साधना के कारण ही उन्हें जवाहर कला केंद्र, दूरदर्शन और वीर दुर्गादास राठौड़ लाइफ टाइम अचीवमेंट जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया था, जिससे लोक संस्कृति को अपूरणीय क्षति का अहसास हर कला प्रेमी को हो रहा है।

दिग्गजों ने दी श्रद्धांजलि

केंद्रीय कला संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने उनके देहावसान पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे कला जगत के लिए एक अत्यंत दुखद खबर बताया है। उन्होंने कहा कि गवरी देवी जी ने अपने जीवन का प्रत्येक महत्वपूर्ण क्षण लोकसंगीत के संरक्षण में समर्पित कर दिया। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि वह कई दशकों तक इस अनूठी लोककला का पर्याय बनी रहीं।

गवरी देवी अपनी बहू सुंदरदेवी और पौत्री नीतू को विरासत में मांड गायकी की अनमोल धरोहर सौंप कर गई हैं ताकि यह कला जीवित रहे। पाली जिले में उनके सम्मान में बसे गवरी नगर स्थित आवास पर शुभचिंतकों का तांता लगा हुआ है। इस महान कलाकार के आकस्मिक विदा होने से राजस्थान की ऐतिहासिक लोक संस्कृति को अपूरणीय क्षति हुई है जिसकी यादें हमेशा जीवंत रहेंगी।

अस्वीकरण:

यह रिपोर्ट प्रतिष्ठित समाचार स्रोतों एवं राज्य सरकार द्वारा जारी आधिकारिक बयानों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। कला साधिका के जीवनवृत्त एवं अंतिम संस्कार से जुड़ी किसी भी अन्य व्यक्तिगत जानकारी के लिए उनके पारिवारिक सदस्यों द्वारा जारी आधिकारिक सूचना को ही अंतिम माना जाए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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