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भारत फ्रांस रक्षा समझौता, इस महाडील से कांपा ड्रैगन

समुद्री सुरक्षा और सैन्य ताकत को बढ़ाने के लिए होने जा रहा भारत फ्रांस रक्षा समझौता दुश्मनों की नींद उड़ाने के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुका है।

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

नई दिल्ली, दिल्ली। प्रमुख समुद्री क्षेत्रों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और चुनौतियों के बीच भारत अपनी सैन्य ताकत और पनडुब्बी युद्ध क्षमता को अत्यधिक मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी सिलसिले में शनिवार से शुरू होने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वपूर्ण यूरोपीय यात्रा के दौरान ऐतिहासिक भारत फ्रांस रक्षा समझौता होने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है जो दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों को एक बिल्कुल नए और मजबूत मुकाम पर ले जाएगा।[1]

फ्रांस पिछले कुछ वर्षों में भारत के लिए सैन्य हार्डवेयर और आधुनिक हथियारों के एक बहुत बड़े और भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरा है। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य को देखते हुए दोनों ही देश महत्वपूर्ण सैन्य खरीद परियोजनाओं में तेजी लाने पर विशेष विचार कर रहे हैं जिसके तहत नई दिल्ली द्वारा अधिक पनडुब्बियां और घातक लड़ाकू विमान हासिल करने के रणनीतिक फैसले को जल्द ही अंतिम रूप दिया जाएगा।

"दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी अब एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। भारतीय नौसेना के लिए तीन और स्कॉर्पीन पनडुब्बियों की खरीद के प्रस्ताव को गति दी जा रही है, जिसका निर्माण सार्वजनिक क्षेत्र की मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड और फ्रांस की जानी-मानी रक्षा कंपनी नेवल ग्रुप द्वारा संयुक्त रूप से किया जाएगा।" - रक्षा मंत्रालय (आधिकारिक कूटनीतिक सूत्र)

सैन्य ताकत में इजाफा

इस बड़े रणनीतिक कदम के तहत दोनों पक्षों के बीच पनडुब्बी निर्माण को लेकर बातचीत के बहुत तेज होने की संभावना है। यह आगामी भारत फ्रांस रक्षा समझौता हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना की निगरानी और युद्धक क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा। इस परियोजना के तहत स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा मिलने से देश के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के बड़े संकल्प को भी एक अभूतपूर्व मजबूती और नई गति मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्र के भीतर अपनी युद्धक क्षमताओं को बढ़ाना भारत के लिए इस समय बेहद जरूरी हो गया है। विभिन्न समुद्री क्षेत्रों में विदेशी ताकतों की बढ़ती दखलंदाजी को रोकने के लिए लड़ाकू विमानों और उन्नत पनडुब्बियों की यह नई खेप भारतीय सेना को जल, थल और नभ में एक अजेय बढ़त प्रदान करेगी जो आने वाले समय में देश की संप्रभुता की रक्षा करने के लिए मील का पत्थर साबित होगी।

बढ़ती वैश्विक साझेदारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस शनिवार से शुरू होने वाली यात्रा को लेकर दोनों देशों के शीर्ष राजनयिकों ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस दौरे के दौरान केवल सैन्य साजो-सामान की खरीद पर ही नहीं बल्कि अत्याधुनिक तकनीकों के हस्तांतरण पर भी बेहद गंभीर चर्चा होगी। माना जा रहा है कि यह भारत फ्रांस रक्षा समझौता दोनों देशों के बीच औद्योगिक और तकनीकी सहयोग को एक नई रणनीतिक ऊंचाई देगा।

फ्रांसीसी रक्षा कंपनियों के साथ भारतीय सार्वजनिक उपक्रमों का यह तालमेल आने वाले समय में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा के संतुलन को बनाए रखने में एक बेहद निर्णायक भूमिका निभाने वाला है। दोनों देशों के बीच मजबूत होता यह सैन्य ढांचा वैश्विक स्तर पर शांति और स्थिरता को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे आने वाले समय में दोनों परमाणु संपन्न राष्ट्रों की सामरिक भागीदारी और गहरी होगी।

अस्वीकरण:

यह रिपोर्ट विश्वस्त आधिकारिक रक्षा सूत्रों एवं प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। भारत-फ्रांस द्विपक्षीय वार्ता के आधिकारिक निर्णयों, पनडुब्बी खरीद की अंतिम शर्तों और सरकारी घोषणाओं की प्रामाणिक पुष्टि के लिए भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति को ही अंतिम माना जाए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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