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अंतरराष्ट्रीय

अमेरिका-ईरान में शांति डील, दुश्मनों की साजिश हुई नाकाम

वैश्विक तनाव के बीच आखिरकार अमेरिका-ईरान में शांति डील के अंतिम मसौदे पर सहमति बन गई है जिससे खाड़ी क्षेत्र में कूटनीतिक जीत की उम्मीद जगी है।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

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इस्लामाबाद, पाकिस्तान। लंबे समय से खाड़ी क्षेत्र में जारी भयंकर सैन्य और राजनीतिक गतिरोध के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बहुत बड़ी कूटनीतिक सफलता हाथ लगी है। दुनिया के दो सबसे धुर विरोधी देशों के बीच जारी कड़वाहट को समाप्त करने के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों के बाद आखिरकार अमेरिका-ईरान में शांति डील के अंतिम और सर्वसम्मत मसौदे पर पूरी तरह सहमति बन चुकी है, जिससे मध्य पूर्व में सुरक्षा व्यवस्था बहाल होने की उम्मीद है।

इस ऐतिहासिक और बड़े वैश्विक घटनाक्रम की पुष्टि खुद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ द्वारा की गई है। उन्होंने वैश्विक मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मंचों को इसके सकारात्मक परिणामों से अवगत कराते हुए बताया है कि इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने के उद्देश्य से की जा रही गहन मध्यस्थता कोशिशों के बाद दोनों परमाणु शक्तियों के बीच एक ठोस समझौता तैयार हो चुका है।

"पाकिस्तान द्वारा जारी गहन मध्यस्थता प्रयासों के बीच, हम उन लोगों द्वारा चलाए जा रहे निरंतर दुष्प्रचार अभियान से पूरी तरह अवगत हैं जो इस समझौते को नाकाम करना चाहते हैं। तमाम शोर-शराबे को दरकिनार करते हुए, हम इसकी पुष्टि कर सकते हैं कि शांति समझौते का एक अंतिम और सहमति वाला पाठ तैयार हो चुका है और पाकिस्तान अब अगले कदमों को अंतिम रूप देने के लिए दोनों पक्षों के साथ मिलकर काम कर रहा है।" - शहबाज़ शरीफ (प्रधानमंत्री, पाकिस्तान) [1]

शांति की नई उम्मीद

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के जरिए पूरी दुनिया के सामने अमेरिका-ईरान में शांति डील को लेकर यह बेहद चौंकाने वाला और बड़ा दावा पेश किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस ऐतिहासिक समझौते की प्रक्रिया को रोकने और दोनों देशों के बीच कड़वाहट को दोबारा भड़काने के लिए कई विरोधी ताकतों द्वारा बड़े स्तर पर भ्रामक और झूठी खबरों का सहारा लिया जा रहा है।

हालांकि इन तमाम अंतरराष्ट्रीय बाधाओं और नकारात्मक प्रचार के बावजूद दोनों देशों के शीर्ष राजनयिकों ने सूझबूझ का परिचय दिया है। इस सफल मध्यस्थता के बाद अब अमेरिका-ईरान में शांति डील के व्यावहारिक क्रियान्वयन को लेकर जमीनी स्तर पर तैयारियां तेज हो चुकी हैं, जिसे अंतिम रूप देने के लिए विभिन्न स्तरों की तकनीकी और रणनीतिक वार्ताओं के दौर को आगे बढ़ाया जा रहा है।

बदलेगा वैश्विक परिदृश्य

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जानकारों के अनुसार इस समझौते का सबसे बड़ा और सीधा असर वैश्विक तेल व्यापार और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर सकारात्मक रूप से देखने को मिलेगा। पिछले लंबे समय से हॉर्मुज जलडमरूमध्य में मालवाहक जहाजों पर हो रहे हमलों के कारण दुनिया भर के बाजारों में जो डर का माहौल बना हुआ था, वह इस ऐतिहासिक घोषणा के बाद काफी हद तक शांत होने की उम्मीद है।

इस बड़े कूटनीतिक समझौते के सफल होने से न केवल खाड़ी देशों में शांति स्थापित होगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक मंदी और महंगाई के खतरे को भी कम किया जा सकेगा। दोनों देशों के बीच तैयार हुआ यह शांतिपूर्ण मसौदा आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के नियमों को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा, जिससे दुनिया भर के तमाम बड़े और विकासशील देशों ने राहत की सांस ली है।

साजिशें हुईं नाकाम

प्रधानमंत्री ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि वैश्विक शांति के दुश्मनों को इस समझौते से बहुत बड़ी मिर्ची लगी है और वे लगातार इसे तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे अब पीछे हटने वाले नहीं हैं, जिसके कारण अमेरिका-ईरान में शांति डील को रोकने की हर अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय साजिश अब पूरी तरह से बेअसर हो चुकी है।

आने वाले दिनों में इस समझौते से जुड़े नियमों और शर्तों को सार्वजनिक किया जा सकता है, जिस पर दुनिया भर की महाशक्तियों की पैनी नजर बनी हुई है। पाकिस्तान इस समय दोनों पक्षों के साथ मिलकर अगले कूटनीतिक कदमों को अंतिम रूप देने में व्यस्त है ताकि बिना किसी देरी के इस समझौते को धरातल पर उतारा जा सके और अंतरराष्ट्रीय शांति व्यवस्था को हमेशा के लिए सुरक्षित बनाया जा सके।

अस्वीकरण:

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार स्रोतों और प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। अमेरिका-ईरान शांति समझौते की अंतिम आधिकारिक घोषणा, हस्ताक्षरित दस्तावेजों की शर्तों तथा संयुक्त राष्ट्र के रुख से संबंधित प्रामाणिक पुष्टि के लिए संबंधित देशों के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक वक्तव्य को ही अंतिम माना जाए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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