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बाल श्रम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई: फैक्ट्री से मुक्त कराए 20 बच्चे

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर सुरक्षा बलों ने बाल श्रम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई को अंजाम देकर औद्योगिक क्षेत्र से बीस मासूम बच्चों को सुरक्षित मुक्त कराया है।

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा

छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा

रायपुर, छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के नेतृत्व में पूरे प्रदेश में बाल श्रम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया गया है। सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासनिक अमले ने एक औचक छापेमारी के दौरान खतरनाक काम में लगे बीस बाल श्रमिकों को सफलतापूर्वक मुक्त करा लिया है। यह पूरी कार्रवाई विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर की गई, जो व्यवस्था की कमियों को दर्शाती है।[1]

प्रशासनिक टीम ने राजधानी रायपुर के उरला औद्योगिक क्षेत्र से इन मासूम बच्चों को रेस्क्यू कर अपनी सुरक्षा में लिया है। इस व्यापक अभियान के अंतर्गत कुल बीस बच्चों में से सात बच्चों को बिलासपुर में रेलवे पुलिस फोर्स द्वारा सुरक्षित बचाया गया, जबकि चार अन्य बच्चों को रायपुर सरकारी रेलवे पुलिस के सहयोग से रेस्क्यू करने में सफलता प्राप्त हुई है।

कारखाने पर छापेमारी

छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के कुशल नेतृत्व में इस औचक छापेमारी अभियान को शुरू किया गया था। प्रशासनिक जांच टीम ने सबसे पहले राजधानी रायपुर के उरला में संचालित मारुति नंदन स्ट्रक्चर इंडस्ट्रीज नामक कारखाने पर धावा बोला। इस अचानक हुई कार्रवाई से औद्योगिक क्षेत्र के फैक्ट्री मालिकों में हड़कंप मच गया।

इस औचक निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि लोहे की इस फैक्ट्री में नाबालिग बच्चों से बेहद गंभीर और खतरनाक प्रकृति के काम जबरन कराए जा रहे थे। सुरक्षा टीम ने तुरंत एक्शन लेते हुए मौके से नौ बच्चों को अपनी सुरक्षात्मक कस्टडी में ले लिया और नियमानुसार मामला दर्ज किया। इसके बाद इन सभी बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

मानव तस्करी का एंगल

शुरुआती प्रशासनिक जांच में यह बात सामने आई है कि बचाए गए सभी पीड़ित बच्चे मूल रूप से अन्य राज्यों जैसे ओडिशा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के रहने वाले हैं। इस जानकारी के बाद स्थानीय अधिकारी मामले की गहनता से जांच कर रहे हैं। पुलिस प्रशासन इस घटना के पीछे किसी अंतरराज्यीय संगठित रैकेट या मानव तस्करी के नेटवर्क की संवेदनशीलता की भी पड़ताल कर रहा है।

इस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी टीम को शुरुआती इनपुट मिले हैं कि इन मासूम बच्चों को बिहार के रहने वाले एक स्थानीय ठेकेदार के माध्यम से काम के लिए रायपुर लाया गया था। इस मामले में संलिप्त संबंधित ठेकेदार और बच्चों को लाने वाले कुछ अन्य संदिग्ध लोगों के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है ताकि तस्करी के इस काले कारोबार को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके।

कठोर कानूनी कार्रवाई

बाल श्रम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए अधिकारियों ने रेस्क्यू किए गए बच्चों के परिजनों से संपर्क स्थापित करने की प्रशासनिक प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से शुरू कर दिया है। इस मामले में पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की विभिन्न सुसंगत धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। इसके अलावा बाल श्रम रोकथाम अधिनियम से जुड़े कानूनी पहलुओं पर भी विचार हो रहा है।

आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने मीडिया कर्मियों को संबोधित करते हुए इस पूरे घटनाक्रम पर अपना आधिकारिक बयान जारी किया है। उन्होंने इस अमानवीय कृत्य की निंदा करते हुए दोषियों पर सख्त रुख अपनाया है। डॉ. वर्णिका शर्मा ने आधिकारिक बयान में अपनी बात को स्पष्ट करते हुए कहा है:

"प्रथम दृष्टया यह बात सामने आई है कि बच्चों को क्रूरता, शोषण और अवैध जोखिम भरी गतिविधियों का शिकार बनाया गया था। बाल श्रम बच्चों के अधिकारों का एक बहुत ही गंभीर उल्लंघन है, विशेषकर तब जब उन्हें अत्यधिक खतरनाक उद्योगों में काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। प्रत्येक बच्चे को एक सुरक्षित बचपन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और गरिमापूर्ण जीवन जीने का पूरा अधिकार है।"

प्रशासनिक अमले की मुस्तैदी

डॉ. वर्णिका शर्मा ने अपने बयान में आगे कहा कि आयोग बाल श्रम और बाल तस्करी जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ पूरी प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता के साथ काम कर रहा है। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस मामले के सभी दोषियों के खिलाफ सबसे सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी ताकि भविष्य में कोई भी मासूमों के बचपन के साथ खिलवाड़ न कर सके।

बाल श्रम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई को विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के आपसी समन्वय और सहयोग से सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। इस पूरी जमीनी कार्रवाई के दौरान जिला बाल संरक्षण अधिकारी संजय निराला और श्रम विभाग के कई अन्य जिम्मेदार अधिकारी मुख्य रूप से कार्यस्थल पर मौजूद रहे। बाल श्रम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के बाद अब अन्य फैक्ट्रियों की भी निगरानी बढ़ा दी गई है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। यह विवरण छत्तीसगढ़ के रायपुर में बाल श्रमिकों को मुक्त कराने और फैक्ट्री मालिकों पर हुई कानूनी कार्रवाई पर आधारित है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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