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फर्जी सैन्य अधिकारी गिरफ्तार: बड़ा खुलासा

सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़े अभियान के तहत एक शातिर युवक को दबोचकर फर्जी सैन्य अधिकारी गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है।

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg फर्जी सैन्य अधिकारी अपने ड्राईवर और बाउनसर्स के साथ

फर्जी सैन्य अधिकारी अपने ड्राईवर और बाउनसर्स के साथ

शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर छावनी क्षेत्र में सैन्य पुलिस ने एक बहुत बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए सुरक्षा व्यवस्था को चूना लगाने वाले एक शातिर नेटवर्क को ध्वस्त किया है। सेना की खुफिया इकाई और सैन्य पुलिस ने संयुक्त रूप से जाल बिछाकर सेना का फर्जी अधिकारी बनकर घूमने वाले एक युवक को दबोचा है।[1]

गिरफ्तार फर्जी सैन्य अधिकारी की पहचान शाहजहाँपुर के मूल निवासी इक्कीस वर्षीय आर्यन वर्मा के रूप में हुई है, जो वर्तमान में दिल्ली में रह रहा था। सैन्य अधिकारियों ने शुक्रवार को जाल बिछाकर आरोपी को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। सेना की टीम ने इस छापामार कार्रवाई के दौरान आरोपी के पास से एक जाली पहचान पत्र, फर्जी पिस्तौल और कई अन्य संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए हैं।

सैन्य पुलिस की कार्रवाई

सैन्य पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि आरोपी आर्यन वर्मा पिछले अप्रैल महीने से ही भारतीय सेना के रडार पर चल रहा था। उसकी संदिग्ध गतिविधियों को देखते हुए सेना की खुफिया इकाई लगातार उसकी निगरानी कर रही थी। अंततः सैन्य अधिकारियों ने एक योजनाबद्ध जाल बिछाया जिसके बाद आरोपी फर्जी सैन्य अधिकारी को गिरफ्तार किया जा सका।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार आरोपी को छावनी क्षेत्र के भीतर स्थित शहीद संग्रहालय में भर्ती की तैयारी कर रहे छात्रों को एक मोटिवेशनल लेक्चर देने के लिए आमंत्रित किया गया था। जैसे ही आरोपी वहाँ अपना व्याख्यान देने पहुँचा, पहले से तैयार बैठी सैन्य पुलिस की टीम ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया।

नापाक साजिश का पर्दाफाश

सैन्य अधिकारियों के अनुसार आरोपी ने अपने घर के बाहर सेना के वरिष्ठ अधिकारी की फर्जी नेमप्लेट भी लगा रखी थी। वह अक्सर अपनी लग्जरी कार में सेना का स्टार प्लेट और झंडा लगाकर शाहजहाँपुर और उसके आसपास के इलाकों में घूमता था। आरोपी खुद को विशेष सुरक्षा मिलने का दावा करते हुए दो निजी बाउंसरों के साथ चलता था।

जांच में सामने आया है कि आरोपी ने अपने दोस्तों और परिवार को झांसा देने के लिए पूरी योजना बनाई थी। वह पूर्व में मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट में कई बार असफल हो चुका था। इसके बाद उसने अपनी राहें बदल लीं और इस साल जनवरी में अपने करीबियों को बताया कि उसका चयन सेना में ब्रिगेडियर के पद पर हो गया है।

आधिकारिक बयान जारी

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद शाहजहाँपुर छावनी के एडमिन कमांडेंट कर्नल जेएस जाफरान ने घटना के संबंध में मीडिया को आधिकारिक विवरण जारी किए हैं। उन्होंने बताया कि सेना के भीतर पदों की गरिमा बहुत उच्च होती है और इस तरह की धोखाधड़ी बेहद गंभीर मामला है।

एडमिन कमांडेंट कर्नल जेएस जाफरान ने आधिकारिक बयान में अपनी बात को स्पष्ट करते हुए कहा है:

"भारतीय सेना में ब्रिगेडियर का पद अत्यंत महत्वपूर्ण और गरिमापूर्ण होता है। इसके बावजूद इक्कीस साल के इस युवक ने खुद को इस रैंक का अधिकारी बताया। उसकी कार से एक जाली पहचान पत्र मिला है और उसके पास आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज के डीन के नाम की एक फर्जी मोहर भी बरामद की गई है।"

गहन प्रशासनिक जांच

कर्नल जेएस जाफरान ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बताया कि आरोपी के पास से एक रेजिमेंटल केन भी बरामद हुई है, जो आमतौर पर सेना के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा रखी जाती है। इसके साथ ही वह अपने पास सुरक्षा के लिए एक नकली पिस्तौल भी रखता था ताकि लोग उसे सचमुच का सैन्य अधिकारी समझें।

सैन्य पुलिस के अनुसार फर्जी सैन्य अधिकारी आर्यन वर्मा दिल्ली में रहकर इस पूरी साजिश को अंजाम दे रहा था और हर कुछ हफ्तों में शाहजहाँपुर आता था। उसने अपनी तैनाती चंडीगढ़ में होने का झूठा दावा किया था। इस फर्जी सैन्य अधिकारी मामले की गहनता से जांच की जा रही है ताकि इसके पीछे छिपे अन्य संभावित मददगारों का पता लगाया जा सके।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। यह विवरण शाहजहाँपुर छावनी क्षेत्र में सैन्य पुलिस द्वारा की गई गिरफ्तारी और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के घटनाक्रम पर आधारित है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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