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बंद खदान में जहरीली गैस का रिसाव: चार की मौत

झारखंड में अवैध खनन के दौरान एक बड़ा हादसा हो गया है, जहाँ एक बंद खदान में जहरीली गैस का रिसाव होने से चार लोगों की दम घुटने के कारण दर्दनाक मौत हो गई।

By अजय त्यागी
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बंद खदान में जहरीली गैस का रिसाव: चार की मौत

रामगढ़, झारखंड। झारखंड के रामगढ़ जिले में एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है। यहाँ के रामगढ़ वन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चपरी-बुमरी इलाके में कोयला निकालने के प्रयास में एक बड़ा हादसा हो गया। स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, कुछ ग्रामीण अवैध रूप से कोयला निकालने के लिए एक पुरानी और बंद पड़ी खदान के भीतर दाखिल हुए थे, जिसके बाद वहाँ अचानक बंद खदान में जहरीली गैस का रिसाव शुरू हो गया।[1]

खदान के भीतर गए लोगों की चीख-पुकार सुनकर घटना स्थल पर भारी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस प्रशासन और सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड के सुरक्षाकर्मी तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने राहत कार्य शुरू करते हुए खदान के भीतर फंसे चार लोगों को बाहर निकाला और तुरंत अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

भीषण हादसा और राहत कार्य

सुरक्षा बलों और सीसीएल के जवानों ने स्थानीय ग्रामीणों की मदद से खदान के भीतर से सभी अचेत लोगों को बाहर निकाला। खदान के अंदर ऑक्सीजन की भारी कमी और अचानक हुए गैस रिसाव के कारण बचाव कार्य में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। प्रशासन ने सभी पीड़ितों को तुरंत नजदीकी रामगढ़ सदर अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ डॉक्टरों ने दो लोगों को मृत घोषित कर दिया और दो अन्य ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

इस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वाले मृतकों की पहचान कर ली गई है। इनमें छोटकी टोंगी सिरका अरगड्डा के रहने वाले देवा कुमार बेदिया और डब्ल्यू बेदिया शामिल हैं। इनके साथ ही सिरका बुद्ध बाजार के निवासी आशीष रजवार और किशोर रवानी की भी इस हादसे में जान चली गई है। बंद खदान में जहरीली गैस का रिसाव की इस घटना के बाद से पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है।

प्रशासनिक जांच और मुस्तैदी

घटना की सूचना मिलते ही रामगढ़ के एसडीओ कृष्ण मुरारी तिर्की और कार्यकारी मजिस्ट्रेट अंबिका कुमारी अस्पताल में मुस्तैद हैं। अस्पताल प्रशासन द्वारा मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम कराने के लिए डॉक्टरों की एक विशेष टीम का गठन किया गया है। प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से इस पूरी पोस्टमार्टम प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराने के निर्देश दिए हैं ताकि भविष्य में किसी भी विवाद से बचा जा सके।

अस्पताल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट डॉ. हरेंद्र कुमार महतो ने इस घटनाक्रम और पीड़ितों की स्थिति को लेकर आधिकारिक रूप से अपनी बात रखी है। उन्होंने बताया कि पुलिस और स्थानीय लोगों द्वारा चार लोगों को अत्यंत गंभीर स्थिति में अस्पताल लाया गया था।

डिप्टी सुपरिटेंडेंट डॉ. हरेंद्र कुमार महतो ने मामले की गंभीरता को स्पष्ट करते हुए कहा है:

"अस्पताल लाए गए चार लोगों में से दो की मौत पहले ही हो चुकी थी, जबकि दो अन्य लोगों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। शवों के पोस्टमार्टम के लिए डॉ. उदय श्रीवास्तव, डॉ. अभिजीत कुमार और डॉ. आलोक कुमार सहित डॉक्टरों की एक विशेष टीम गठित की गई है और इस पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाएगी।"

सुरक्षा तंत्र हुआ सतर्क

हादसे के बाद माइनिंग विभाग भी पूरी तरह सतर्क मोड पर आ गया है। माइंस सुपरिटेंडेंट विकास कुमार ने अपनी बारह सदस्यीय टीम के साथ दुर्घटना स्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि बंद खदान में जहरीली गैस का रिसाव होने के कारण अंदर का वातावरण बेहद जहरीला हो गया था और ऑक्सीजन का स्तर शून्य पर पहुँचने से यह हादसा और भयावह हो गया।

माइंस सुपरिटेंडेंट विकास कुमार ने मौके की स्थिति का विवरण देते हुए बताया है:

"जब मैं अपनी बारह कर्मियों की टीम के साथ घटना स्थल पर पहुँचा, तो खदान से लगातार जहरीली गैस का रिसाव हो रहा था। खदान बंद होने के कारण वहाँ ऑक्सीजन की भारी कमी थी, जिसने स्थिति को और भी ज्यादा बदतर बना दिया और लोग इसके शिकार हो गए।"

स्थानीय प्रशासन ने जनता से एक बार फिर पुरजोर अपील की है कि वे किसी भी बंद पड़ी खदानों के भीतर न जाएं और अवैध खनन जैसी जानलेवा गतिविधियों से पूरी तरह दूर रहें। इस दर्दनाक घटना के बाद से पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया है और पूरे वन क्षेत्र में पुलिस की गश्त और निगरानी को काफी बढ़ा दिया गया है। बंद खदान में जहरीली गैस का रिसाव दोबारा न हो और लोग वहाँ न जाएं, इसके लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। यह विवरण झारखंड के रामगढ़ में बंद खदान के भीतर गैस रिसाव के कारण हुई दुर्घटना और प्रशासनिक कार्रवाई पर आधारित है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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