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राजस्थान

धार्मिक अनुष्ठानों के बीच चातुर्मास स्थल की घोषणा का हुआ आयोजन

चातुर्मास स्थल की घोषणा के पावन अवसर पर भव्य जिनसहस्त्र नाम विधान का आयोजन। इस धार्मिक उत्सव में श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ भाग लेकर धर्म लाभ उठाया।

By अजय त्यागी
1 min read
जिनसहस्त्र नाम विधान का आयोजन

जिनसहस्त्र नाम विधान का आयोजन

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सलूंबर, राजस्थान (शिंभू सिंह शेखावत)। भारतीय सनातन जैन संस्कृति में चातुर्मास अथवा वर्षायोग का आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना गया है। इस पावन काल के दौरान मुनि संघ एक स्थान पर स्थिर रहकर आत्म साधना करते हैं और समाज को धर्म मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा देते हैं। इसी श्रृंखला में स्थानीय स्तर पर जैन समाज के चातुर्मास स्थल की घोषणा के बड़े धार्मिक आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में एक अभूतपूर्व उत्साह और श्रद्धा का माहौल देखा जा रहा है।

इस भव्य धार्मिक उत्सव के अंतर्गत नगर के श्रमण भवन में विराजित आचार्य कल्प पुण्य सागर महाराज ससंघ सानिध्य में जिनसहस्त्र नाम विधान का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस पावन अनुष्ठान के संपन्न होने के बाद अब सकल जैन समाज को पूज्य गुरुदेव के आगामी चातुर्मास स्थल की घोषणा का बड़ी उत्सुकता से इंतजार है। इस बड़े आयोजन को लेकर स्थानीय स्तर पर समाज के प्रबुद्ध जनों द्वारा सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

धार्मिक विधान का आयोजन

मुनि संघ के कोषाध्यक्ष मणिलाल मालवी के बताए अनुसार शनिवार को श्रमण भवन में आचार्य ससंघ सानिध्य व प्रतिष्ठाचार्य पंडित कमलेश सिंघवी के निर्देशन में भगवान के 1008 सहस्त्र नाम की आराधना की गई। इस पावन अवसर पर 1008 श्रीफल सोधर्म इंद्र इंद्राणी हेमलता देवी राकेश कुमार ढालावत व कुबेर इंद्र इंद्राणी कल्पना देवी राजेंद्र कुमार ढालावत के साथ सभी अन्य इंद्र इंद्राणी ने 1008 अर्घ्य समर्पित किए।

इस विधान के दौरान सभी इंद्र इंद्राणियों ने भगवान की भक्ति करते हुए बढ़ चढ़ कर भाग लिया और पूरा परिसर भक्तिमय भजनों से गुंजायमान हो उठा। सभी श्रावक भक्ति के आनंद में झूमते नजर आए। सांयकालीन सभा में गुरु भक्ति के साथ ही भक्ताम्बर दीप अर्चना का विशेष आयोजन हुआ जिसका लाभ दिनेशचन्द्र कोदरलाल ढालावत परिवार को मिला। इस दौरान उपस्थित भक्तों ने सामूहिक रूप से भक्ताम्बर महामंत्र का पाठ किया।

वर्षायोग की विशेष घोषणा

मुनि संघ के सुशील मिंडा ने बताया कि रविवार को नगर के हाड़रानी महल प्रांगण में आचार्य कल्प पुण्यसागर महाराज ससंघ के वर्षायोग स्थल 2026 की घोषणा होगी। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में पारसोला, उदयपुर, बांसवाड़ा, पीपलखुट, धरियावद व स्थानीय समाज सलूंबर के साथ ही अन्य कई गाँव शहर के प्रमुख समाजजन की उपस्थिति रहेगी। सभी क्षेत्रों से आए भक्त आचार्य ससंघ को अपने यहाँ वर्षायोग करने हेतु निवेदन करेंगे।

"रविवार को नगर के हाड़ारानी महल प्रांगण में आचार्य कल्प पुण्यसागर महाराज ससंघ के वर्षायोग स्थल 2026 की घोषणा होगी जिसमें पारसोला उदयपुर बांसवाड़ा पीपलखुट धरियावद व स्थानीय समाज सलुम्बर के साथ ही अन्य कई गाँव शहर के प्रमुख समाजजन की उपस्थिति रहेगी जो आचार्य ससंघ को अपने यहाँ वर्षायोग करने हेतु निवेदन करेंगे और अपने नगर में चातुर्मास करवाने हेतु सभी नगर से आये हुए भक्त आचार्य के समक्ष अपने उद्घार व्यक्त करेंगे तत्पश्चात आचार्य सभा को संबोधित करते हुए आशीर्वाद स्वरूप 2026 के चातुर्मास स्थल की घोषणा करेंगे। -सुशील मिंडा, मुनि संघ प्रतिनिधि"

श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति

इस ऐतिहासिक अवसर पर समाज के सेठ लक्ष्मीलाल ढालावत, संरक्षक धीरजमल भूता, सचिव गजेंद्र शाह, मुनिसंघ के महावीर दोषी, कमलेश तोरावत, नरेंद्र कुमार मिंडा और प्रभुलाल दोषी उपस्थित रहे। इनके साथ ही बदामीलाल सिंघवी, देवेंद्र भीमावत, महावीर गाँधी, दिलेश कोठारी, भानु दोषी, पुष्पलता कोड़िया, चेतना शाह, आशा मालवी, भगवती सिंघवी, किरण तारा वल्मावत, ललिता दोषी, अनिला सिंघवी, प्रियांशी ढालावत, हितेशी ढालावत, रंजना गाँधी, सुलोचना शाह, मंजू तोरावत और सुशीला भीमावत आदि समाजजन उपस्थित थे।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में सभी नगरों से आए हुए भक्त आचार्य के समक्ष अपने उद्गार व्यक्त करेंगे तत्पश्चात आचार्य श्री सभा को संबोधित करते हुए आशीर्वाद स्वरूप चातुर्मास स्थल की घोषणा करेंगे। इस पावन निर्णय को लेकर विभिन्न शहरों से आए प्रतिनिधियों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। हर समाज जन की यही भावना है कि पूज्य मुनि संघ का सानिध्य उनके क्षेत्र को प्राप्त हो ताकि धर्म की गंगा अविरल बह सके।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। आचार्य कल्प पुण्य सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में आयोजित जिनसहस्त्र नाम विधान, वर्षायोग घोषणा कार्यक्रम और पदाधिकारियों के बयानों की प्रामाणिक जानकारी लोकहित में प्रस्तुत की गई है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief