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उपहारों कि गुणवत्ता को लेकर सरकारी योजना पर विवाद

उपहारों की गुणवत्ता खराब होने पर सरकारी योजना पर विवाद छिड़ गया। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना से जुड़े मामले ने तूल पकड़ा। 

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg अपने मंगलसूत्र दिखाती विवाहिताएं (ETV Bharat)

अपने मंगलसूत्र दिखाती विवाहिताएं (ETV Bharat)

मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत कुछ महीने पहले परिणय सूत्र में बंधे जोड़ों ने सरकार द्वारा दिए गए मंगलसूत्रों की गुणवत्ता पर गंभीर आरोप लगाए हैं। नवविवाहितों का कहना है कि सामूहिक विवाह के दौरान उपहार स्वरूप मिले मंगलसूत्र अब पूरी तरह से काले पड़ चुके हैं। इस घटना के बाद से पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है और जन कल्याण के लिए चलाई जा रही इस महत्वपूर्ण सरकारी योजना पर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है।[1]

इस बड़े सामूहिक विवाह कार्यक्रम का आयोजन बीते दस फरवरी को खड़गवां के चंवरिडांड नामक स्थान पर बेहद धूमधाम के साथ किया गया था, जिसमें लगभग एक सौ नवासी जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ था। शादी के कुछ महीनों बाद अब यह अनोखा मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है क्योंकि उपहार पाने वाले लाभार्थी एक-एक कर सार्वजनिक रूप से अपनी शिकायतें दर्ज करा रहे हैं। लाभार्थियों का दावा है कि प्रशासन ने इन्हें चांदी पर सोने की परत चढ़ा मंगलसूत्र बताया था, जो अब बेहद घटिया धातु के लग रहे हैं। इन आरोपों के बाद सरकारी योजना पर विवाद बढ़ गया है। 

विपक्ष ने उठाए सवाल

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जिससे राज्य का राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्मा गया है और सरकारी योजना पर विवाद छिड़ गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का आरोप है कि महिला एवं बाल विकास विभाग के भीतर इस तरह के भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामले अब बेहद आम हो चुके हैं। विपक्ष का कहना है कि पिछले वर्ष भी ठीक इसी प्रकार की घटिया सामग्री बांटने की गंभीर शिकायतें अलग-अलग जिलों से सामने आई थीं।

"महिला एवं बाल विकास विभाग में भ्रष्टाचार के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। यदि इस पूरे मामले की जिला स्तर पर किसी स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो मैं इस गंभीर वित्तीय अनियमितता के खिलाफ सीधे तौर पर विभागीय सचिव से मिलकर एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराऊंगी।" - गुलाब कमरो, पूर्व कांग्रेस विधायक

विभाग की आधिकारिक सफाई

दूसरी तरफ संबंधित महिला एवं बाल विकास विभाग ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि योजना के क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर कोई लापरवाही नहीं बरती गई है और सभी तरह के भुगतान पूरी तरह से सरकारी नियमों के तहत किए गए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बांटे गए मंगलसूत्रों में चांदी का उपयोग नहीं किया गया था और उनकी सरकारी खरीद दर बेहद सीमित थी।

"इस सामूहिक विवाह योजना के प्रावधानों के तहत तय सीमा से अधिक की राशि सीधे तौर पर वधु के बैंक खाते में जमा कराई गई है। नियमों के अनुसार पैंतीस हजार रुपये आरटीजीएस के माध्यम से ट्रांसफर किए जाने थे, लेकिन हकीकत में छत्तीस हजार रुपये भेजे गए हैं। मंगलसूत्र के लिए आवंटित करीब एक हजार रुपये की शेष राशि भी लाभार्थी के खाते में जोड़ दी गई थी।" - आदित्य शर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी

सख्त जांच के निर्देश

विभागीय आंकड़ों के अनुसार इस सामूहिक योजना के अंतर्गत प्रति विवाह कुल पचास हजार रुपये खर्च करने का कड़ा नियम निर्धारित है। इसमें से पैंतीस हजार रुपये सीधे तौर पर दुल्हन के बैंक खाते में भेजे जाते हैं, जबकि आठ हजार रुपये विवाह समारोह के आयोजन पर खर्च होते हैं। इसके साथ ही शेष सात हजार रुपये विवाह के लिए बेहद आवश्यक घरेलू सामग्रियां उपलब्ध कराने के लिए तय किए गए हैं। सरकारी योजना पर विवाद छिड़ने के बाद अब इसकी सख्त जांच के निर्देश दिए गए हैं। 

"इस पूरे मामले की गहन जांच फिलहाल स्थानीय स्तर पर चल रही है। क्षेत्रीय विधायक और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इन सभी शिकायतों की बारीकी से जांच करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। यदि जांच के किसी भी चरण में भ्रष्टाचार या अनियमितता पाई जाती है, तो दोषी अधिकारियों के खिलाफ बेहद सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।" - उज्ज्वल दीपक, भाजपा प्रदेश प्रवक्ता

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के नियमों और जांच रिपोर्ट से संबंधित आधिकारिक अपडेट के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के बयानों को ही सर्वोपरि मानें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए जाने वाले किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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