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अंतरराष्ट्रीय

वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार को लेकर चीन ने जारी किया श्वेत पत्र

बढ़ते वैश्विक विवादों और आर्थिक संकटों के बीच संयुक्त राष्ट्र की गिरती साख को बचाने के लिए वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार की मांग तेज हो गई है।

By अजय त्यागी
1 min read
वांग यी, विदेश मंत्री, चीन

वांग यी, विदेश मंत्री, चीन

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बीजिंग। दुनिया भर में बढ़ते राजनीतिक और आर्थिक विवादों के कारण संयुक्त राष्ट्र की संप्रभुता को मिल रही चुनौतियों के बीच वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार की मांग तेजी से मुखर होने लगी है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने एक विशेष प्रेस ब्रीफिंग के दौरान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उभरते बाजारों और विकासशील देशों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व न मिलने पर गहरी चिंता व्यक्त की है। इस दौरान उन्होंने एक नया श्वेत पत्र भी जारी किया है जिसमें वैश्विक प्रणालियों को अधिक न्यायसंगत और निष्पक्ष बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव शामिल किए गए हैं।[1]

इस नए राजनयिक कदम के जरिए बीजिंग प्रशासन अंतरराष्ट्रीय समुदाय के भीतर बड़े और छोटे देशों के बीच समानता के अधिकार को स्थापित करना चाहता है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक स्तर पर लगातार सामने आ रही नई चुनौतियों ने मानवता के सामने एक गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। चीनी विदेश मंत्री ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि आधुनिक सभ्यता का जहाज इस समय बेहद खतरनाक और अशांत पानी में प्रवेश कर चुका है जहाँ अदृश्य चट्टानें और हिंसक तूफान हर पल इसके अस्तित्व को चुनौती दे रहे हैं।

बढ़ते वैश्विक संकट

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी मौजूदा गतिरोध गहरे आंतरिक मतभेदों को उजागर करते हैं जिसके कारण ब्लैक स्वान और ग्रे राइनो जैसी अप्रत्याशित घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने अपनी इस महत्वपूर्ण ब्रीफिंग के दौरान विशेष रूप से मिडिल ईस्ट और यूक्रेन संकट का संदर्भ दिया है। इन देशों के बीच जारी युद्ध ने पूरी दुनिया की आर्थिक और राजनीतिक स्थिरता को गंभीर नुकसान पहुँचाया है जिसके समाधान के लिए वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार को अब बेहद जरूरी माना जा रहा है।

"चाहे कोई देश बड़ा हो या छोटा, मजबूत हो या कमजोर, विकसित हो या विकासशील, वे सभी अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समान सदस्य हैं। हमें इस व्यवस्था को बचाने के लिए ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों की आवाजों को वैश्विक मंचों पर और अधिक स्थान देना होगा।" - वांग यी, विदेश मंत्री, चीन

संयुक्त राष्ट्र की साख

इस नए श्वेत पत्र का प्राथमिक उद्देश्य विभिन्न वैश्विक चुनौतियों का अधिक प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत आम सहमति का निर्माण करना है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार की इस पूरी कवायद को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के अधिकार और उसकी गरिमा को बनाए रखना सबसे मौलिक आवश्यकता है। यदि सभी सदस्य देश इस वैश्विक संस्था की सर्वोच्चता का सम्मान नहीं करेंगे तो दुनिया भर में जारी विवादों को रोकना असंभव हो जाएगा।

राजनयिक विशेषज्ञों का मानना है कि महाशक्तियों के बीच बढ़ते आर्थिक टकराव को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय नियमों का पूरी निष्पक्षता से पालन होना चाहिए। दुनिया भर के विभिन्न विकासशील और उभरते हुए बाजार भी इस समय संयुक्त राष्ट्र के भीतर अपने अधिकारों और वीटो पावर के विस्तार की लगातार मांग कर रहे हैं। बीजिंग द्वारा जारी किए गए इस श्वेत पत्र के बाद अब यह देखना काफी दिलचस्प होगा कि पश्चिमी देश वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार के इन प्रस्तावों पर आने वाले समय में क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। अंतरराष्ट्रीय नीतियों और कूटनीतिक संबंधों की स्थितियां बदल सकती हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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