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रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन: महिलाओं ने दिखाया हुनर

भीलवाड़ा में महेश नवमी महोत्सव के तहत रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया जिसमें सास-बहू रैंप वॉक, मांडना कला और अंताक्षरी की धूम रही।

By अजय त्यागी
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रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन

भीलवाड़ा, राजस्थान (पंकज पोरवाल)। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में श्रीनगर सभा के तत्वावधान में आयोजित महेश नवमी महोत्सव के दौरान एक बेहद अनूठा और रंगारंग सांस्कृतिक संगम देखने को मिला है। महोत्सव में आज तृतीय दिवस पर नगर माहेश्वरी महिला संस्थान समाज की महिलाओं और परिवारों को आपस में जोड़ने के उद्देश्य से कई तरह की रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन अत्यंत भव्य और व्यवस्थित स्तर पर किया गया। इन विभिन्न सांस्कृतिक एवं मनोरंजक कार्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय प्रतिभाओं को निखारने का एक बेहतरीन और सराहनीय प्रयास किया गया है।

इस गरिमामयी त्रि-दिवसीय कार्यक्रम के मुख्य सत्र के दौरान समाज की महिलाओं ने बहुत ही उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी छिपी हुई कलात्मक प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। नगर माहेश्वरी महिला संस्थान की अध्यक्षा वीणा मोदी ने आधिकारिक तौर पर बताया कि इस पूरे भव्य महोत्सव के आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज में पारस्परिक पारिवारिक मूल्यों, प्राचीन गौरवशाली संस्कृति एवं आपसी सामाजिक सौहार्द को निरंतर बढ़ावा देना है।

पारिवारिक रिश्तों की सुंदर छटा

संस्थान की सचिव विनीता तोष्णीवाल के अनुसार उत्सव के अंतर्गत आयोजित की गई अनूठी "सास और बहू-रिश्तों की रैंप वॉक" प्रतियोगिता मुख्य आकर्षण का केंद्र रही। इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाली सास-बहू की विभिन्न जोड़ियों ने मंच पर एक साथ कदमताल करते हुए प्रेम, सम्मान और आपसी सामंजस्य की एक बेहद सुंदर प्रस्तुति देकर उपस्थित सभी दर्शकों का मन मोह लिया। इस प्रतियोगिता की मुख्य कमान अनु मोदी, नीलम दरगड़ एवं चेतना जागेटिया के हाथों में रही।

इस अनूठे रैंप वॉक का सफल संयोजन संजय कॉलोनी महिला संगठन की समर्पित अध्यक्ष अनुपमा मंत्री एवं सचिव मधु हिंगड़ द्वारा किया गया। कड़े मुकाबले के बाद इस प्रतियोगिता में सुधा असावा एवं सलोनी असावा की जोड़ी ने प्रथम स्थान हासिल किया। वहीं सरोज सोमानी एवं शिल्पा सोमानी की जोड़ी द्वितीय स्थान पर रही, जबकि मीना जेथलिया एवं मनीषा जेथलिया की जोड़ी ने प्रतियोगिता में तीसरा स्थान प्राप्त करने में सफलता हासिल की।

कला और संगीत की जुगलबंदी

इसके पश्चात पारंपरिक संस्कृति को सहेजने के लिए "नारी मांडना (अल्पना)-पारंपरिक कला की ओर" नामक एक बेहद खूबसूरत कला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस विधा में 40 वर्ष से अधिक आयु वर्ग की वरिष्ठ महिलाओं ने अपनी अद्भुत कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए घर-आंगन में बनाई जाने वाली पारंपरिक मांडना कला के कई आकर्षक स्वरूप प्रस्तुत किए। प्रतियोगिता की मुख्य जिम्मेदारी रेखा लढा, गायत्री मुंदड़ा एवं मधु जाजू ने निभाई।

इस कलात्मक प्रतियोगिता का बेहतरीन संयोजन शास्त्री नगर महिला संगठन की अध्यक्ष रेखा धूत एवं सचिव विनीता तापड़िया द्वारा किया गया। इसमें कलात्मक मांडना बनाने के लिए नीलू मालू को प्रथम, सुनीता कास्ट को द्वितीय तथा डिंपल काबरा को तृतीय स्थान के लिए चुना गया। इसके साथ ही महिलाओं की कलात्मक रुचि को नया विस्तार देने के लिए ही इस विशेष सांस्कृतिक सत्र के दौरान विभिन्न रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन करके पुरानी कला को नया जीवन दिया गया।

रोमांचक अंताक्षरी और पुरस्कार वितरण

विभिन्न रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन करते हुए कार्यक्रम के अंतिम चरण में "गूंजे सुर, खिलें मुस्कान - मिले सुर मेरा तुम्हारा" शीर्षक के साथ एक भव्य अंताक्षरी प्रतियोगिता का मुकाबला हुआ। इस संगीतमय मुकाबले में कुल 13 क्षेत्रीय माहेश्वरी महिला संगठनों की टीमों के मध्य बेहद कड़ा संघर्ष देखने को मिला। अंताक्षरी में सभी टीमों के प्रतिभागियों की आकर्षक पारंपरिक वेशभूषा और विशिष्ट ड्रेस कोड पूरे पंडाल में मुख्य आकर्षण का केंद्र बने रहे।

मुख्य प्रभारी सुमन सोनी ने पूरे कार्यक्रम का अत्यंत सुंदर, सटीक एवं व्यवस्थित ढंग से संचालन किया, जिससे अंताक्षरी प्रतियोगिता अंत तक रोमांचक और बेहद आनंदमय बनी रही। सुरों के इस महामुकाबले में आजाद नगर की टीम ने प्रथम स्थान पर कब्जा जमाया। इसके बाद शास्त्री नगर की टीम ने दूसरा स्थान हासिल किया, जबकि सुभाष नगर की टीम को तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा। इस सुरमई शाम का वहां मौजूद सभी प्रबुद्ध समाजजनों ने भरपूर आनंद लिया।

विशिष्ट अतिथियों द्वारा प्रोत्साहन

इस भव्य उत्सव की मुख्य अतिथि प्रदेश उपाध्यक्ष सीमा कोगटा और प्रदेश उपाध्यक्ष मोना डाड रहीं। उनके साथ राजे श्याम चेचानी, कैलाश कोठारी, अशोक बाहेती, सत्यनारायण डाड, राजेंद्र कचोलिया, दिलीप तोषनीवाल, केदार जागेटिया, सुरेश बिरला, प्रहलाद नुवाल, केजी राठी और गोपाल नराणीवाल जैसी वरिष्ठ विभूतियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। विशिष्ट अतिथि कैलाश कोठारी ने सभी महिला प्रतिभागियों का विशेष उत्साहवर्धन करते हुए इस सफल आयोजन की जमकर सराहना की। रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन करने में सहयोग करने वाले सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। 

कैलाश कोठारी ने अपनी ओर से प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले सभी ऊर्जावान प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष पुरस्कार भी प्रदान किए। कार्यक्रम के समापन पर संस्थान के समस्त पदाधिकारियों ने सभी संभागियों, मुख्य प्रभारियों, कुशल संयोजकों एवं प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी सहयोगकर्ताओं का सहृदय आभार व्यक्त किया। कुल मिलाकर इस त्रि-दिवसीय महोत्सव ने भीलवाड़ा में कला, संगीत और पारिवारिक रिश्तों की एक बेहद सुंदर और अमिट छटा बिखेरी है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। स्थानीय आयोजन समिति के निर्णयों, पुरस्कारों की श्रेणियों और सामाजिक विधिक प्रक्रियाओं के तथ्य आयोजन मंडल के नियमों के अधीन पूरी तरह परिवर्तनशील हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief