फेड के कड़े रुख से मची अफरातफरी: डॉलर इंडेक्स में भारी उछाल आया
अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक बदलावों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नए आर्थिक नीतिगत फैसलों के कारण डॉलर इंडेक्स में भारी उछाल देखने को मिल रहा है।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
वैश्विक आर्थिक मंच पर इस समय डॉलर इंडेक्स में भारी उछाल सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रहा है क्योंकि इसने पिछले तीन महीनों में अपनी सबसे बड़ी एकल दिवसीय बढ़त दर्ज की है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक के नए अध्यक्ष केविन वॉर्श द्वारा व्यापक नीतिगत समीक्षा शुरू करने और ब्याज दरों को तीन दशमलव पांच शून्य से तीन दशमलव सात पांच प्रतिशत की सीमा में स्थिर रखने के बाद वैश्विक व्यापारिक समीकरण बदल गए हैं। हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच एक अंतरिम शांति समझौता हुआ है, लेकिन मुद्रास्फीति की बढ़ती चिंताओं के कारण लगभग आधे नीति निर्माता इस वर्ष ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं।[1]
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, फेड फंड्स फ्यूचर्स मार्केट ने अब दिसंबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा मौद्रिक नीतियों को और सख्त करने की पचासी प्रतिशत संभावना जताई है, जिससे ग्रीनबैक को लगातार मजबूती मिल रही है। इस मजबूत आर्थिक रुख के कारण यूरो और ब्रिटिश पाउंड जैसी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राएं अपने दो महीने के निचले स्तर को छूने के बाद मामूली सुधार के साथ कारोबार कर रही हैं। वैश्विक कूटनीति के जानकार मानते हैं कि केंद्रीय बैंक के इस आक्रामक रुख ने दुनिया भर के निवेशकों को अपनी वित्तीय रणनीतियों पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।
मुद्रा बाजार और नीतिगत रुख
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अमेरिकी मुद्रा के इस कड़े रुख का असर अन्य देशों की मुद्राओं पर साफ देखा जा रहा है। विशेष रूप से जापानी येन में लगातार आ रही कमजोरी ने टोक्यो के अधिकारियों को एक बार फिर से गंभीर मौखिक चेतावनी जारी करने के लिए विवश कर दिया है। जापानी येन कमजोर होकर एक सौ साठ दशमलव सात छह के स्तर पर पहुंच गया है, जिसने पिछले दिनों सरकार द्वारा किए गए वित्तीय हस्तक्षेप से मिली बढ़त को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। इसके अलावा जोखिम के प्रति संवेदनशील ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और न्यूजीलैंड डॉलर में मामूली बढ़त दर्ज की गई है।
दूसरी ओर, बैंक ऑफ इंग्लैंड भी इस सप्ताह अपनी प्रमुख ब्याज दरों को तीन दशमलव सात पांच प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने की तैयारी में है। ब्रिटिश नीति निर्माता इस बात का गहन कूटनीतिक आकलन कर रहे हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ अंतरिम समझौता वैश्विक मुद्रास्फीति को किस तरह प्रभावित करेगा। इस बड़े कूटनीतिक घटनाक्रम और केंद्रीय बैंकों की भविष्य की रणनीतियों के बीच डॉलर इंडेक्स में भारी उछाल आने वाले दिनों में व्यापारिक विनिमय दरों को व्यापक रूप से प्रभावित करने वाला सबसे बड़ा कारक साबित होगा।
कच्चे तेल और व्यापार पर असर
अमेरिका और ईरान के बीच हस्ताक्षरित अंतरिम समझौते के बाद कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी आई है, जिसने ग्रीनबैक की आक्रामक तेजी को आंशिक रूप से रोकने का काम किया है। यह समझौता न केवल दोनों देशों के बीच जारी सैन्य कड़वाहट को समाप्त करता है बल्कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को भी वाणिज्यिक जहाजों के लिए दोबारा खोलने का मार्ग प्रशस्त करता है। इसके साथ ही वाशिंगटन द्वारा तेहरान के तेल निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों में विशेष छूट दी जाएगी, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था में सुधार होने की उम्मीद है। इसी के चलते डॉलर इंडेक्स में भारी उछाल देखने को मिल रहा है।
"हम किसी भी समय आवश्यकतानुसार मुद्रा की चाल पर उचित प्रतिक्रिया देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।" - माइनोरू किहारा, मुख्य कैबिनेट सचिव, जापान
वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि जब तक होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों के मुफ्त और सुरक्षित आवागमन की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक वैश्विक बाजारों में अमेरिकी डॉलर की मजबूती का दबदबा लगातार कायम रहेगा। वर्तमान आर्थिक परिदृश्य को देखते हुए यह पूरी तरह स्पष्ट है कि कूटनीतिक अस्थिरता और अमेरिकी नीतियों के कारण डॉलर इंडेक्स में भारी उछाल वैश्विक निवेश प्रवाह को अपनी सुविधानुसार नियंत्रित कर रहा है। सभी प्रमुख देशों के केंद्रीय बैंक अब इस बड़े वित्तीय उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए अपनी आंतरिक आर्थिक नीतियों की कड़ाई से समीक्षा करने में जुटे हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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