पीबीएम सुधारो जन आन्दोलन: कांग्रेस का धरना आठवें दिन भी जारी
स्थानीय स्तर पर चिकित्सा व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने और प्रसूताओं को न्याय दिलाने के लिए व्यापक स्तर पर पीबीएम सुधारो जन आन्दोलन चलाया जा रहा है।
पीबीएम सुधारो जन आन्दोलन
बीकानेर, राजस्थान। जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा पीबीएम अस्पताल की बदहाल व्यवस्थाओं के विरोध में चलाया जा रहा पीबीएम सुधारो जन आन्दोलन के तहत धरना आठवें दिन भी पूरी मुस्तैदी के साथ जारी रहा। इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य चिकित्सा संस्थान की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं में अमूलचूल सुधार करना और पीड़ित प्रसुताओं को न्याय दिलाना है। धरना स्थल पर मौजूद नेताओं ने अस्पताल व जिला प्रशासन द्वारा मांगों पर कोई ठोस एवं प्रभावी कार्रवाई नहीं करने को घोर संवेदनहीनता करार दिया, जिससे आमजन में गहरा रोष व्याप्त है।
धरना स्थल पर श्रीडूंगरगढ़ के पूर्व विधायक मंगलाराम गोदारा, भूदान आयोग के चैयरमेन लक्ष्मण कड़वासरा, आरजीपीआरएस अध्यक्ष हरीराम बाना, आनन्दसिंह सोढ़ा, गजेन्द्रसिंह सांखला, कमल कल्ला, मकसूद अहमद, भंवर कूकणा, श्रीकृष्ण गोदारा, सलिना खान और मोहनराम लीलड़ मुख्य रूप से शामिल हुए। इन वरिष्ठ नेताओं ने अपने सम्बोधन में कहा कि पीबीएम अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण चिकित्सा संस्थान की बदहाल स्थिति मरीजों के स्वास्थ्य के साथ सरेआम खिलवाड़ है, जो आम जनता के स्वास्थ्य के मौलिक अधिकार को सीधे तौर पर प्रभावित कर रही है।
कलेक्टर से वार्ता
धरने स्थल से कांग्रेस का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमण्डल देहात अध्यक्ष बिशनाराम सियाग एवं शहर अध्यक्ष मदनगोपाल मेघवाल के संयुक्त नेतृत्व में सीधे जिला कलेक्टर से मुलाकात करने पहुँचा। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने पीबीएम अस्पताल में व्याप्त गंभीर अव्यवस्थाओं, भ्रष्टाचार, जीवनरक्षक दवाईयों की भारी कमी और प्रसुताओं की किडनी व आंखें फैल होने जैसे अति संवेदनशील मामलों पर विस्तृत चर्चा की। नेताओं ने जिला प्रशासन के समक्ष मरीजों को हो रही गंभीर परेशानियों का तुरंत स्थाई समाधान निकालने की पुरजोर वकालत की।

पीबीएम सुधारो जन आन्दोलन के प्रतिनिधिमण्डल ने सीएम मूंधड़ा मेडिसिन विंग एवं जनाना गायनिक विंग को शीघ्र सुचारू रूप से शुरू करने की प्रमुख मांग रखी। इसके साथ ही हॉस्पिटल परिसर में फैले भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच कराने, संपूर्ण सफाई व्यवस्था सुदृढ़ करने, जीवनरक्षक दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा सीटी स्कैन व एमआरआई सहित अन्य जरूरी जांच सुविधाओं को सुचारू रूप से संचालित करने की बात कही। जिला कलेक्टर ने इन सभी व्यावहारिक समस्याओं को सुनने के बाद प्रतिनिधिमंडल को सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया।
न्याय की मांग
कांग्रेस प्रतिनिधिमण्डल द्वारा बंद पड़े चिकित्सा उपकरणों को तुरंत चालू कराने, चिकित्सकों एवं चिकित्सा कर्मियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा चिकित्सकीय लापरवाही से प्रभावित प्रसूता महिलाओं को न्याय दिलाने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। पीड़ित महिलाओं के परिवारों को पच्चीस लाख रुपये मुआवजा देने तथा दोषी स्टाफ के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की गई। इसके अलावा मरीजों एवं परिजनों के साथ होने वाले दुव्यहार और मारपीट की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने की भी मांग की गई।
प्रतिनिधिमण्डल ने प्रशासन को सख्त चेतावनी दी है कि यदि उनकी इन जायज मांगों पर शीघ्र ही सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो जनहित में जिला स्तर पर एक बहुत बड़ा जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण प्रतिनिधिमण्डल में पूर्व मंत्री भंवरसिंह भाटी, पूर्व विधायक मंगलाराम गोदारा, भूदान बोर्ड के चैयरमेन लक्ष्मण कडवासरा, लूणकरनसर प्रत्याशी राजेन्द्र मूण्ड, पीसीसी महासचिव गजेन्द्रसिंह सांखला, पूर्व यूआईटी चैयरमेन मकसूद अहमद, संगठन महासचिव प्रहलादसिंह मार्शल और सेवादल प्रदेश उपाध्यक्ष कमल कल्ला शामिल रहे।

कार्यकर्ताओं की मुस्तैदी
संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों में यूथ कांग्रेस अध्यक्ष भवंर कूकणा, महिला कांग्रेस शहर अध्यक्ष शशिकला राठौड़, एनएसयूआई जिलाध्यक्ष श्रीकृष्ण गोदारा, बृजलाल गोदारा, आनन्दसिंह सोढ़ा, मदन मेघवाल, रामनिवास गोदारा, सुमित कोचर और शहजाद भूट्टो सहित अनेक नेता मौजूद रहें। जिला संगठन महासचिव प्रहलादसिंह मार्शल ने बताया कि प्रमुख नेताओं के अलावा बड़ी संख्या में सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता इस पीबीएम सुधारो जन आन्दोलन को मजबूत करने के लिए धरना स्थल पर डटे हुए हैं।
धरने में मुख्य रूप से प्रभुराम बाना, धाई बाना, भगवानाराम जाखड़, पूनमचन्द भाम्भू, शिवदान मेघवाल, शिवलाल गोदारा, रामजस कस्वां, ओमप्रकाश कस्वां, भंवरलाल सारण, मोहनराम लीलड़, गोपाल चावरियां, सुशील कुमार गोदारा, राजकुमार सेन, गोपालराम महिया, बाबूलाल डेलू, फुसाराम ज्याणी, दिनेश मीणा, रामसिंह मेघवाल, कमल गोयल, विनोद, चेननाथ, मालाराम, रामेश्वरलाल मेघवाल, असगर खां, लक्ष्मण नाथ, राधाकिशन ज्याणी, प्रभुसिंह, बीजाराम जाखड़, प्यारेलाल बाना, चरण जीत, विनय कुमार आचार्य, जगदीश शर्मा, भेराराम गोदारा, सहिराम गोदारा, दूर्गाराम गोदारा, दुलाराम गोदारा और मोहनलाल मेघवाल शामिल रहे।