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अजब - गजब

गांव को रोशन करने का जज्बा: डी पी कंधे पर ले पहाड़ चढ़े ग्रामीण

माउंट आबू की दुर्गम पहाड़ियों में बसे एक सुदूर गांव के निवासियों ने गांव को रोशन करने का जज्बा दिखाते हुए आत्मनिर्भरता की अद्भुत मिसाल पेश की है।

By अजय त्यागी
1 min read
गांव को रोशन करने का जज्बा

गांव को रोशन करने का जज्बा

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सिरोही, राजस्थान। माउंट आबू की दुर्गम और पथरीली पहाड़ियों के बीच बसे उतरज गांव के स्थानीय निवासियों ने सामूहिक प्रयास और दृढ़ संकल्प की एक ऐसी अनूठी गाथा लिखी है, जो हर किसी के लिए प्रेरणा बन गई है। आधुनिक दौर में भी गांव तक पक्की सड़क की सुविधा नहीं होने के बावजूद, यहाँ के ग्रामीणों ने परिस्थितियों के आगे घुटने नहीं टेके। गांव को रोशन करने का जज्बा लिए डिस्ट्रीब्यूशन पैनल के भारी-भरकम हिस्सों को अपने मजबूत कंधों पर उठाकर ग्रामीणों ने छह किलोमीटर लंबा पहाड़ी रास्ता तय किया।[1]

दरअसल, गांव में बिजली आने वाली थी और उसके लिए ट्रांसफार्मर आदि जरूरी सामान लेकर जो विभाग की गाड़ी आई थी, वह रास्ता सही नहीं होने के कारण पहाड़ी से नीचे ही धोखा दे गई। वाहन के खराब होने से एक बार तो काम रुकने की नौबत आ गई थी, लेकिन गांव वालों ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने गांव को रोशन करने का जज्बा लिए भारी-भरकम सामान को मजबूत बांसों के सहारे बांधा और उसे अपने कंधों पर उठा लिया ताकि आजादी के इतने वर्षों बाद आखिरकार उनका अपना गांव भी अब पूरी तरह रोशन हो सके।[विडियो]

अधूरा सपना हुआ पूरा

विद्युत उपकरणों के अभाव में इस क्षेत्र के सैकड़ों परिवारों का स्थायी बिजली आपूर्ति पाने का दशकों पुराना सपना अधूरा पड़ा हुआ था। इस बार गांव को रोशन करने का जज्बा लोगों में ऐसा दिखाई दिया कि उन्होंने हालात के आगे हार मानने के बजाय खुद अपनी जिम्मेदारी उठाने का बड़ा फैसला किया। उन्होंने सूझबूझ दिखाते हुए डिस्ट्रीब्यूशन पैनल के भारी हिस्सों को तकनीकी रूप से अलग-अलग किया और उन्हें अपने कंधों पर रखकर जानलेवा पहाड़ी रास्तों से गुजरते हुए सुरक्षित रूप से अपने गांव तक पहुंचाया।

ग्रामीणों द्वारा किए गए इस अभूतपूर्व सामूहिक श्रमदान और अटूट दृढ़ संकल्प के बल पर वर्षों से फाइलों में लंबित पड़ा कार्य पूरा हो गया। इस ऐतिहासिक घटना से पहले तक इस सुदूर पहाड़ी गांव में बिजली की बुनियादी जरूरतें मुख्य रूप से छोटे सोलर पैनलों के जरिए ही जैसे-तैसे पूरी की जा रही थीं। हालांकि समय के साथ बढ़ती आबादी और आधुनिक जीवन की दैनिक आवश्यकताओं के चलते यह पुरानी व्यवस्था अब पूरी तरह नाकाफी साबित हो रही थी।

रोशन होंगी अब गलियां

इसी मुख्य उद्देश्य को ध्यान में रखकर क्षेत्र में मजबूत विद्युत आपूर्ति बहाल करने के लिए नए और आधुनिक क्षमता के डिस्ट्रीब्यूशन पैनल की स्थापना की जा रही है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों के विशेष प्रयासों से इस भारी उपकरण को गांव के सबसे निकटतम पहुंच मार्ग तक तो गाड़ी से पहुँचा दिया गया था, लेकिन इसके आगे का अंतिम और सबसे खतरनाक सफर ग्रामीणों ने खुद तय किया। उन्होंने साबित कर दिया कि जब सामूहिक रूप से लोग कुछ करने की ठान लेते हैं, तो असंभव काम भी संभव हो जाता है।

इस भारी उपकरण के पूरी तरह स्थापित होने के बाद अब उतरज गांव को अधिक क्षमता के साथ नियमित और स्थिर बिजली आपूर्ति मिलने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। इस नई व्यवस्था से गांव के सीधे-साधे लोगों के दैनिक जीवन के स्तर में बहुत बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। स्थिर बिजली आने से बच्चों की स्कूली शिक्षा को बेहतर डिजिटल संसाधन मिलेंगे, कृषि कार्यों में आधुनिक मशीनों की सुविधा बढ़ेगी और छोटे-मोटे ग्रामीण व्यवसायों को भी एक नई वित्तीय गति प्राप्त होगी।

सराहनीय जनभागीदारी

उतरज गांव के साहसी निवासियों का यह गांव को रोशन करने का जज्बा और भगीरथी प्रयास न केवल उनके अपने जिले के लिए, बल्कि आज के समय में पूरे प्रदेश के लिए विकास की एक नई नजीर बन चुका है। यह सामूहिक कार्य देश को एक बहुत बड़ा और स्पष्ट संदेश देता है कि जमीनी विकास केवल सरकारी बजट या कागजी योजनाओं के भरोसे नहीं छोड़ना चाहिए। जब जनता में जनभागीदारी का जज्बा हो, तो बड़ी से बड़ी बाधाओं को पार करके आत्मनिर्भरता के सुनहरे अध्याय लिखे जा सकते हैं।

ग्रामीणों के इस अनूठे कदम की चर्चा अब पूरे प्रशासनिक महकमे में बहुत तेजी से हो रही है। इस दुर्गम इलाके में बिना किसी सरकारी मशीनरी की मदद के, केवल इंसानी हौसले के दम पर बिजली का ढांचा खड़ा करना वाकई तारीफ के काबिल है। इस सफल प्रयास ने सिद्ध कर दिया है कि अगर समाज में एकजुटता हो, तो किसी भी बड़े संकट का समाधान आपसी सहयोग से निकाला जा सकता है। आने वाले समय में यह गांव विकास के मामले में एक model की तरह देखा जाएगा।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। ग्रामीण विकास एवं स्थानीय इंफ्रास्ट्रक्चर के कार्यों के लिए संबंधित सरकारी विभागों की गाइडलाइंस का ध्यान रखना आवश्यक है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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