परमाणु सुरक्षा का रिकॉर्ड बेदाग़: भारत को मिली क्लीन चिट
वियना से आई रिपोर्ट में वैश्विक निगरानी दल ने भारतीय परमाणु रिएक्टरों को क्लीन चिट देते हुए भारत के बेहतरीन परमाणु सुरक्षा का रिकॉर्ड को सराहा है।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
नई दिल्ली, भारत। भारत आगामी इक्कीस वर्षों में अपनी स्थापित परमाणु ऊर्जा क्षमता को आठ गीगावाट से बढ़ाकर सौ गीगावाट करने की बड़ी तैयारी कर रहा है। इस महात्वाकांक्षी विस्तार के बीच वियना में स्थित अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के एक शांत कंट्रोल रूम से भारत के लिए बेहद राहत देने वाली खबर आई है। एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर चौबीसों घंटे निगरानी रखने वाली इस विशेष टीम ने स्पष्ट किया है कि अपने लगभग दो दर्जन परमाणु रिएक्टरों के संचालन में भारत का परमाणु सुरक्षा का रिकॉर्ड अब तक पूरी तरह बेदाग और बेमिसाल रहा है।[1]
अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के इंसिडेंट एंड इमरजेंसी सेंटर के निदेशक अमगाद शोक्र ने आधिकारिक तौर पर इस बात की पुष्टि की है कि भारत में आज तक कोई भी परमाणु दुर्घटना नहीं हुई है। इसलिए भारत का परमाणु सुरक्षा का रिकॉर्ड अभी तक पूरी तरह से बेदाग़ है। एजेंसी का यह केंद्र बिना किसी शोर-शराबे के बेहद सटीकता के साथ काम करता है और परमाणु आपातकाल की तैयारी, वैश्विक संचार तथा त्वरित प्रतिक्रिया के लिए दुनिया के मुख्य केंद्र के रूप में जाना जाता है। इस केंद्र में लगभग पैंतीस स्थायी कर्मचारी हैं, जिन्हें दुनिया भर के एक सौ सत्तर से अधिक विशेषज्ञों का मजबूत तकनीकी सहयोग प्राप्त है।
वैश्विक निगरानी का तंत्र
यह छोटा लेकिन अत्यधिक ऊर्जावान कंट्रोल रूम पूरी दुनिया की सुरक्षा प्रणाली के तंत्रिका तंत्र के रूप में चौबीसों घंटे सक्रियता से कार्य करता है। यह केंद्र भारत सहित दुनिया के विभिन्न सदस्य देशों में स्थापित एक सौ तीस से अधिक आधिकारिक संपर्क केंद्रों से सीधे जुड़ा हुआ है, जो इसे हर पल वास्तविक समय की जानकारी भेजते हैं। एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र का मुख्य कार्य केवल आपात स्थितियों की निगरानी करना नहीं है, बल्कि यह आपातकालीन तैयारियों के अंतर्राष्ट्रीय समन्वय का सबसे बड़ा मंच है।
यह वैश्विक केंद्र किसी भी संभावित दुर्घटना के होने से बहुत पहले ही सदस्य देशों की सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करने का काम शुरू कर देता है। एजेंसी विभिन्न देशों को अपनी आंतरिक क्षमताएं विकसित करने में मदद करती है, ताकि किसी भी अप्रत्याशित आपातकाल या विकिरण के खतरे के समय वे नागरिकों और पर्यावरण की रक्षा कर सकें। हालांकि परमाणु सुरक्षा की अंतिम जिम्मेदारी हमेशा संबंधित देशों की सरकारों की ही होती है, लेकिन यह वैश्विक संस्था उनके नियामक ढांचे को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाती है।
"परमाणु सुरक्षा की मुख्य जिम्मेदारी पूरी तरह से संबंधित राष्ट्र राज्यों पर होती है, लेकिन हम सदस्य देशों को नियामक ढांचा और आपात स्थिति से निपटने की क्षमता स्थापित करने में मदद करते हैं ताकि वे इसके दुष्प्रभावों को कम करके जनता की रक्षा कर सकें।" : अमगाद शोक्र, निदेशक, इंसिडेंट एंड इमरजेंसी सेंटर, आईएईए
तकनीकी जांच और समन्वय
जब भी दुनिया में कहीं कोई परमाणु घटना घटित होती है, तो यह केंद्र एक बेहद सुव्यवस्थित और स्थापित प्रणाली के साथ तुरंत एक्शन में आ जाता है। यह चौबीसों घंटे काम करने वाले राष्ट्रीय संपर्क बिंदुओं से सभी प्रामाणिक डेटा एकत्र करता है और तकनीकी मूल्यांकन करता है। इस प्रक्रिया के माध्यम से यह देखा जाता है कि घटना का भविष्य में क्या प्रभाव हो सकता है और क्या इससे पर्यावरण में किसी प्रकार के हानिकारक रेडियोलॉजिकल परिणाम सामने आ सकते हैं।
यदि कोई प्रभावित देश सुरक्षा के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहायता की मांग करता है, तो यह केंद्र विकिरण सुरक्षा और सटीक मूल्यांकन के लिए तुरंत अंतरराष्ट्रीय टीमों को तैनात कर देता है। अतीत में हुए फुकुशिमा संकट के दौरान भी यह केंद्र लगातार चौवन दिनों तक पूरी तरह सक्रिय मोड में काम कर रहा था। परमाणु दुर्घटनाओं के सीमा पार होने वाले दुष्प्रभावों को रोकने के लिए यह प्रणाली अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि विकिरण हवा के साथ दूसरे देशों में भी आसानी से फैल सकता है।
"भारत का परमाणु प्रतिष्ठानों के संचालन में एक बहुत लंबा और समृद्ध इतिहास रहा है। उनके पास एक मजबूत कानूनी ढांचा, सक्षम नियामक और ऑपरेटर मौजूद हैं, और एजेंसी के साथ उनका सहयोग लगातार बेहतरीन बना हुआ है।" : अमगाद शोक्र, निदेशक, इंसिडेंट एंड इमरजेंसी सेंटर, आईएईए
भविष्य की मजबूत तैयारी
वियना में बैठे इस वैश्विक प्रहरी ने साफ किया है कि भारत भले ही अपनी न्यूक्लियर क्षमता को तेजी से बढ़ा रहा है, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय निगरानी तंत्र भारत के साथ मिलकर लगातार काम करता रहेगा। भारतीय अधिकारी परमाणु आपातकालीन तैयारी ढांचे के साथ पूरी तरह एकीकृत हैं और वैश्विक एजेंसी के साथ सक्रिय समन्वय बनाए हुए हैं। इंसिडेंट एंड इमरजेंसी सेंटर की यह अनूठी टीम बिना किसी प्रचार के पूरी दुनिया की परमाणु सुरक्षा पर बाज जैसी पैनी नजर रखती है। इसी के चलते यह निगरानी तंत्र किसी भी देश का परमाणु सुरक्षा का रिकॉर्ड बताने में सक्षम है।
बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के बीच भारत के परमाणु सुरक्षा का रिकॉर्ड बेदाग होना वैश्विक मंच पर देश की साख को और अधिक मजबूत करता है। आने वाले समय में जब देश सौ गीगावाट की बड़ी क्षमता की ओर कदम बढ़ाएगा, तब आईएईए का यह निरंतर सहयोग और भारत की अपनी मजबूत नियामक व्यवस्था सुरक्षा की सबसे बड़ी गारंटी बनेगी। वियना के इस मूक प्रहरी की सतर्कता यह सुनिश्चित करती है कि परमाणु ऊर्जा का विस्तार हमेशा सुरक्षित और मानव कल्याण के दायरे में ही हो। भारत ने जो बेदाग़ परमाणु सुरक्षा का रिकॉर्ड बनाया है वह आगे भी कायम रहे।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। देश की परमाणु ऊर्जा नीतियों एवं सुरक्षा मानकों से संबंधित अधिकृत विवरण के लिए सरकारी विज्ञप्तियों को ही आधार बनाएं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।