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राष्ट्रीय

भारत पहुंचा गैस का पहला जहाज, सुरक्षित ऊर्जा आपूर्ति संकट टला 

खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग के थमने से व्यापारिक गलियारा खुल गया है जिससे देश के सामने मंडरा रहा सुरक्षित ऊर्जा आपूर्ति का संकट दूर हो गया

By अजय त्यागी
1 min read
पहला विशाल टैंकर सफलतापूर्वक भारत के तट पर पहुंच गया

पहला विशाल टैंकर सफलतापूर्वक भारत के तट पर पहुंच गया

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नई दिल्ली, भारत। वैश्विक भू-राजनीति के मोर्चे पर भारत के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच पिछले काफी समय से जारी भीषण सैन्य खींचतान और युद्ध जैसी परिस्थितियां आखिरकार शांत हो गई हैं। इसके साथ ही दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील समुद्री व्यापारिक मार्ग माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ब्लॉकेड यानी पूरी तरह से पाबंदी हटा दी गई है। इस खाड़ी गलियारे के दोबारा खुलते ही प्राकृतिक गैस से लदा पहला विशाल टैंकर सफलतापूर्वक भारत के तट पर पहुंच गया है, जिससे देश में मंडरा रहा सुरक्षित ऊर्जा आपूर्ति का संकट फिलहाल टल गया है। [विडियो]

पिछले करीब एक सौ दस दिनों से खाड़ी क्षेत्र में जारी भारी गतिरोध के चलते भारत को ईंधन और गैस की कमी का अंदेशा सता रहा था। लेकिन इस अहम समुद्री रास्ते के दोबारा सुचारू होने से न केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिरता आएगी, बल्कि भारत को ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर बड़ी ताकत मिलेगी। प्राकृतिक गैस के इस पहले शिपमेंट के भारतीय बंदरगाह पर सुरक्षित आगमन को घरेलू उद्योगों और आम उपभोक्ताओं के लिए एक बेहद सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

राहत की बड़ी खेप

लिक्विफाइड नेचुरल गैस यानी एलएनजी से पूरी तरह लदा यह पहला विशाल व्यावसायिक जहाज गुरुवार को गुजरात के भरूच जिले में स्थित दहेज एलएनजी टर्मिनल पर पहुंच गया है। प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक यह जहाज़ी बेड़ा अपने साथ कुल बासठ हजार तीन सौ सत्तर मीट्रिक टन लिक्विफाइड नेचुरल गैस लेकर आया है। इतनी बड़ी मात्रा में गैस की खेप समय पर पहुंचने से भारतीय गैस वितरण कंपनियों और बिजली संयंत्रों को आने वाले दिनों में सुरक्षित ऊर्जा आपूर्ति उपलब्धता सुनिश्चित करने में बड़ी कामयाबी मिलेगी।

इस संकट के टलने के पीछे अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के स्तर पर हुए बड़े प्रयासों को मुख्य वजह माना जा रहा है। ईरान की शीर्ष सुरक्षा संस्था ने जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तमाम व्यापारिक जहाजों के आवागमन से जुड़ी अपीलों और प्रशासनिक अड़चनों को तुरंत प्रभाव से निपटाने का एक कड़ा सरकारी आदेश जारी किया है। तेहरान और वाशिंगटन के बीच हाल ही में व्यापारिक सुरक्षा को लेकर हस्ताक्षरित हुए एक विशेष समझौता ज्ञापन यानी एमओयू के ठीक बाद यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है।

वैश्विक समझौते का असर

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने आधिकारिक तौर पर यह ऐलान किया है कि होर्मुज जलमार्ग से जुड़े जहाजों के सुचारू आवागमन को लेकर नियमों में कई बड़े और ऐतिहासिक बदलाव किए जा रहे हैं। यह महत्वपूर्ण बयान अंतरराष्ट्रीय मीडिया में उस समय जारी किया गया जब ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नए एमओयू पर इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्ताक्षर किए। इस समझौते के लागू होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में अप्रत्याशित उछाल की आशंका भी अब काफी हद तक खत्म हो गई है।

इस महत्वपूर्ण समझौते के तहत दुनिया भर के व्यापारिक जहाजों के होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने पर अगले साठ दिनों तक किसी भी प्रकार का कोई अतिरिक्त शुल्क या टैक्स नहीं लिया जाएगा। ईरान की सरकार ने इस पूरी अवधि के दौरान होने वाले सभी संबंधित प्रशासनिक और परिचालन खर्चों का वहन खुद करने का बड़ा भरोसा दिया है। इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों को अब केवल अपने सुरक्षा अनुरोध पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी यानी पीजीएसए को ऑनलाइन भेजने होंगे।

परिवहन व्यवस्था में सुधार

ईरानी प्रशासन ने वैश्विक समुदाय को यह पुख्ता आश्वासन दिया है कि संवेदनशील जलडमरूमध्य क्षेत्र में जहाजों के यातायात को धीरे-धीरे सुरक्षित तरीके से बढ़ाया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया के सभी जरूरी तकनीकी और कार्यान्वयन संबंधी विस्तृत नियम एवं दिशा-निर्देश आने वाले दिनों में पीजीएसए द्वारा आधिकारिक तौर पर जारी किए जाएंगे। इस समझौते से भारत जैसे विकासशील देशों को अपनी विकास दर बनाए रखने और सुरक्षित ऊर्जा आपूर्ति का संकट दूर करने में सबसे बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है।

घरेलू स्तर पर इस बड़ी कूटनीतिक जीत को भारत की आर्थिक सुरक्षा के लिए बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि भारत अपनी जरूरत की अधिकांश प्राकृतिक गैस और कच्चा तेल खाड़ी देशों से ही आयात करता है। यदि यह जलमार्ग लंबे समय तक बंद रहता, तो देश के भीतर सुरक्षित ऊर्जा आपूर्ति का संकट काफी गहरा सकता था। विशेषज्ञों का मानना है कि अब उद्योगों को निरंतर गैस मिलती रहेगी, जिससे विनिर्माण क्षेत्र और अर्थव्यवस्था को वैश्विक मंदी के इस दौर में भी नई रफ्तार और मजबूती मिलेगी।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। खाड़ी देशों के व्यापारिक मार्ग, अंतरराष्ट्रीय गैस आयात नीति और देश की ईंधन सुरक्षा से जुड़े आधिकारिक एवं अद्यतन विवरण के लिए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का अवलोकन करें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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