WA Join our WhatsApp Group
Advertisement Advertisement
View in Newspaper Form

डीएपी की भारी कमी से मची मारामारी, खाद संकट से जूझते किसान

खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही हाड़ौती क्षेत्र में फर्टिलाइजर की भारी कमी देखी जा रही है जिससे यहाँ खाद संकट से जूझते किसान बेहद परेशान हैं।

By अजय त्यागी
1 min read
Advertisement002309202602.jpg advertisement13Aug2026%20copy.jpg वितरण काउंटर पर कतार में खड़े किसान

वितरण काउंटर पर कतार में खड़े किसान

कोटा, राजस्थान। मानसून की पहली बारिश के साथ ही कोटा संभाग में खरीफ फसलों की बुवाई का काम तेजी से शुरू होने वाला है। इस महत्वपूर्ण समय में खेतों को पूरी तरह तैयार कर चुके अन्नदाताओं के सामने फर्टिलाइजर की अनुपलब्धता एक बड़ी मुसीबत बनकर खड़ी हो गई है। वैश्विक युद्ध और अंतरराष्ट्रीय कारणों से विदेशों से होने वाले आयात में आई भारी गिरावट के चलते इस बार आवंटन में करीब 21 प्रतिशत की बड़ी कटौती की गई है। हाड़ौती के चारों जिलों में मांग की तुलना में बेहद कम आपूर्ति होने से सहकारी समितियों और दुकानों पर खाद संकट से जूझते किसान लंबी कतारों में लगने को मजबूर हैं।[1]

बारां जिले के छबड़ा और छीपाबड़ौद इलाके में हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक बने हुए हैं, जहां खाद की किल्लत को लेकर हाल ही में उग्र आंदोलन और चक्काजाम भी देखा गया। छबड़ा में खाद आने की भनक लगते ही दूर-दराज के गांवों से हजारों की संख्या में महिला और पुरुष किसान रात के सन्नाटे में ही कतारों में लग गए। भीड़ को अनियंत्रित होने से बचाने के लिए स्थानीय प्रशासन को पुलिस बल की तैनाती कर एक खेल स्टेडियम में कतारें लगवानी पड़ीं। कई घंटों के लंबे इंतजार के बाद प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा खाद संकट से जूझते किसान को वितरित टोकन के जरिए प्रति किसान को महज दो-दो बैग खाद ही उपलब्ध कराया जा सका।

खेती पर सीधा असर

हाड़ौती संभाग में इस सीजन के दौरान सोयाबीन, धान, मक्का और उड़द जैसी प्रमुख फसलों की बुवाई करीब 12 लाख हेक्टेयर के विशाल भूभाग में की जानी प्रस्तावित है। इस बड़े लक्ष्य के विपरीत डीएपी खाद की मांग एक लाख छह हजार मीट्रिक टन के मुकाबले सरकार द्वारा केवल 75 हजार मीट्रिक टन ही आवंटित की गई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बुवाई के ऐन वक्त पर फर्टिलाइजर की यह भारी कमी उत्पादन को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकती है, जिससे इस भीषण खाद संकट से जूझते किसान अपनी फसलों के भविष्य को लेकर भारी चिंता में डूबे हैं।

खाद के लिए स्टेडियम में लाइन लगा कर बैठे किसान

दूसरी तरफ विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि संभाग में कुल चार लाख पचास हजार मीट्रिक टन फर्टिलाइजर की जरूरत के मुकाबले अब तक दो लाख पैंतालीस हजार मीट्रिक टन की आपूर्ति पॉस मशीनों के स्टॉक सहित की जा चुकी है। हालांकि कालाबाजारी की शिकायतों के बीच निजी विक्रेताओं और सोसायटियों के पास वर्तमान में मात्र 9700 मीट्रिक टन डीएपी का स्टॉक ही शेष बचा हुआ है। कृषि विभाग के अनुसार आगामी समय में नई रेलवे रैक आने के बाद ही वितरण व्यवस्था में कुछ सुधार होने की उम्मीद की जा सकती है।

"हाड़ौती में डीएपी का आवंटन करीब 30 हजार मीट्रिक टन कम हुआ है, फिर भी हम यूरिया और सिंगल सुपर फॉस्फेट के पर्याप्त स्टॉक के जरिए प्रबंधन का प्रयास कर रहे हैं और जल्द ही अगली रैक से आपूर्ति बढ़ाई जाएगी।" : अशोक कुमार शर्मा, अतिरिक्त निदेशक, कृषि विभाग कोटा संभाग

वैकल्पिक कृषि उपाय

फर्टिलाइजर की इस भारी मारामारी के बीच कृषि विभाग के तकनीकी विशेषज्ञ किसानों को डीएपी के वैज्ञानिक विकल्पों को अपनाने की निरंतर सलाह दे रहे हैं। कृषि अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में सिंगल सुपर फॉस्फेट का आवंटन उम्मीद से दोगुना किया गया है जो बाजारों में पर्याप्त मात्रा में मौजूद है। यदि किसान तीन बैग एसएसपी के साथ एक बैग यूरिया खाद को आपस में मिलाकर खेतों में छिड़काव करते हैं, तो वह फसलों के लिए हुबहू रासायनिक डीएपी के बराबर ही असरदार साबित होता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस वैकल्पिक मिश्रण में नाइट्रोजन और फास्फोरस के साथ-साथ पौधों के लिए बेहद जरूरी कैल्शियम और सल्फर की मात्रा भी प्रचुरता में पाई जाती है। इसके साथ ही प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे पूरे सीजन की खाद एक साथ जमा करने के बजाय जरूरत के अनुसार ही खरीदारी करें। फिलहाल जमीनी हकीकत यही है कि दूर-दराज से आने वाले जरूरतमंदों को महज दो बैग से ही संतोष करना पड़ रहा है और खेतों की बुवाई के बीच खाद संकट से जूझते किसान तंत्र की व्यवस्थाओं को कोस रहे हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। कोटा संभाग में खाद की उपलब्धता, पॉस मशीनों के लाइव स्टॉक, टोकन वितरण और आगामी रैक के आगमन से जुड़े किसी भी प्रामाणिक विवरण के लिए राजस्थान कृषि विभाग और स्थानीय जिला प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं को ही अंतिम आधार मानें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

Rex TV Verification Metrics
Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
Source Source