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टेलीग्राम बैन को भी दिया चकमा! NEET का फर्जी पेपर बेचने वाला गिरफ्तार

भीलवाड़ा में री-नीट परीक्षा से ठीक पहले टेलीग्राम पर पाबंदी के बावजूद वीपीएन से ठगी का जाल बुनकर NEET का फर्जी पेपर बेचने वाला गिरफ्तार कर लिया गया है।

By अजय त्यागी
1 min read
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी

पुलिस की गिरफ्त में आरोपी

भीलवाड़ा, राजस्थान। देश की सबसे बड़ी री-नीट परीक्षा के आयोजन से ठीक पहले राजस्थान पुलिस ने एक बहुत बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए सोशल मीडिया के माध्यम से ऑनलाइन ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। जिले के प्रतापनगर थाना क्षेत्र में गुरुवार की मध्यरात्रि को री-नीट परीक्षा का बोगस पेपर ऑनलाइन बेचने के आरोप में पुलिस टीम ने एक शातिर युवक को धर दबोचा है। भीलवाड़ा एसपी सागर राणा के सख्त निर्देश पर गठित विशेष पुलिस टीम ने पटेल नगर स्थित एक संदिग्ध ठिकाने पर अचानक छापा मारकर इस कार्रवाई को अंजाम दिया, जिसके बाद तकनीकी माध्यमों से युवाओं को ठगने वाला यह मुख्य NEET का फर्जी पेपर विक्रेता पकड़ा गया। [1]

पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए चुरू जिले के रावतसर के मूल निवासी उन्नीस वर्षीय आरोपी आकाश चौधरी को रंगे हाथों पकड़ा है, जो इस समय जयपुर में रहकर एयरपोर्ट भर्ती परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग कर रहा था। आरोपी को शुक्रवार दोपहर अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या दो की अदालत में पेश किया गया जहां से उसे बाईस जून तक के लिए पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। पुलिस टीम अब आरोपी से कड़ाई से पूछताछ कर रही है ताकि इस पूरे फर्जीवाड़े के नेटवर्क से जुड़े अन्य मास्टरमाइंड और इसमें शामिल सहयोगियों का जल्द से जल्द पता लगाया जा सके।

साइबर नेटवर्क का खुलासा

पुलिस की प्राथमिक जांच में यह चौंकाने वाला सच सामने आया है कि आरोपी ने भारत में टेलीग्राम पर लगी पाबंदियों को चकमा देने के लिए एक विशेष प्रॉक्सी वीपीएन तकनीक का सहारा लिया था। इस वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क की मदद से उसने एक गुप्त ऑनलाइन ग्रुप तैयार किया था जिसमें करीब चौवन सदस्यों को जोड़ा गया था। इस ग्रुप के माध्यम से वह री-नीट परीक्षा में बैठने वाले भोले-भाले परीक्षार्थियों को अपने जाल में फंसाता था और उन्हें परीक्षा पास कराने के नाम पर झूठे दावे करके झांसा देता था जिससे अंततः NEET का फर्जी पेपर गिरोह बेनकाब हुआ।

आरोपी परीक्षार्थियों से डिजिटल माध्यम से प्रति प्रश्नपत्र दो हजार रुपये से लेकर चार हजार रुपये तक की मोटी रकम वसूल रहा था। जांच टीम को आरोपी के बैंक खाते में अब तक करीब अठारह हजार रुपये जमा होने के पुख्ता डिजिटल सबूत मिले हैं, जो उसने हाल ही में चार से पांच परीक्षार्थियों को झांसा देकर हड़पे थे। पुलिस को इस पूरे अवैध काम में आरोपी के एक नाबालिग छोटे भाई की भूमिका भी पूरी तरह संदिग्ध लग रही है जिसके बारे में डिजिटल फॉरेंसिक डेटा की मदद से बारीकी से जांच की जा रही है।

"हमें आई-मेक पोर्टल के माध्यम से बेहद गोपनीय और सटीक सूचना मिली थी कि कुछ असामाजिक तत्व वीपीएन का प्रयोग कर सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं, जिस पर प्रतापनगर थाना प्रभारी की टीम ने दबिश देकर आरोपी को पकड़ा है और निष्पक्ष परीक्षा के लिए हमारी टीम पूरी तरह मुस्तैद है।" : नेमीचंद चौधरी, सदर डीवाईएसपी भीलवाड़ा

आगामी पुलिस कार्रवाई

आगामी इक्कीस जून को देशव्यापी स्तर पर आयोजित होने वाली इस महत्वपूर्ण परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन किसी भी प्रकार की कोताही बरतने के मूड में नहीं है। पुलिस महानिदेशक और जिला पुलिस अधीक्षक के स्तर से सभी केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और साइबर सर्विलांस के निर्देश पहले ही जारी किए चुके हैं। पुलिस की साइबर सेल टीम अब उन सभी परीक्षार्थियों और युवाओं की सूची तैयार कर रही है जिन्होंने इस आरोपी के बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर किए थे और इस NEET का फर्जी पेपर खरीदने का प्रयास किया था।

पकड़े गए शातिर अपराधी के मोबाइल फोन और लैपटॉप को पुलिस ने अपने कब्जे में लेकर तकनीकी विश्लेषण के लिए फॉरेंसिक लैब भेज दिया है। इसके अलावा यह भी पड़ताल की जा रही है कि क्या वह पहले भी किसी अन्य भर्ती परीक्षा के फर्जीवाड़े में शामिल रहा है या नहीं। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि रिमांड के दौरान इस मामले में कई अन्य चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं क्योंकि इस बड़े रैकेट से जुड़ा NEET का फर्जी पेपर बेचने वाला मुख्य सरगना अब सलाखों के पीछे पहुंच चुका है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। भीलवाड़ा री-नीट बोगस पेपर मामले की अदालती कार्रवाई, पुलिस रिमांड के विवरण और जांच के आगामी निष्कर्षों से संबंधित किसी भी प्रामाणिक विवरण के लिए राजस्थान पुलिस और स्थानीय जिला प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं को ही अंतिम आधार मानें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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