बिना FIR डराकर वसूली! घूसखोर कांस्टेबल की गिरफ्तारी, मचा हड़कंप
कोटा में एसीबी ने उद्योग नगर थाने के घूसखोर कांस्टेबल (ड्राइवर) को सात हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
आरोपी चालक कांस्टेबल हरिओम
कोटा, राजस्थान। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने पुलिस महकमे में शुद्धीकरण अभियान के तहत एक बड़ी और औचक कार्रवाई को अंजाम देते हुए घूसखोर कांस्टेबल को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पीड़ित को एक झूठी शिकायत का डर दिखाकर अवैध रूप से मोटी रकम वसूल रहा था। इस सफल ट्रैप कार्रवाई के बाद से ही पूरे पुलिस महकमे और भ्रष्ट कर्मियों में हड़कंप मच गया है।
परिवादी के खिलाफ हुई शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं करने की एवज में उसने सात हजार रुपए की रिश्वत ली थी। हालांकि इससे पहले भी वह पीड़ित को बुरी तरह डरा-धमकाकर उसकी जेब से जबरन पांच हजार रुपए निकाल चुका था। पीड़ित के खिलाफ उसके पड़ोसियों ने केवल एक पेड़ काटने की सामान्य शिकायत दी थी, लेकिन आरोपी ने इसे बड़ा मामला बनाकर डराना शुरू कर दिया था। [1]
सफल ट्रैप कार्रवाई
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय स्वर्णकार ने बताया कि कोटा शहर पुलिस लाइन के चालक कांस्टेबल हरिओम को सात हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोचा गया है। आरोपी हरिओम की वर्तमान में उद्योग नगर थाने में ड्यूटी लगी हुई थी और एसीबी की विशेष टीम ने उसे थाने के ठीक बाहर से ही योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप किया। इस औचक कार्रवाई से आरोपी को संभलने का मौका नहीं मिला।
एएसपी स्वर्णकार ने बताया कि आरोपी हरिओम एक सीधे-साधे पीड़ित को डरा-धमका कर उससे लगातार पैसे वसूल रहा था। इस मामले में झूठे परिवाद को रफा-दफा करने की एवज में पीड़ित को थाने पर बुलाकर पंद्रह हजार रुपए की कुल मांग की गई थी। इस डराने-धमकाने के दौरान परिवादी की जेब से पांच हजार रुपए भी आरोपी ने जबरन निकाल लिए थे और बाकी पैसों के लिए लगातार दबाव बना रहा था जिसके चलते इस घूसखोर कांस्टेबल को दबोचने का ताना-बाना बुना गया।
एसीबी की तफ्तीश
पीड़ित ने परेशान होकर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को इस प्रताड़ना की गोपनीय शिकायत दे दी थी। इस मामले में पंद्रह जून को गोपनीय सत्यापन कराया गया था, जिसमें सामने आया कि आरोपी हरिओम आठ हजार रुपए लेने पर सहमत हो गया था। सत्यापन के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने गुरुवार रात को इस सफल ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया, जिसके तहत थाने के बाहर से ही आरोपी को दबोचा गया।
एसीबी की टीम तत्काल घूसखोर कांस्टेबल हरिओम को गिरफ्तार कर नयापुरा स्थित एसीबी चौकी लेकर गई थी, जहां पर मध्य रात्रि के बाद तक कागजी कार्रवाई चलती रही। इसके साथ ही आरोपी के पुलिस लाइन स्थित आवास पर भी सर्च ऑपरेशन के लिए एक अलग टीम भेजी गई थी। एसीबी के अधिकारी अब आरोपी की संपत्ति और उसके पुराने रिकॉर्ड को खंगालने में जुटे हैं ताकि इस मामले में कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
"इस मामले में ना तो कोई एफआईआर दर्ज है ना कोई परिवाद थाने पर पेंडिंग है, जिससे साफ है कि आरोपी हरिओम बिना एफआईआर और परिवाद के ही डरा धमका पैसे वसूल रहा था" : मांगेलाल यादव, थाना अधिकारी, उद्योग नगर थाना
अवैध वसूली का सच
थाना अधिकारी के इस चौंकाने वाले बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि आरोपी कानून की धज्जियां उड़ाकर अपनी जेबें भर रहा था। थाने में किसी भी प्रकार का रिकॉर्ड न होने के बावजूद उसने केवल एक आपसी विवाद को ढाल बनाया। पुलिस विभाग के एक जिम्मेदार पद पर रहते हुए इस तरह की घिनौनी अवैध वसूली ने खाकी की छवि को धूमिल किया है, जिसके बाद अब कोर्ट और विभाग की ओर से सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने आम जनता से भी अपील की है कि यदि कोई भी लोक सेवक किसी कार्य के बदले रिश्वत की मांग करता है, तो तुरंत ब्यूरो को सूचित करें। इस बड़ी कार्रवाई के बाद कोटा संभाग के अन्य थानों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। इस तरह के मामलों में त्वरित एक्शन से जनता का कानून और भ्रष्टाचार निरोधक तंत्र पर भरोसा और अधिक मजबूत हुआ है और इस घूसखोर कांस्टेबल की करतूत के बाद विभाग आगे सतर्क रहेगा।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। कोटा एसीबी की इस ट्रैप कार्रवाई की विधिक रिपोर्ट, आरोपी की विभागीय जांच और न्यायालय के अंतिम फैसलों से संबंधित किसी भी प्रामाणिक विवरण के लिए स्थानीय पुलिस प्रशासन एवं एसीबी द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं को ही अंतिम आधार मानें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।