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अंतरराष्ट्रीय

आसमान में दिखा काले धुएं का गुबार, रिफाइनरी पर भीषण ड्रोन हमला

रिफाइनरी पर भीषण ड्रोन हमला होने के बाद तेल भंडारण टैंक का विशाल ढक्कन उड़ गया, जिससे पूरे क्षेत्र में तेल संकट गहरा गया है।

By अजय त्यागी
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रिफाइनरी पर भीषण ड्रोन हमला

रिफाइनरी पर भीषण ड्रोन हमला

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मास्को, रूस। रूसी हवाई सुरक्षा को चकमा देकर यूक्रेनी ड्रोनों ने गुरुवार को लगातार दूसरी बार एक प्रमुख तेल रिफाइनरी को अपना निशाना बनाया। इस हमले के बाद वहां एक भयंकर आग लग गई, जिसने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया और आसमान में काले धुएं का विशाल गुबार छा गया। धमाका इतना जोरदार था कि तेल भंडारण टैंक का एक विशाल डिस्क के आकार का ढक्कन उड़ गया। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस हमले के बाद राजधानी में रिफाइनरी पर भीषण ड्रोन हमला चर्चा का मुख्य विषय बन गया है। [विडियो]

यह हमला यूक्रेनी सेना के उस व्यापक अभियान का हिस्सा है जिसका उद्देश्य तेल उद्योग को पंगु बनाना है। यूक्रेन का मानना है कि इसी तेल उद्योग से मिलने वाले राजस्व के जरिए युद्ध के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधनों की आपूर्ति की जाती है। क्रेमलिन से मात्र 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर बिना किसी डर के किए गए इस हमले ने आम नागरिकों को भी सकते में डाल दिया है, जिससे युद्ध की विभीषिका अब सीधे तौर पर महसूस होने लगी है। [1]

राजधानी में मची अफरा-तफरी

रिफाइनरी पर भीषण ड्रोन हमला होने के बाद पूरी राजधानी में सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया। सुरक्षा कारणों से मास्को के सभी हवाई अड्डों पर उड़ानों को तुरंत निलंबित कर दिया गया और रिफाइनरी के पास से गुजरने वाले व्यस्त राजमार्ग पर यातायात को पूरी तरह से रोक दिया गया। शहर के सबसे व्यस्त शेरेमेतिएवो हवाई अड्डे को एहतियातन खाली कराना पड़ा। ऑनलाइन चैट रूम में स्थानीय निवासियों ने शिकायत की कि इस रिफाइनरी पर भीषण ड्रोन हमला होने से पहले किसी भी तरह का सायरन नहीं बजाया गया और उन्हें कोई चेतावनी नहीं मिली।

रिफाइनरी के आसपास रहने वाले लोगों ने बताया कि आसमान से हुई तेल की बारिश के कारण उनकी कारों और खिड़कियों पर तेल के काले धब्बे जमा हो गए हैं। इस हमले के व्यापक आर्थिक प्रभाव के रूप में देश के कई हिस्सों में पेट्रोल और डीजल की भारी किल्लत पैदा हो गई है। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक होने के बावजूद रूस को अब अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए समुद्र के रास्ते ईंधन का आयात करने पर मजबूर होना पड़ रहा है।

"आज सुबह मास्को के नागरिकों द्वारा पूछा जा रहा सबसे आम सवाल यह है कि आखिर क्या चल रहा है। मैं जवाब दे सकता हूं कि आपके देश ने हमारे खिलाफ आक्रामक युद्ध शुरू किया था और वर्षों से हमारे लोगों को मारा। अब जब आप जान गए हैं कि क्या हो रहा है, तो पुतिन से पूछें कि वह इसे कब खत्म करेंगे।" : अंद्री सिबिहा, विदेश मंत्री, यूक्रेन

रणनीतिक और आर्थिक प्रभाव

यूक्रेन का कहना है कि रूस के अंदर गहरे क्षेत्रों में किए जा रहे ये हमले इस बात का अकाट्य प्रमाण हैं कि अब युद्ध का रुख बदल रहा है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने फ्रांस में आयोजित एक शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य G7 नेताओं के सामने भी इस सैन्य सफलता का मजबूती से उल्लेख किया था। हालांकि, क्रेमलिन के एक शीर्ष सहयोगी ने युद्ध की स्थिति यूक्रेन के पक्ष में बदलने के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

दूसरी तरफ, रूसी अधिकारियों ने राजधानी में पेट्रोल की स्थिति को सामान्य बताया है, लेकिन संघीय एंटी-मोनोपॉली वॉचडॉग ने एक बड़े खुदरा विक्रेता से जवाब मांगा है कि उसने पिछले सप्ताह के दौरान ईंधन की कीमतों में 19% की बढ़ोतरी क्यों की। युद्ध समर्थक ब्लॉगर्स ने उन लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है जिन्होंने जलती हुई रिफाइनरी के वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किए थे। उनके अनुसार, ऐसे वीडियो देखकर दुश्मन अपनी रणनीतियों में बदलाव करता है, जो देश के साथ सीधे तौर पर गद्दारी है।

फीडबैक और सुरक्षा व्यवस्था

इस सैन्य टकराव के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और डिजिटल मोर्चे पर भी जंग तेज हो गई है। रूस के भीतर बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ यूक्रेन इस मनोवैज्ञानिक बढ़त का फायदा उठाकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अधिक सैन्य सहायता जुटाने की कोशिश में लगा हुआ है। इस तरह रिफाइनरी पर भीषण ड्रोन हमला यह साबित करता है कि आधुनिक युद्ध में ड्रोनों की भूमिका कितनी अधिक विनाशकारी और निर्णायक हो सकती है।

आगामी दिनों में रूस अपनी वायु रक्षा प्रणालियों को और अधिक मजबूत करने के लिए नए कदम उठा सकता है, क्योंकि इस तरह के हमलों से उसकी आर्थिक रीढ़ पर सीधा प्रहार हो रहा है। मास्को जैसे सुरक्षित माने जाने वाले शहर के पास ईंधन संकट और बढ़ती कीमतों ने सरकार के दावों की पोल खोल दी है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यह रिफाइनरी पर भीषण ड्रोन हमला आने वाले समय में दोनों देशों के बीच जारी इस लंबे युद्ध को एक नए और अधिक हिंसक चरण में ले जा सकता है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। मास्को रिफाइनरी की वर्तमान परिचालन स्थिति, तेल आयात के आधिकारिक आंकड़ों, हवाई अड्डों की उड़ान समय-सारणी और दोनों देशों के सैन्य दावों से संबंधित किसी भी प्रामाणिक विवरण के लिए संबंधित देशों के रक्षा मंत्रालयों और आधिकारिक विमानन प्राधिकरणों द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं को ही अंतिम आधार मानें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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