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अंतरराष्ट्रीय

वार्ता से उपजा विरोधाभास, अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक समझौते की तैयारी

वाशिंगटन और तेहरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए बन रहे अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक समझौते से एक बड़ा आर्थिक और कूटनीतिक विरोधाभास पैदा हो रहा है।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

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दुबई, संयुक्त अरब अमीरात। वाशिंगटन और तेहरान के बीच जारी युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने के लिए इस समय एक महत्वपूर्ण सहमति बनती दिखाई दे रही है। हालांकि, इस शांति प्रक्रिया के बीच एक बड़ा विरोधाभास भी उभरकर सामने आया है। ईरान को इस संधि के नियमों का पालन करने के लिए दिए जाने वाले आर्थिक प्रोत्साहन उस विरोधी सैन्य बल को मजबूत कर सकते हैं, जिसे अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगी एक आतंकवादी संगठन मानते हैं। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस नए राजनीतिक घटनाक्रम के कारण आगामी अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक समझौते की राह में कई तरह की जटिलताएं पैदा हो रही हैं। [1]

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने पिछले कई वर्षों के दौरान प्रतिबंधों की आड़ में एक विशाल वाणिज्यिक साम्राज्य खड़ा कर लिया है। उनका यह व्यापारिक प्रभाव तेल और निर्माण कार्य से लेकर शिपिंग, दूरसंचार और बंदरगाहों तक फैला हुआ है। अब जब तेहरान और वाशिंगटन युद्ध को समाप्त करने के लिए बातचीत की मेज पर आ रहे हैं, तो यह विशिष्ट सैन्य बल इस पूरी प्रक्रिया से सबसे बड़ा आर्थिक लाभ उठाने वाला पक्ष बनकर उभर सकता है। इस स्थिति ने पश्चिमी देशों की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक समझौते की मूल भावना को प्रभावित कर सकता है।

विशाल वाणिज्यिक साम्राज्य

ईरान के 4 वरिष्ठ स्रोतों ने इस बात की पुष्टि की है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स प्रतिबंधों में ढील मिलने और तेल निर्यात शुरू होने से होने वाले वित्तीय लाभ का एक बड़ा हिस्सा हासिल करने के लिए सबसे मजबूत स्थिति में हैं। व्यापारिक जगत में उनकी इस मजबूत पकड़ के कारण ही दोनों देशों के बीच होने वाले अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक समझौते में बाधा आ सकती है। इस बल की आतंकी संगठन वाली छवि के कारण वैश्विक निवेशकों के लिए ईरान की अर्थव्यवस्था में सीधे निवेश करना बेहद कानूनी पेचीदगियों भरा साबित होने वाला है।

इस विशिष्ट सैन्य बल की स्थापना दिवंगत क्रांतिकारी नेता अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी ने की थी, जिसके बाद अयातुल्ला अली खामेनेई के कार्यकाल में इसका तेजी से विस्तार हुआ। इस साल 28 फरवरी को खामेनेई की मौत के बाद शुरू हुए युद्ध के बीच इस बल ने आंतरिक रूप से अपनी शक्ति को और अधिक मजबूत कर लिया है। उन्होंने खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सर्वोच्च नेता स्थापित करने में मदद की है और वर्तमान समय में वे युद्ध को रोकने से जुड़े फैसलों का समर्थन कर रहे हैं।

"ईरान के तेल क्षेत्र के पीछे असल में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ही सभी मोहरों को नियंत्रित कर रहे हैं, इसलिए आप उनके साथ व्यापार करने के कानूनी प्रभावों को नजरअंदाज नहीं कर सकते। वाशिंगटन के साथ अंतरिम व्यवस्था के तहत तेल निर्यात की अनुमति मिलने के बाद भी अमेरिकी कंपनियों के लिए कानूनी जोखिम बरकरार रहने वाले हैं।" : जेरेमी पैनेर, पूर्व प्रतिबंध अन्वेषक, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग

आर्थिक और कानूनी पेचीदगियां

ईरान के विस्थापित निवेश कानूनों के अनुसार विदेशी कंपनियों को अनिवार्य रूप से स्थानीय भागीदारों के साथ मिलकर काम करना पड़ता है। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़ी फ्रंट कंपनियों की भारी संख्या को देखते हुए वे संभावित निवेशकों के लिए एक मुख्य प्रवेश द्वार बन चुके हैं। ऐसे में ईरान के बाजारों में लौटने वाली पश्चिमी कंपनियों को सीधे तौर पर इस बल से जुड़ी संस्थाओं के साथ काम करना पड़ सकता है, जिससे उन पर अमेरिकी प्रतिबंधों के उल्लंघन का खतरा मंडराता रहेगा।

अगर आगामी समय में कोई व्यापक सहमति नहीं बनती है, तो भी यह सैन्य बल अंतरिम तेल निर्यात छूट का पूरा लाभ उठाएगा। वर्ष 2018 में डोनाल्ड ट्रंप द्वारा परमाणु समझौते से हटने और प्रतिबंध कड़े करने के बाद उनके लिए अवैध नेटवर्क चलाना थोड़ा महंगा जरूर हुआ था, लेकिन इस बार अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक समझौते के जरिए मिलने वाला 300 अरब डॉलर का पुनर्निर्माण कोष इस संगठन की वित्तीय ताकत को कई गुना बढ़ा सकता है, जो वैश्विक राजनीति का सबसे बड़ा विरोधाभास है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। वाशिंगटन और तेहरान के बीच जारी कूटनीतिक वार्ता, प्रतिबंधों के कानूनी नियमों, अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक संधियों और ईरान के आंतरिक राजनीतिक घटनाक्रमों से संबंधित किसी भी प्रामाणिक विवरण के लिए दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों और अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्राधिकरणों द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं को ही अंतिम आधार मानें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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