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प्रादेशिक

हड़ताल के दूसरे दिन भी परिवहन सेवा पूरी तरह ठप, जनता बेहाल

प्रशासन की अपीलों और एस्मा के बावजूद लगातार दूसरे दिन भी परिवहन सेवा पूरी तरह ठप होने से आम जनता बेहाल है और लोग वैकल्पिक साधनों पर निर्भर हैं।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

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मुंबई, महाराष्ट्र। महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री की भावुक अपीलों और बेहद कड़े आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (मेस्मा) को लागू किए जाने के बावजूद शनिवार को लगातार दूसरे दिन भी महानगर में परिवहन सेवा पूरी तरह ठप रही। बेस्ट (BEST) उपक्रम के कर्मचारियों की इस अड़ियल हड़ताल के कारण आर्थिक राजधानी की आम जनता को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, बस सेवाएं लगभग पूरी तरह निलंबित रहने से दफ्तर जाने वाले लोग, स्कूली छात्र, वरिष्ठ नागरिक और मरीज अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए बुरी तरह भटकते नजर आए। [1]

इस अप्रत्याशित हड़ताल के कारण मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेनों और मेट्रो स्टेशनों पर यात्रियों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा है। परिवहन विभाग की इस विफलता का सीधा असर सड़कों पर भी देखने को मिल रहा है, जहां ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों द्वारा मनमाना किराया वसूले जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कुछ अतिरिक्त प्रबंध जरूर किए हैं, लेकिन वे विशाल आबादी की तुलना में बेहद नाकाफी साबित हो रहे हैं।

यात्रियों की परेशानी

सार्वजनिक बसों के सड़कों से नदारद होने के कारण लाखों यात्रियों को लोकल ट्रेनों, मेट्रो सेवाओं, टैक्सियों, ऑटो-रिक्शा और ऐप-आधारित टैक्सियों पर निर्भर रहने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इन वैकल्पिक साधनों में भारी भीड़ होने के कारण लोगों को यात्रा करने में अत्यधिक समय और पैसा खर्च करना पड़ रहा है। संयुक्त कार्रवाई समिति के नेताओं ने स्पष्ट किया है कि जब तक प्रशासन उनकी मांगों पर कोई ठोस और लिखित निर्णय नहीं लेता, तब तक यह आंदोलन और उग्र रूप से जारी रहेगा।

बेस्ट उपक्रम मुंबई में उपनगरीय रेलवे नेटवर्क के बाद दूसरा सबसे बड़ा सार्वजनिक परिवहन प्रदाता माना जाता है। यह हर दिन अपने लगभग 2766 बसों के विशाल बेड़े के माध्यम से तकरीबन 25 लाख यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुँचाता है, लेकिन इस सामूहिक अवकाश के कारण परिवहन सेवा पूरी तरह ठप हो गई है। इनमें से अधिकांश बसें निजी ऑपरेटरों से वेट-लीज आधार पर ली गई हैं। इसके अतिरिक्त यह महत्वपूर्ण संस्था द्वीप शहर के 10 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को बिजली की आपूर्ति भी करती है।

"ठोस निर्णय के अभाव में हमने अपने इस आंदोलन को आगे भी जारी रखने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया है। जब तक हमारी लंबे समय से लंबित सातवें वेतन आयोग सहित अन्य न्यायसंगत मांगें पूरी नहीं की जातीं, तब तक कोई भी कर्मचारी काम पर वापस नहीं लौटेगा।" : उदय अंबोनकर, संयोजक, बेस्ट संयुक्त कामगार कृति समिति

विफल रही वार्ता

इस गंभीर गतिरोध को सुलझाने के लिए महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने शुक्रवार को नगर विकास विभाग के उच्च अधिकारियों और बेस्ट प्रशासन के साथ एक संयुक्त बैठक की थी। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के सीधे निर्देशों पर आयोजित की गई यह कूटनीतिक चर्चा पूरी तरह से बेनतीजा और निष्फल रही। औद्योगिक अदालत द्वारा कर्मचारियों को हड़ताल पर जाने से रोकने के अंतरिम आदेश के बावजूद यूनियनों ने इस प्रदर्शन को जारी रखा, जिससे परिवहन सेवा पूरी तरह ठप बनी हुई है।

हालांकि श्रमिक उत्कर्ष सभा और बेस्ट कामगार यूनियन जैसी कुछ प्रमुख कर्मचारी यूनियनों ने खुद को इस बड़े आंदोलन से पूरी तरह अलग कर लिया है। प्रशासन के तमाम दावों और प्रयासों के बावजूद शुक्रवार को कुल 2766 बसों में से केवल 48 बसें ही सड़कों पर संचालित हो सकीं। हड़ताली कार्यकर्ताओं द्वारा कई स्थानों पर पथराव करने और बसों को जबरन रोकने की घटनाओं के कारण सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई और बसों को डिपो में वापस लौटना पड़ा।

बेस्ट अधिकारियों के अनुसार, हड़ताल के पहले ही दिन प्रदर्शनकारियों द्वारा पथराव, चालकों को डराने-धमकाने, टायरों की हवा निकालने और बसों के शीशे तोड़ने की कम से कम 26 हिंसक घटनाएं दर्ज की गईं। इन हिंसक झड़पों के बाद डिपो की सुरक्षा व्यवस्था को काफी कड़ा कर दिया गया है। आने वाले दिनों में यदि सरकार और यूनियनों के बीच जल्द ही कोई समझौता नहीं होता है, तो आर्थिक राजधानी में यह परिवहन सेवा पूरी तरह ठप रहने से व्यापारिक गतिविधियों को बहुत बड़ा नुकसान होने की आशंका है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। बेस्ट (BEST) बसों की दैनिक संचालन समय-सारणी, सातवें वेतन आयोग के क्रियान्वयन की आधिकारिक स्थिति, मेस्मा (MESMA) के तहत कानूनी कार्रवाइयों और परिवहन विभाग के आगामी नीतिगत निर्णयों से संबंधित किसी भी प्रामाणिक विवरण के लिए महाराष्ट्र परिवहन मंत्रालय एवं बेस्ट प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं को ही अंतिम आधार मानें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरध्याय नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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