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कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट: आपूर्ति बढ़ने से दबाव बढ़ा

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल प्रवाह बहाल होने के संकेतों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक बार फिर उतार-चढ़ाव का दौर देखा जा रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल के परिवहन में आ रही क्रमिक वृद्धि है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ब्रेंट क्रूड वायदा में 0.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे यह 77.70 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। वहीं, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट भी 0.2 फीसदी फिसलकर 73.74 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है। [1]

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि पिछले कुछ दिनों में इस जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही में जो तेजी आई है, वह राजनयिक प्रगति का एक स्पष्ट संकेत है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के पीछे का यह प्रमुख कारक निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर रहा है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को लगभग दो मिलियन बैरल तेल लेकर दो बड़े क्रूड टैंकरों ने होर्मुज जलडमरूमध्य को पार किया, जो यह दर्शाता है कि आपूर्ति श्रृंखला धीरे-धीरे सामान्य होने की ओर अग्रसर है।

बाजार की चिंताएं

आपूर्ति बढ़ने के साथ ही बाजार में एक 'बेयरिश' रुख बना हुआ है। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच गहरा अविश्वास अभी भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। विश्लेषकों के अनुसार, इस शांति समझौते की सफलता अभी पूरी तरह सुनिश्चित नहीं है, जिसके कारण कीमतों में और अधिक सुधार आने में समय लग सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बीच मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक जमीनी स्तर पर स्थितियां पूरी तरह स्थिर नहीं हो जातीं, तब तक बाजार में संशय का माहौल बरकरार रहेगा।

इस संबंध में केसीएम ट्रेड के मुख्य बाजार विश्लेषक टिम वाटरर ने अपनी टिप्पणी में कहा:

"बाजार में अभी भी संदेह का एक बड़ा अंश विद्यमान है, जो वाशिंगटन और तेहरान के बीच गहरे अविश्वास से उत्पन्न हुआ है, जिससे यह संकेत मिलता है कि युद्ध-पूर्व तेल कीमतों पर वापसी में तत्काल के बजाय देरी की संभावना है।"

आपूर्ति की स्थिति

आपूर्ति की स्थिति का विश्लेषण करें तो अमेरिका के रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) में भी गिरावट दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले सप्ताह अमेरिका का भंडार 331.2 मिलियन बैरल तक गिर गया, जो जून 1983 के बाद का सबसे निचला स्तर है। हालांकि, बाजार में तेल की कुल उपलब्धता बढ़ने की उम्मीदें बनी हुई हैं क्योंकि शांति वार्ता के बाद से तनावपूर्ण माहौल में नरमी आई है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का यह रुझान इसी आपूर्ति सुधार का प्रत्यक्ष परिणाम है।

आने वाले दिनों में अमेरिकी कच्चा तेल, डिस्टिलेट और गैसोलीन इन्वेंट्री में कमी आने का अनुमान लगाया गया है, जो बाजार की अगली दिशा तय करेगा। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, स्पार्टा कमोडिटीज के अनुसंधान प्रमुख नील क्रॉस्बी ने कहा कि मौजूदा बाजार रुख तब तक बना रहेगा जब तक कि कोई बड़ा भू-राजनीतिक बदलाव नहीं होता। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का यह दौर स्पष्ट करता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में ऊर्जा सुरक्षा और शांति के प्रति बाजार की प्रतिक्रिया बेहद संवेदनशील है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। तेल बाजार की कीमतों में उतार-चढ़ाव एवं भू-राजनीतिक स्थितियां अंतरराष्ट्रीय बाजार के अधीन हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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