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अंतरराष्ट्रीय

ईरान शांति समझौता: खाड़ी देशों में बढ़ी चिंता, सुरक्षा पर सवाल

खाड़ी देशों के लिए ईरान शांति समझौता अमेरिकी कूटनीति की एक बड़ी परीक्षा बन गया है, क्योंकि क्षेत्रीय नेता इस सौदे को अपनी सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा मान रहे हैं।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

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अबू धाबी, संयुक्त अरब अमीरात। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो इस सप्ताह खाड़ी देशों के दौरे पर हैं, जहाँ उनका मुख्य उद्देश्य वाशिंगटन और तेहरान के बीच हाल ही में हुए समझौते पर क्षेत्रीय सहयोगियों को विश्वास में लेना है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश इस बात को लेकर आशंकित हैं कि खाड़ी देशों के लिए ईरान शांति समझौता में दी गई अत्यधिक रियायतें ईरान को और अधिक शक्तिशाली बना सकती हैं। इस नए समझौते ने क्षेत्र के सुरक्षा संतुलन और तेल आपूर्ति की स्थिरता को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

खाड़ी देशों के लिए ईरान शांति समझौता में शामिल कुछ प्रावधानों ने क्षेत्रीय नेताओं को चौंका दिया है। समझौते के मसौदे में ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता पर कोई सीमा नहीं है और तेहरान के लिए 300 बिलियन डॉलर के पुनर्निर्माण कोष का प्रस्ताव शामिल है। क्षेत्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यह वित्तीय सहायता ईरान को अपनी सैन्य शक्ति बढ़ाने और प्रॉक्सी समूहों का समर्थन करने में मदद कर सकती है। खाड़ी देशों के लिए ईरान शांति समझौता के कारण अब ये देश वाशिंगटन के साथ अपनी दशकों पुरानी सुरक्षा साझेदारी पर पुनर्विचार करने को मजबूर हो सकते हैं।

सुरक्षा और रणनीतिक चिंताएं

खाड़ी देशों के लिए ईरान शांति समझौता को लेकर सबसे बड़ी आपत्ति मिसाइल क्षमताओं पर चुप्पी को लेकर है। चार महीने पहले शुरू हुए युद्ध के दौरान ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों से इन देशों को निशाना बनाया था, इसलिए खाड़ी राष्ट्रों की सुरक्षा चिंताएं जायज हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि खाड़ी देशों के लिए ईरान शांति समझौता में मिसाइलों का उल्लेख न होना, इन देशों को सीधे तौर पर असुरक्षित छोड़ देता है। इसके अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का संभावित नियंत्रण कतर और सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिए एक बड़ी चुनौती है।

इस दौरे पर मार्को रुबियो के लिए यह एक कठिन संतुलन होगा। उन्हें अपने क्षेत्रीय सहयोगियों को आश्वस्त करना है, बिना इस समझौते की आलोचना किए जिसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पूर्ण समर्थन प्राप्त है। पूर्व अमेरिकी अधिकारी एंड्रयू पीक ने कहा:

"आप उन्हें बस यह याद दिला सकते हैं कि राष्ट्रपति ने ईरान के प्रति अत्यंत सख्त नीतियां अपनाई हैं। यदि यह समझौता विफल होता है, तो उन्हें ईरान पर फिर से प्रहार करने में कोई संकोच नहीं होगा।"

क्षेत्रीय अस्थिरता का खतरा

बहरीन जैसे देशों को विशेष रूप से चिंता है कि एक अच्छी तरह से वित्तपोषित ईरान वहां की शिया आबादी के बीच विद्रोह को भड़का सकता है। खाड़ी देशों के लिए ईरान शांति समझौता से जुड़ी यह अनिश्चितता न केवल सुरक्षा, बल्कि राजनीतिक स्थिरता के लिए भी एक बड़ा खतरा है। सऊदी स्तंभकार अब्दुल रहमान अल-रशीद ने अरब न्यूज में लिखा है कि ईरान को मिलने वाली यह भारी धनराशि ईरान के लोगों के जीवन स्तर को सुधारने के बजाय उसके सैन्य प्रभाव को मजबूत करने में खर्च की जाएगी।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने हाल ही में तेहरान के साथ संबंधों को मौलिक रूप से बदलने की बात कही है, जिसने खाड़ी देशों के लिए ईरान शांति समझौता के प्रति उनके संदेह को और बढ़ा दिया है। खाड़ी देशों के लिए ईरान शांति समझौता के तहत तेहरान की वापसी एक क्षेत्रीय शक्ति के रूप में हो रही है, जिसे ये देश अपने अस्तित्व के लिए खतरा देखते हैं। भविष्य में वाशिंगटन और खाड़ी देशों के बीच सुरक्षा सहयोग कैसे आगे बढ़ेगा, यह इसी बात पर निर्भर करेगा कि रुबियो इस दौरे पर क्षेत्रीय नेताओं के भय को कितना कम कर पाते हैं। [1]

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। खाड़ी देशों के लिए ईरान शांति समझौता एवं क्षेत्रीय भू-राजनीतिक सुरक्षा समझौते अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के अधीन हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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