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पावटा अस्पताल: कलेक्टर का निरीक्षण, चिकित्सा व्यवस्था पर विशेष जोर

पावटा अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने बेहतर चिकित्सा व्यवस्था और कड़े प्रोटोकॉल पालन के सख्त निर्देश जारी किए।

By अजय त्यागी
1 min read
Advertisement002309202602.jpg advertisement13Aug2026%20copy.jpg पावटा अस्पताल का निरिक्षण

पावटा अस्पताल का निरिक्षण

जोधपुर, राजस्थान (शिंभू सिंह शेखावत)। जोधपुर के जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट आलोक रंजन ने सोमवार को स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया। बैठक का मुख्य विषय पावटा अस्पताल में दी जा रही चिकित्सा सुविधाएं और वहां व्याप्त व्यवस्थाएं रही। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष कुमार मिश्रा भी इस दौरान उपस्थित रहे। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि मरीजों के उपचार, सुरक्षा और अस्पताल की कार्यप्रणाली में किसी भी प्रकार की कोताही कतई स्वीकार्य नहीं होगी।

बैठक में डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बीएस जोधा, एमडीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. विकास राजपुरोहित, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुरेन्द्र सिंह शेखावत और पावटा अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. कुलबीर चौपड़ा सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि प्रत्येक भर्ती मरीज की स्वास्थ्य प्रोफाइल को नियमित रूप से अपडेट किया जाए। प्रशासन का मुख्य लक्ष्य मरीजों को हर स्तर पर सर्वोत्तम और सुरक्षित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है।

चिकित्सा व्यवस्थाओं का निरीक्षण

समीक्षा बैठक के उपरांत जिला कलेक्टर आलोक रंजन ने जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष कुमार मिश्रा के साथ सीधे पावटा अस्पताल का दौरा किया। वहां पहुंचकर उन्होंने चिकित्सा व्यवस्थाओं का भौतिक निरीक्षण किया और 20 जून को सिजेरियन ऑपरेशन के बाद कुछ प्रसूताओं के स्वास्थ्य प्रभावित होने की घटना की विस्तृत जानकारी ली। कलेक्टर ने अधिकारियों को ऑपरेशन थियेटर में प्रयुक्त होने वाले सभी उपकरणों के रखरखाव और संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने अवगत कराया कि घटना के बाद गंभीर स्थिति वाली दो प्रसूताओं, सोनू एवं ललिता को बेहतर उपचार के लिए तत्काल डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में रेफर कर दिया गया था। प्रशासन अब इस मामले की गहन निगरानी कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसी चूक न हो। चिकित्सा अधिकारियों को यह निर्देशित किया गया कि वे वार्डों में निरंतर मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें और मरीजों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील रहें। अस्पताल की कार्यप्रणाली को सुदृढ़ करने हेतु एक ठोस तंत्र बनाया जा रहा है।

प्रशासनिक निर्देश और जवाबदेही

जिला कलेक्टर ने प्रसूता वार्डों में वरिष्ठ चिकित्सकों द्वारा नियमित राउंड लेने पर विशेष जोर दिया। उनका मानना है कि पावटा अस्पताल में सुधार के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही अनिवार्य है। स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे अस्पताल की दैनिक गतिविधियों की रिपोर्ट समय पर प्रस्तुत करें। यदि किसी मरीज के उपचार में देरी या लापरवाही सामने आती है, तो कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। यह सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है कि चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी रहे।

प्रशासन का स्पष्ट मत है कि मरीजों का विश्वास बनाए रखने के लिए प्रबंधन और संसाधनों का सही उपयोग अत्यंत आवश्यक है। पावटा अस्पताल की सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में यह एक निर्णायक पहल है। हालिया घटनाक्रमों के बाद से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को अपनी सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि मरीज बिना किसी परेशानी के सुरक्षित उपचार पा सकें। जोधपुर प्रशासन का यह प्रयास चिकित्सा सुविधाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार लाने के लिए प्रतिबद्ध है।

"सभी मरीजों की समुचित देखभाल सुनिश्चित की जाए तथा भर्ती मरीजों की नियमित स्वास्थ्य प्रोफाइल अपडेट की जाए। विशेष रूप से प्रसूताओं की वरिष्ठ चिकित्सकों की देखरेख में नियमित मॉनिटरिंग की जाए।" - आलोक रंजन, जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट, जोधपुर।

सुधारात्मक कार्यों की प्रगति

निरीक्षण के दौरान जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष कुमार मिश्रा ने व्यवस्थाओं को और अधिक कारगर बनाने के लिए कई व्यावहारिक सुझाव दिए। प्रशासनिक स्तर पर पावटा अस्पताल में सुधार हेतु यह एक समन्वित प्रयास है, जिसका सकारात्मक प्रभाव दिखाई देगा। सभी संबंधित अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ करने का निर्देश दिया गया है। आगामी समय में स्वास्थ्य विभाग की ओर से इन सुधार कार्यों की निरंतर निगरानी की जाएगी ताकि गुणवत्ता बनी रहे।

अंत में, कलेक्टर ने अस्पताल के संपूर्ण स्टाफ का आह्वान किया कि वे मरीजों के प्रति उदार और समर्पित दृष्टिकोण अपनाएं। प्रशासन भविष्य में भी इस प्रकार के सघन निरीक्षण जारी रखेगा ताकि अस्पताल परिसर का वातावरण मरीजों के लिए पूरी तरह सुरक्षित और सुविधाजनक बना रहे। जोधपुर प्रशासन का यह कदम न केवल स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए है, बल्कि यह जनता के प्रति जवाबदेही का भी मजबूत प्रमाण है, जो चिकित्सा व्यवस्था में बड़े बदलाव का सूत्रधार बन सकता है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। चिकित्सा सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही के विरुद्ध प्रशासनिक प्रक्रिया एवं विभागीय जांच जारी है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief