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मलेरिया का मौसमी प्रकोप बढ़ा, स्क्रीनिंग और उपचार अभियान तेज

मलेरिया का मौसमी प्रकोप दूरदराज के आदिवासी इलाकों में तेजी से बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित गांवों में स्क्रीनिंग और उपचार अभियान तेज किया है।

By अजय त्यागी
1 min read
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स्वास्थ्य जांच करते चिकित्सक

स्वास्थ्य जांच करते चिकित्सक

गंजाम, ओडिशा। मलेरिया का मौसमी प्रकोप दूरदराज के आदिवासी इलाकों में तेजी से बढ़ रहा है। मानसून की पहली बारिश के बाद से ही यहां मौसमी बीमारियों ने दस्तक दे दी है, जिससे ग्रामीण दहशत में हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने तत्काल प्रभावित गांवों का दौरा किया और व्यापक स्क्रीनिंग अभियान चलाया है। इन गांवों में संक्रमण के कई मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। यह पूरा क्षेत्र अपनी भौगोलिक स्थिति और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण हर साल मलेरिया का मौसमी प्रकोप झेलता है। [1]

स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौतियां

पहाड़ी और घने जंगलों से घिरे इन गांवों में स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच बेहद कठिन है। उप-केंद्र छह किलोमीटर दूर है, जबकि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। गंभीर स्थिति में ग्रामीणों को 50 किलोमीटर तक की लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जो मानसून के दौरान चुनौतीपूर्ण हो जाती है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, रुका हुआ पानी और मच्छरों के पनपने के अनुकूल स्थितियां मलेरिया का मौसमी प्रकोप बढ़ने का मुख्य कारण बनी हैं। ग्रामीण दैनिक जरूरतों के लिए असुरक्षित प्राकृतिक झरनों के पानी पर निर्भर हैं।

इलाज और जागरूकता

संक्रमण की पुष्टि के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल चिकित्सा अभियान शुरू कर दिया है। ईटीवी भारत की एक रिपोर्ट के अनुसार, संक्रमित मरीजों में से नौ को प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम और दो को प्लाज्मोडियम विवैक्स से पीड़ित पाया गया है। सभी मरीजों को दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं और स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा उन्हें मच्छरदानी के उपयोग और जलभराव को रोकने के प्रति जागरूक किया गया है। स्थानीय सरपंच ने बताया कि सड़क कनेक्टिविटी और चिकित्सा बुनियादी ढांचे के अभाव में आदिवासी आबादी अक्सर मलेरिया का मौसमी प्रकोप झेलती है।

प्रशासन की निरंतर सक्रियता

विशेष विकास परिषद की उपाध्यक्ष ने माना कि ग्रीष्मकाल से मानसून के बीच आदिवासी समुदायों में स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ जाती हैं। सरकार सौर ऊर्जा से चलने वाले नलकूपों के माध्यम से पेयजल सुविधाएं बढ़ाने का प्रयास कर रही है, लेकिन स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूकता का स्तर अभी भी सीमित है। प्रशासन का कहना है कि दुर्गम बस्तियों में सड़क संपर्क और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए काम जारी है, ताकि भविष्य में मलेरिया का मौसमी प्रकोप न दोहराया जाए।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। मलेरिया के प्रकोप के दौरान स्वास्थ्य संबंधी किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें और तुरंत नजदीकी चिकित्सा केंद्र पर संपर्क करें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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