लेक्चरर भर्ती में ईडी की बड़ी कार्रवाई- OMR शीट का खेल उजागर
लेक्चरर भर्ती में ईडी की बड़ी कार्रवाई से OMR शीट का खेल उजागर हुआ है। 262 अयोग्य उम्मीदवारों को लाभ पहुँचाने की जांच और छापेमारी जारी।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
चेन्नई, तमिलनाडु। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के चेन्नई ज़ोनल ऑफिस ने 23 जून को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए चेन्नई, मदुरै, त्रिची और कोयंबटूर में 21 जगहों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई 'प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002' के तहत की गई है। यह पूरा मामला वर्ष 2017 में टीचर्स रिक्रूटमेंट बोर्ड (टीआरबी) द्वारा सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेजों में लेक्चरर भर्ती परीक्षा के दौरान OMR शीट का खेल उजागर हुआ है। इस घोटाले में 262 अयोग्य उम्मीदवारों को अनुचित तरीके से लेक्चरर बनाने का गंभीर मामला सामने आया है। [1]
लेक्चरर भर्ती में ईडी की बड़ी कार्रवाई के बाद जांच का दायरा काफी बढ़ गया है। ईडी ने तमिलनाडु पुलिस द्वारा 2017 में दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर इस केस की जांच शुरू की थी। एफआईआर में यह आरोप लगाया गया था कि टीआरबी में परीक्षा संपन्न होने के बाद स्कैनिंग की प्रक्रिया के दौरान, आरोपियों ने स्कैन की गई तस्वीरों में डिजिटल रूप से बदलाव किया था। फाइनल उत्तर कुंजी के मुकाबले कुछ खास उम्मीदवारों के नंबर बढ़ा दिए गए थे। आरोपियों ने खास उम्मीदवारों के नाम वाली 385 सेकेंडरी ओएमआर शीट का एक अतिरिक्त सेट भी तैयार किया था। इस प्रकार से लेक्चरर भर्ती परीक्षा के दौरान OMR शीट का खेल उजागर हुआ है।
भर्ती घोटाले का मास्टरमाइंड
ईडी की विस्तृत जांच से पता चला है कि वी. सुब्रमण्यन और उनके सहयोगी सुरेश पॉल की अगुवाई में आरोपियों ने डाटाटेक के टेक्निकल स्टाफ़ (शेख दाऊद नसार और आई. रघुपति) की मदद से 2017 में परीक्षा प्रक्रिया में सेंध लगाने की साज़िश रची थी। एजेंटों और बिचौलियों के एक संगठित नेटवर्क के ज़रिए उन्होंने इच्छुक उम्मीदवारों को निशाना बनाया। प्रत्येक उम्मीदवार से 14 से 16 लाख रुपये नकद वसूले गए थे। इस अवैध कमाई को छिपाने के लिए एक जटिल वित्तीय जाल बिछाया गया था, ताकि किसी को संदेह न हो।
"नतीजतन, 262 अयोग्य उम्मीदवारों को धोखाधड़ी से पॉलिटेक्निक लेक्चरर पद के लिए योग्य दिखाया गया। बाद में सार्वजनिक याचिकाओं के ज़रिए इस गड़बड़ी का पता चला, जिसके बाद दोबारा मूल्यांकन हुआ। नतीजा वापस लिया गया और मामला दर्ज हुआ।"
ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि जमा किए गए कैश को 'म्यूल अकाउंट्स' और प्रॉक्सी फ़र्मों (ट्रस्ट एंटरप्राइज़ेज़, विज़डम एंटरप्राइज़ेज़ और सूर्यम एंटरप्राइज़ेज़) के खातों के ज़रिए घुमाया गया। जांच एजेंसी की तलाशी का मुख्य मकसद घोटाले से हुई 'अपराध से हुई कमाई' का पता लगाना था। तलाशी के दौरान एजेंटों द्वारा जमा किए गए कैश का रिकॉर्ड, ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी, और महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत ज़ब्त किए गए हैं। जांच एजेंसी ने 13.18 लाख रुपये का कैश ज़ब्त किया है। 56 बैंक खातों को फ्रीज़ किया गया है और 36 अचल संपत्तियों के दस्तावेज़ ज़ब्त किए गए हैं, जिनकी गाइडेंस वैल्यू 9.67 करोड़ रुपये है। बहरहाल, ईडी की व्यापक छापेमारी से यह OMR शीट का खेल उजागर हुआ है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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