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नर्सिंग कर्मियों की पीड़ा का समाधान कब? चिकित्सा निदेशक को दिया ज्ञापन

नर्सिंग कर्मियों की पीड़ा का समाधान कब? इसे लेकर चिंता बढ़ गई है। भीलवाड़ा के नर्सिंग कर्मियों ने ज्ञापन सौंपकर जल्द समाधान की मांग की है।

By अजय त्यागी
1 min read
Advertisement002309202602.jpg advertisement13Aug2026%20copy.jpg ज्ञापन देने जाते हुए पदाधिकारी

ज्ञापन देने जाते हुए पदाधिकारी

भीलवाड़ा, राजस्थान। राजस्थान नर्सेज यूनियन महात्मा गांधी चिकित्सालय भीलवाड़ा के बैनर तले जिला अध्यक्ष लक्की ब्यावट के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने राजधानी जयपुर पहुंचकर चिकित्सा निदेशक राकेश शर्मा से मुलाकात की। कर्मचारियों ने वेतन विसंगतियों, पद विलोपन और संविदा कर्मियों के समायोजन से जुड़ी अत्यंत ज्वलंत समस्याओं को लेकर विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। नर्सिंग कर्मियों की पीड़ा का समाधान आखिर कब होगा, यह यक्ष प्रश्न अब राज्य के चिकित्सा संस्थानों में एक बड़ी चर्चा का केंद्र बना हुआ है, जिसे लेकर कर्मचारियों ने सरकार के समक्ष अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।

भारी कार्यभार और मानसिक तनाव

जिला संयोजक अमित व्यास ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि महात्मा गांधी चिकित्सालय भीलवाड़ा एवं राजमाता विजय राजे सिंधिया मेडिकल कॉलेज में तैनात नर्सेज कर्मचारी भारी मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। नियमित मासिक वेतन की परेशानी और ठेके पर कार्यरत अड़तालीस संविदा कर्मियों के अचानक कार्यमुक्त होने के भय ने कर्मचारियों का मनोबल तोड़ दिया है। चिकित्सालय की लचर व्यवस्था के कारण न केवल प्रशासनिक स्तर पर, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी नर्सिंग ऑफिसर्स को अत्यधिक आर्थिक और मानसिक दंश झेलना पड़ रहा है, जिसे तुरंत हल किया जाना चाहिए।

महासचिव विनोद सोनी ने चिकित्सा निदेशक को जमीनी हकीकत से अवगत कराया कि महात्मा गांधी चिकित्सालय में स्वीकृत पांच सौ तैंतीस बेड की तुलना में लगभग आठ सौ तीस बेड लगाकर मरीजों का लगातार इलाज किया जा रहा है। प्रतिदिन लगभग नौ सौ से लेकर एक हजार मरीजों के उपचार का अत्यधिक दबाव सीधे तौर पर वहां कार्यरत नर्सिंग ऑफिसर्स पर पड़ रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि पिछले एक दशक से नए पद न बढ़ाए जाने के कारण नर्सिंग कर्मियों की पीड़ा और यह मानसिक तनाव बहुत अधिक गहरा गया है।

"निदेशक को बताया गया कि यह मानसिक तनाव न केवल नर्सेज संवर्ग पर अपितु एक दशक से महात्मा गांधी चिकित्सालय में अन्य नर्सेज के पद भी न बढ़ाए जाने के कारण है, जहां 533 बेड स्वीकृत हैं उसके विपरीत लगभग 830 बेड लगाकर प्रतिदिन करीबन 900 से 1000 मरीज का इलाज किया जा रहा है।" - महासचिव विनोद सोनी

उचित समायोजन की मांग 

यूनियन ने चिकित्सा निदेशक के समक्ष मजबूती से यह मांग रखी कि जिन अड़तालीस संविदा कर्मियों के पद विलोपित किए गए हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से कैथ लेब में वापस समायोजित किया जाए। इसके साथ ही, मेडिकल कॉलेज से पद विलोपन के उपरांत भारी आर्थिक संकट झेल रहे तरासी नर्सेज को भी महात्मा गांधी चिकित्सालय में समायोजित करने की सिफारिश की गई है। नर्सिंग अधीक्षक पदों पर पदोन्नति में छूट और वेतन विसंगति दूर कर नर्सिंग कर्मियों की पीड़ा को शीघ्र समाप्त करने की मार्मिक अपील सरकार और प्रशासन से की गई है।

निदेशालय में बात रखने के पश्चात प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों को मजबूती देने के लिए मांडलगढ़ विधायक गोपाल खंडेलवाल से विशेष रूप से भेंट की। उपाध्यक्ष करण सिंह सिसोदिया ने बताया कि विधायक महोदय ने कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विधायक ने तुरंत राज्य के चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर को दूरभाष पर संपर्क किया और नर्सिंग कर्मियों की पीड़ा दूर करने की जोरदार पैरवी की। इस त्वरित और सक्रिय कदम से कर्मचारियों के बीच न्याय मिलने की एक नई उम्मीद और आशा जगी है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। चिकित्सा सेवाओं एवं कर्मचारियों से जुड़ी समस्याओं का अंतिम समाधान विभागीय नियमों एवं सरकारी नीति के अधीन है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief